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'ट्रंप खुद मोदी को कॉल करें...', अमेरिका के पूर्व NSA अपने ही देश के राष्ट्रपति पर भड़के, कहा - भारत पर टैरिफ बड़ी गलती

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने पर ट्रंप की नीति पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि 'अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर भारत के लिए ऐसी प्राथमिकता पर सहमति होनी चाहिए, जो शुल्क कम करें और वार्ता को खुला रखें.'

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भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ मसले पर बातचीत जारी है. सोमवार को अमेरिकी अधिकारी भारत दौरे पर थे. इस दौरान एक बैठक में कई घंटे तक दोनों देशों के बीच टैरिफ मसले को सुलझाने पर चर्चा हुई. पिछले कई महीनों से ट्रंप के टैरिफ मसले पर खुलकर अपनी बात रखने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति  की आलोचना की है. उन्होंने फिर से ट्रंप सरकार पर निशाना साधा है और अमेरिकी सरकार की भारत के खिलाफ टैरिफ नीति को गलत ठहराया है. 

'शुल्क कम करें और वार्ता को खुला रखें'

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने पर ट्रंप की नीति पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है 'कि अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर भारत के लिए ऐसी प्राथमिकता पर सहमति होनी चाहिए, जो शुल्क कम करें और वार्ता को खुला रखें.' उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि 'टैरिफ कम करने और आगे की चर्चा के लिए रास्ता खुला रखने वाला समझौता सबसे बेहतर होगा. हमें टैरिफ पर सहमति बनाने और इस आधार पर आगे बढ़ने पर ध्यान देना चाहिए.'

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'दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने पर होनी चाहिए चर्चा'

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जॉन बोल्टन ने यह भी कहा कि 'राष्ट्रपति ट्रंप को पीएम मोदी को फोन करना चाहिए और संबंध सुधारने पर आगे बातचीत बढ़ानी चाहिए. उन्हें क्वॉड शिखर सम्मेलन के लिए भी भारत जाना चाहिए. रूस पर कोई प्रत्यक्ष टैरिफ नहीं लगाया गया, जबकि चीन जो भारत से भी ज्यादा तेल खरीदता है. उस पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध हमेशा से चुनौतियां पेश करते हैं. रूस से तेल और गैस की खरीद कम करने की जरूरत है और इसके कई तरीके हैं, जिनसे भारत को कभी आर्थिक नुकसान नहीं होगा.' 

'व्यक्तिगत तालमेल बहुत जरूरी'

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उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि 'दोनों पक्षों को टैरिफ कम करने और विश्वास बहाल करने के लिए अपनी वार्ता फिर से शुरू करनी चाहिए. दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए नेताओं के बीच भी व्यक्तिगत तालमेल बेहद जरूरी है. राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बातचीत होनी चाहिए. अगर दोनों नेता इस बारे में बात करते हैं और करीब आते हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है. मेरा मानना है कि ट्रंप को क्वॉड शिखर सम्मेलन के लिए भारत जरूर जाना चाहिए.' 

'भारत के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं'

बोल्टन ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर पाकिस्तान के हालिया बयान में यह बताया गया कि कश्मीर हमले के बाद हुए तनाव को कम करने में ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी. इससे यह समझ में आता है कि इस मुद्दे को केवल भारत और पाकिस्तान ने ही मिलकर सुलझाया है, जो लोग भारत के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं. वह जानते हैं कि इस तरह के समझौते के बाद यही स्थिति रही है कि भारत-पाकिस्तान के बीच के मुद्दों को दोनों देश मिलकर सुलझाएंगे.' 

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'ट्रंप अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का श्रेय लेने में माहिर'

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने यह भी कहा कि 'डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं. वह नोबेल शांति पुरस्कार की बात करते हैं, इससे साफ जाहिर होता है कि ट्रंप का जो भी बयान है, वह इस बात का सबूत है कि उन्हें भारत के बारे में बहुत कम जानकारी है.'

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बता दें कि यह पहली बार नहीं है. जब जॉन बोल्टन ने भारत पर लगाए गए टैरिफ मसले पर अपने ही देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेरा है. पिछले कई महीनों से जब-जब वह किसी भी इंटरव्यू में बैठे हैं या उन्होंने मीडिया से बातचीत की है, तो उन्होंने भारत-रूस, यूक्रेन युद्ध और टैरिफ मसले के अलावा कई अन्य मुद्दों पर खुलकर अपनी बात कही है. वह अपने बेबाक राय के लिए हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. 

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