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'गद्दारी उसका इतिहास...', पाकिस्तान से पींगे बढ़ा रहे अमेरिका को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिखा दिया आईना, आतंकिस्तान के काले कारनामों से उठाया पर्दा

डोनाल्ड ट्रंप और असीम मुनीर की बढ़ती नज़दीकियों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस रिश्ते में सिर्फ स्वार्थ की हवा भरी है. उन्होंने इशारों में याद दिलाया कि गद्दारी पाकिस्तान की आदत और मौके का फायदा उठाना अमेरिका की नीति रही है.

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पिछले कुछ दिनों से कूटनीति की दुनिया में एक नई पहेली गहराई से चर्चा में थी. यह पहेली थी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के विदेश मंत्री आसिम मुनीर की बढ़ती नजदीकियों की. लगातार यही सवाल उठ रहा था कि इस दोस्ती पर भारत कब और कैसे प्रतिक्रिया देगा. इस बीच भारत विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसका जवाब दुनिया को दे दिया.

विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान की इस दोस्ती के गुब्बारे में बस स्वार्थ की हवा भरी है. उन्होंने बिना मुनीर का नाम लिए इतिहास का वह काला पन्ना पलटा, जिसमें पाकिस्तान की गद्दारी और अमेरिका की अवसरवादी नीति लिखी है. जयशंकर के बयान ने एक साथ दोनों देशों को बेनकाब कर दिया.

ट्रंप-मुनीर की नई जुगलबंदी

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डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के कट्टरपंथी जनरल मुनीर को दोस्ती का आशीर्वाद दिया. इसका असर अब साफ नजर आ रहा है. बीते 48 घंटे में मुनीर ने जिस तरह से पाकिस्तान के भीतर तानाशाही को और मजबूत किया है, उसने साफ कर दिया है कि ये साझेदारी लोकतंत्र नहीं बल्कि स्वार्थ पर टिकी है. मुनीर ने संसद से एक ऐसा कानून जबरन पास कराया है, जिसके बाद पाकिस्तानी आर्मी किसी को भी बिना कारण जेल में डाल सकती है. इसके अलावा उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के रिश्तेदारों तक को जेल भेजा जा रहा है.

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भारत विरोधी एजेंडे को मिली हवा

जनरल मुनीर सिर्फ घरेलू स्तर पर तानाशाही नहीं कर रहे, बल्कि भारत विरोधी एजेंडे को भी खुलकर हवा दे रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बांग्लादेश के जरिए भारत के खिलाफ ब्रेनवॉश प्लान एक्टिव किया है. इसके लिए पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार को बांग्लादेश भेजा गया है. डार वहां सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मुलाकात करेंगे और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं से भी संपर्क साधेंगे. यह वही जमात है, जिसका आतंकियों से गहरा संबंध रहा है. पाकिस्तान चाहता है कि बांग्लादेश को भारत विरोधी अभियानों का केंद्र बना दिया जाए.

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ट्रंप की आंखों पर बंधी स्वार्थ की पट्टी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा समर्थक बताने वाला अमेरिका पाकिस्तान की इन हरकतों को क्यों अनदेखा कर रहा है. दरअसल, ट्रंप की आंखों पर स्वार्थ की पट्टी बंधी है. उन्हें आजकल नोबेल शांति पुरस्कार की उम्मीद दिखाई दे रही है. ऐसा लगता है कि उन्होंने नॉमिनेशन के बदले मुनीर को हर गुनाह की छूट दे दी है. लेकिन भारत इस दोस्ती को लेकर जरा भी चिंतित नहीं है. भारत जानता है कि यह रिश्ता मौसमी है. इसका न कोई मजबूत आधार है और न ही कोई स्थायी उम्मीद.

जयशंकर का तीखा हमला

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विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच दोस्ती का लंबा इतिहास रहा है और दोनों ने अक्सर उस इतिहास को नजरअंदाज किया है. उन्होंने याद दिलाया कि वही पाकिस्तानी फौज, जो आज अमेरिका की दोस्त बनी हुई है, कभी एबटाबाद में आतंकी ओसामा बिन लादेन को छिपाकर बैठी थी. जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों पर किसी भी तरह की मध्यस्थता को भारत स्वीकार नहीं करता. यह नीति पिछले 50 वर्षों से चली आ रही है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा.

पाकिस्तान की 3T रणनीति

  • फील्ड मार्शल मुनीर फिलहाल तीन मोर्चों पर काम कर रहे हैं.
  • घरेलू स्तर पर टॉर्चर की नीति.
  • भारत के खिलाफ टेरर को हथियार बनाना.
  • कूटनीति में ट्रेड को टूल की तरह इस्तेमाल करना.

मुनीर का सपना है कि तेल और खनिज संसाधनों का लालच देकर बांग्लादेश को अपने पक्ष में कर लिया जाए. इसके लिए पाकिस्तान ISI नेटवर्क को बांग्लादेश में सक्रिय कर चुका है और कोशिश है कि वहां की आर्मी में भी पाकिस्तान समर्थक नेतृत्व बैठाया जाए.

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भारत का साफ संदेश

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया दी है. जयशंकर ने कहा कि हमारे लिए सबसे पहले भारत का हित है. किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जा सकता. अगर अमेरिका को भारत से तेल खरीदना पसंद नहीं है तो ना खरीदे, लेकिन हकीकत यह है कि यूरोप और अमेरिका दोनों भारत से तेल खरीद रहे हैं. जयशंकर ने यह भी कहा कि हमने ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा जिसने विदेश नीति को इतने सार्वजनिक रूप से चलाया हो. ट्रंप का यह तरीका पारंपरिक से बिल्कुल अलग है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. सवाल यह है कि क्या भारत अपने हितों से समझौता करेगा? जवाब साफ है, भारत किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा.

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बताते चलें कि ट्रंप और मुनीर की नई दोस्ती फिलहाल सुर्खियों में है, लेकिन भारत के लिए यह कोई खतरा नहीं है. भारत अपनी नीति और अपने हितों पर अडिग है. जयशंकर के बयान ने साफ कर दिया है कि चाहे अमेरिका हो या पाकिस्तान, भारत अब किसी दबाव में नहीं आने वाला.

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