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लद्दाख में दर्दनाक हादसा, सेना की गाड़ी पर गिरी चट्टान, एक अधिकारी समेत 3 जवान शहीद
लद्दाख से इस समय एक बेहद दुखद खबर आई है. दुरबुक इलाके में भारतीय सेना की एक गाड़ी पर अचानक चट्टान गिर गई, जिससे बड़ा हादसा हो गया. इस दर्दनाक घटना में एक बहादुर अधिकारी और दो जवानों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि एक अन्य अधिकारी और दो जवान गंभीर रूप से घायल हैं.
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लद्दाख से इस समय एक बेहद दुखद खबर आई है. दुरबुक इलाके में भारतीय सेना की एक गाड़ी पर अचानक चट्टान गिर गई, जिससे बड़ा हादसा हो गया. इस दर्दनाक घटना में एक बहादुर अधिकारी और दो जवानों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि एक अन्य अधिकारी और दो जवान गंभीर रूप से घायल हैं.
क्या हुआ?
लद्दाख में आज, 30 जुलाई 2025 को सुबह 11:30 बजे एक सैन्य काफिले के वाहन पर चट्टान से एक बड़ा पत्थर गिर गया. दैनिक एक्सेलसियर की तस्वीरों में टूटा वाहन और राहत में लगे सैनिक दिख रहे हैं. भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर ने बताया कि बचाव कार्य जारी है. यह घटना दिखाती है कि यह क्षेत्र भूस्खलन के खतरे में है.
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यह क्षेत्र क्यों खास है?
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लद्दाख में XIV कोर, जिसे फायर एंड फ्यूरी कोर कहते हैं, भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान सीमा की रक्षा करती है. 1990 के दशक में इसे नगालैंड से यहां लाया गया था. यह कोर सियाचिन ग्लेशियर जैसे महत्वपूर्ण इलाकों की देखभाल करती है. यह घटना सैन्य गतिविधियों में दिक्कतें पैदा कर सकती है.
मौसम और जमीन की समस्या
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भूवैज्ञानिक सर्वे ऑफ इंडिया की 2021 रिपोर्ट कहती है कि जलवायु परिवर्तन से पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से भूस्खलन 30% बढ़ गया है. एनडीटीवी की खबरों में 2023 में 200 वाहनों के फंसने की घटना भी बताई गई है. बर्फ और बारिश से सड़कें बंद होती हैं, जो राहत कार्य को मुश्किल बनाती है.
राहत का काम
फायर एंड फ्यूरी कोर ने तुरंत बचाव शुरू किया. सोशल मीडिया के मुताबिक, चार सैनिक घायल हुए, जिसमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी है. बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) सड़क ठीक करने में मदद कर रहा है, लेकिन खराब जमीन और मौसम से काम मुश्किल हो रहा है.
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आगे क्या करना चाहिए?
इस घटना से पता चलता है कि लद्दाख में सैनिकों के लिए बेहतर सड़कें और चेतावनी सिस्टम चाहिए. जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लंबे समय के प्लान और सैनिकों के लिए ट्रेनिंग जरूरी है.
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इस हालिया हादसे ने एक बार फिर देश को गहरे शोक में डाल दिया है. शहीद हुए जवानों और अधिकारी को पूरे राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि दी जा रही है. घायल सैनिकों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है. सेना ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख जैसे कठिन इलाकों में तैनात जवान हर मौसम में डटे रहते हैं और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं.