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2300 घंटे किया ट्रैक, 6 घंटे का ऑपरेशन...लश्कर कमांडर मूसा को सेना ने ऐसे किया ढेर, पहलगाम में धर्म पूछकर की थी सैलानियों की नृशंस हत्या

Operation Mahadev: जम्मू-कश्मीर के लिडवास इलाके में सोमवार को सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है. सेना के जवानों ने 'ऑपरेशन महादेव' के तहत तीन आतंकियों को मार गिराया गया है. सूत्रों के मुताबिक तीनों आतंकियों की पहचान लश्कर कमांडर सुलेमान शाह, अबू हमजा और यासिर के रूप में हुई है. आपको बता दें कि सुलेमान उर्फ मूसा ही इस हमले का मास्टरमाइंड था और वो पाकिस्तान सेना का SSG कमांडर रहा है और उसे ही TRF की इस अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. सुरक्षा बलों की ये मुठभेड़ लिडवास में हुई, जहां सेना ने आतंकियों की घेराबंदी कर उन्हें मार गिराया.

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Operation Mahadev Update: संसद में "ऑपरेशन सिंदूर" पर चल रही तीखी बहस के बीच बड़ी ख़बर सामने आ रही है. सुरक्षाबलों ने "ऑपरेशन महादेव" के तहत पहलगाम आतंकी हमले के मुख्य आरोपी सुलेमान शाह उर्फ हासिम मूसा को मुठभेड़ में मार गिराया है. सोशल मीडिया पर कार्रवाई में ढेर आतंकियों और बरामद गोला बारूद की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसे पॉलिसी के कारण नहीं दिखाया जा सकता. इस ऑपरेशन को लीड कर रही चिनार कॉर्प्स द्वारा आतंकियों के नाम को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.

आपको बता दें कि सुलेमान शाह पर सरकार ने ₹20 लाख का इनाम घोषित कर रखा था और वह लंबे समय से सुरक्षाबलों की नजरों में था. कहा जा रहा है कि इस कार्रवाई में दो अन्य दुर्दांत आतंकी अबू हमजा और यासिर भी मारे गए, जिनकी सुरक्षाबलों को काफी समय से तलाश थी.

दाछीगाम इलाके में हुई इस मुठभेड़ में सेना ने स्वदेशी ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और रडार जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर आतंकियों के ठिकाने की पहचान की. करीब छह घंटे चले ऑपरेशन में तीनों आतंकियों का सफाया कर दिया गया. संसद में जारी बहस के बीच मिली इस सफलता को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की सख्त नीति और ज़मीन पर हो रही ठोस कार्रवाई का प्रतीक माना जा रहा है. 

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सूत्रों के मुताबिक तीनों आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, अबू हमजा और यासिर के रूप में हुई है. आपको बता दें कि सुलेमान उर्फ मूसा ही इस हमले का मास्टरमाइंड था और वो पाकिस्तान सेना का SSG कमांडर रहा है और उसे ही TRF की इस अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. सुरक्षा बलों की ये मुठभेड़ लिडवास में हुई, जहां सेना ने आतंकियों की घेराबंदी कर उन्हें मार गिराया.

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चिनार कॉर्प्स ने दी ऑपरेशन महादेव की जानकारी
ऑपरेशन के संबंध में सेना की चिनार कॉर्प्स ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा की. एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ऑपरेशन महादेव: लिडवास इलाके में आतंकियों से संपर्क स्थापित हुआ है और ऑपरेशन जारी है. इसके कुछ समय बाद एक अन्य पोस्ट में चिनार कॉर्प्स ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया है और ऑपरेशन अभी भी जारी है.

सेना के अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर लिडवास इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था. इस दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जो कई घंटों तक चली. मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली. इलाके में फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है.

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28 जुलाई की सुबह सुरक्षाबलों ने एक ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें आतंकवादियों से मुठभेड़ हुई. ये मुठभेड़ करीब 6 घंटे तक चली, जिसके बाद तीन आतंकवादी मारे गए. इस दौरान सुरक्षाबलों ने AK-47 राइफल, ग्रेनेड और IED जैसे खतरनाक हथियार बरामद किए, जो पहलगाम हमले में इस्तेमाल हुए थे. सेना ने दावा किया कि इस मुठभेड़ में पहलगाम हमले के मुख्य साजिशकर्ता को ढेर किया गया है, जबकि बाकी आतंकवादियों की तलाश जारी है.

ऑपरेशन महादेव में क्या खास था?

1. स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल: इस ऑपरेशन में सेना ने अपनी खुद की ड्रोन और रडार तकनीक का उपयोग किया, जिससे जंगलों में छिपे आतंकवादियों को ढूंढने में आसानी हुई. यह तकनीक ऑपरेशन को बहुत अधिक प्रभावी बना पाई.

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2. सटीकता: सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान यह सुनिश्चित किया कि नागरिकों को कोई भी नुकसान न पहुंचे. सटीक योजना और सावधानी से यह ऑपरेशन पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से किया गया.

3. लंबी रणनीति: यह ऑपरेशन 96 दिन तक चला, जिसमें जासूसी, घेराबंदी और सटीक हमले शामिल थे. रात के समय भी आतंकवादियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए ड्रोन और थर्मल इमेजिंग का सहारा लिया गया.

4. रोबोटिक सिस्टम का उपयोग: IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को निष्क्रिय करने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे सुरक्षाबलों को कम जोखिम झेलना पड़ा और ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित हुई.

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इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना और सुरक्षाबल न केवल अपनी ताकत में बल्कि अपनी रणनीतिक सोच और तकनीकी क्षमताओं में भी काफी मजबूत हो गए हैं. आतंकवाद के खिलाफ उनकी लड़ाई हर दिन और भी प्रभावी होती जा रही है.

'ऑपरेशन महादेव' को हाल के समय में घाटी में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है. यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि सेना और अन्य सुरक्षाबल आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी मुस्तैदी और सटीक रणनीति के साथ जुटे हुए हैं.

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22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के बाद से आतंकवाद-रोधी अभियान आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और मानव खुफिया जानकारी का उपयोग कर रहे हैं.

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पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले ने पूरे देश को आक्रोशित कर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए सशस्त्र बलों को खुली छूट दे दी. भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ढांचे पर लक्षित हमले किए और नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया.

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