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ED के खिलाफ अमित शाह के घर के बाहर TMC सांसदों का धरना, मौके पर पहुंची पुलिस और सभी को उठा ले गई

गुरुवार को कोलकाता में हुई ईडी रेड के विरोध में टीएमसी के 8 सांसदों ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर धरना दिया, जिससे केंद्र और राज्य के बीच टकराव और तेज हो गया है. इस दौरान सभी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.

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पश्चिम बंगाल में में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल काफी तेज है. बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. ताजा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड और उसके खिलाफ टीएमसी (TMC) सांसदों के धरने से जुड़ा है, जिसने सियासी माहौल को और गरमा दिया है.

दरअसल, गुरुवार को ईडी ने कोलकाता में कई ठिकानों पर छापेमारी की. इनमें से दो रेड IPAC कंपनी से जुड़ी बताई गईं. IPAC वही कंपनी है, जो तृणमूल कांग्रेस के चुनावी मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल रही है. ईडी की इस कार्रवाई के बाद टीएमसी ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया. पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल को प्रभावित करने और विपक्ष को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

TMC सांसदों ने दिया धरना 

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इसी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के 8 सांसद दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए. धरने में शामिल सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आजाद और डॉ. शर्मिला सरकार के नाम शामिल हैं. सांसदों का कहना था कि ईडी रेड लोकतंत्र पर हमला है और इसका जवाब सड़कों पर दिया जाएगा. हालांकि धरना ज्यादा देर तक नहीं चल सका. दिल्ली पुलिस ने सभी सांसदों को हिरासत में ले लिया और उन्हें संसद मार्ग थाने ले जाया गया.

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CM ममता ने गृह मंत्री शाह पर लगाए थे आरोप 

कोलकाता में ईडी रेड के दौरान भी हालात काफी तनावपूर्ण रहे. IPAC के जिन दो ठिकानों पर छापेमारी चल रही थी, वहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद पहुंच गई थीं. इसे लेकर ईडी ने गंभीर आरोप लगाए. एजेंसी का दावा है कि हवाला रैकेट और कोयला तस्करी स्कैम से जुड़े कई अहम सबूत मुख्यमंत्री अपने साथ ले गईं. ईडी ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में बंगाल पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, जिससे जांच को प्रभावित करने की कोशिश हुई.

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बंटा हुआ विपक्ष 

इस पूरे मामले पर विपक्षी राजनीति भी बंटी हुई नजर आई. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि यह रेड बंगाल चुनाव का नतीजा बता रही है. कांग्रेस के बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने भी बीजेपी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल करना बीजेपी की पुरानी आदत बन चुकी है. हालांकि उन्होंने टीएमसी और बीजेपी के बीच मैच फिक्सिंग का आरोप भी लगा दिया, जिससे कांग्रेस के भीतर ही अलग सुर सुनाई देने लगे. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तो एक कदम और आगे बढ़ते हुए सीधे टीएमसी को कटघरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि IPAC के जरिए तृणमूल कांग्रेस कई ऐसे काम कराती है, जिन पर सवाल उठते हैं. उनके इस बयान से साफ हो गया कि विपक्षी एकता के दावे जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ते दिख रहे हैं.

ED की कार्रवाई पर कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल 

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इस विवाद पर वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल की टिप्पणी भी चर्चा में है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ही ईडी पर नियंत्रण कर सकता है. हर विपक्ष शासित राज्य और हर विपक्षी नेता निशाने पर है. बंगाल में जो हो रहा है, वह बेहद परेशान करने वाला है. चुनाव के बीच ऐसी कार्रवाइयां संघीय ढांचे पर सवाल खड़े करती हैं. सिब्बल के मुताबिक ऐसा लगता है कि अब देश में संघवाद ईडी की दया पर टिका हुआ है.

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बताते चलें कि ईडी रेड और उसके खिलाफ धरने ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष हैं या राजनीतिक हथियार बनती जा रही हैं. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होने की पूरी संभावना है.

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