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सारी धमकी फेल, रूस से तेल खरीद जारी, भारत ने बताया कि... US के दिग्गज इकोनॉमिस्ट ने ट्रंप को लताड़ा, कहा- उसे मजबूर मत करो

अमेरिका के दिग्गज अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने ट्रंप के टैरिफ नीति की आलोचना की है. उन्होंने इसे आत्मघाती कदम करार दिया और कहा कि ये फैसला अपने पैर पर कुल्हारी मारने जैसा है. उन्होंने तो हाथी-चूहे की लड़ाई जैसी स्थिति से तुलना करते हुए कह दिया कि अमेरिकी टैरिफ का भारत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. यहां तक कि उन्होंने आपकी धमकियों के बावजूद रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया, ये बताता है कि ताकत किस ओर जा रही है. इतना ही नहीं उन्होंने ट्रंप को तगड़ा घेरा.

Image: PM Modi / Donald Trump (File Photo)
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भारत और अमेरिका के दशकों पुराने रिश्ते और करीब 25 सालों से बने स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पर डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ पागलपन भारी पड़ रहा है. दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है. जहां अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार और मंत्री बेतुके बयान देने और उकसाने से बाज नहीं आ रहे हैं वहीं, नई दिल्ली ने टकराव को और बढ़ाने से बचने के लिए चुप ही रहने का फैसला किया है. ये उसकी रणनीति का हिस्सा है. करना वही है जो राष्ट्रहित में होगा, लेकिन बयान नहीं देना है, वेट एंड वॉच की नीति मोदी सरकार की तरफ से अपनाई गई है. और ऐसा लगता है कि ये कामयाब होती दिख रही है.

'ट्रंप ने अपनै पैर पर मार ली कुल्हाड़ी'

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसलों, विशेषकर व्यापार शुल्क लगाने और सेंशन ठोकने का दांव उल्टा पड़ रहा है. उसकी अमेरिकी ही आलोचना कर रहे हैं. इतना ही नहीं तीखे शब्दों में. ऐसे ही एक हैं दिग्गज अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ, जिन्होंने कहा है कि हिंदुस्तान पर टैरिफ लगाना और ये सोचना कि इससे आप अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे तो ये अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है.

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कर्जे पर नहीं चल सकती अमेरिकी अर्थव्यवस्था: वोल्फ

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दुनिया के सबसे पुराने और बड़े लोकतंत्रों के बीच तेजी से बिगड़ रहे संबंधों पर चिंता जताते हुए प्रोफेसर वोल्फ मे कहा कि दुनिया के कथित सुपरपावर अमेरिका की आर्थिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब हो रही है. वजह साफ है कि चीन जैसे देशों को अब US में विश्वास नहीं रह गया है और वो लगातार अपनी पूंजि यहां से निकाल रहे हैं और कहीं और डायवर्ट कर रहे हैं. उन्होंने चेताते हुए कहा कि हम कर्जे पर अर्थव्यवस्था नहीं चला सकते. रिचर्ड ने तो यहां तक कहा कि जिस BRICS समूह को ट्रंप अमेरिका का दुश्मन बता रहे हैं वो ग्लोबल इकॉनोमिक आउटपुट के मामले में आज जी-7 से कहीं आगे निकल चुका है. 

'अमेरिका के साथियों की ग्लोबल प्रोडक्शन में क्या हिस्सेदारी है?'

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अमेरिकी अर्थशास्त्री ने आगे कहा कि ये दुनिया के लिए ऐतिहासिक यानी कि टेस्टिंग टाइम है. उन्होंने सवालिया लहजे में पूछते हुए कहा कि बताएं कि अमेरिका और उसके साथी देशों के समूहों का ग्लोबल प्रोडक्शन में साझेदारी क्या ही है, बेहद कम है. वहीं "अगर आप चीन, भारत और रूस और बाकी ब्रिक्स देशों को साथ में लेते हैं तो वैश्विक उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है, वहीं दूसरी तरफ जी-7 देशों को देखें तो इनकी हिस्सेदारी केवल 28 फीसदी है."

भारत ने बताया ताकत किस ओर जा रही है?

चेंजिंग ग्लोबल ऑर्डर में भारत और चीन की महती भूमिका करार देते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन दोनों देशों के इर्द-गिर्द ही पूरी कूटनीति और पॉलिटिक्स घूमेगी. उन्होंने कहा कि आपकी आपत्ति के बावजूद भारत और चीन रूसी तेल की खरीद जारी रखे हुए हैं. ये दिखाता है कि दुनिया में ताकत किधर जा रही है. उनका मतलब ये था कि दुनिया का सबसे बड़ा देश ड्रैगन और सबसे बड़ा लोकतंत्र दिल्ली यानी कि हाथी बता रहे हैं कि आपके अनुसार नहीं चलेगी दुनिया, आप नहीं बताएंगे कि क्या करना है क्या नहीं. ये तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक चूहा हाथी को मुक्का मारकर खुद को बलवान समझने लगता है, ये वही है.

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'ट्रंप ने BRICS को अमेरिका के विकल्प के रूप में खड़ा किया'

वोल्फ ने आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन के कदमों और फैसलों ने BRICS को खड़ा कर दिया है और अमेरिका के साथ-साथ G7 विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जिस प्रकार ट्रंप ने भार पर टैरिफ लगाए हैं उससे एक बात तो साफ है कि ये आत्मघाती है और ये एक-दूसरे के विरोधी, प्रतिद्वंदी देशों को भी आपके खिलाफ एक कर सकते हैं, करीब ला सकते हैं. 

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और ये किसी भी लिहाज से अमेरिका के लिए एक आइडियल स्थिति नहीं है. उन्होंने भारत की चिंताओं की बात करते हुए कहा कि अगर आप टैरिफ लगाकर अपने बाजार, देश का रास्ता भारत के लिए बंद कर देंगे तो दूसरे रास्ते तलाशने पर मजबूर होंगे और उन्हें अपने निर्यात बेचने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने होंगे. उन्होंने तो यहां तक कहा कि आप (अमेरिका) ब्रिक्स को पश्चिम के मुकाबले में एक नया विकल्प बनने के लिए ताकत दे रहे हैं."

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