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घुसपैठियों और बाहरी ताकतों से भी ज्यादा खतरनाक है ये समस्या, PM मोदी ने देश को कर दिया सावधान, VIDEO

RSS के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने देश को एक बड़ी चुनौती से आगाह किया है. उन्होंने दशहरा और दीपावली से पहले देश को सावधान किया कि राष्ट्र के समक्ष घुसपैठ और बाहरी ताकतों से भी बड़ी चुनौती है डेमोग्रॉफी चेंज. उन्होंने इसे उदाहरण देकर भी समझाया.

Image: Narendra modi / X
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में SIR, घुसपैठ, जनसंख्या नियंत्रण, CAA-NRC पर हो हल्ले के बीच देशवासियों को एक और बड़ी चुनौती से आगाह किया है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि बाहरी ताकतों और घुसपैठ से भी बड़ी समस्या है साजिश के तहत आबादी में बदलाव यानी कि डेमोग्राफी में परिवर्तन. उन्होंने आगे कहा कि वैसे तो देश के लिए अवैध घुसपैठिए मसलन बांग्लादेशी-रोहिंग्या समस्या और बाहरी खतरे जिसमें दूसरी ताकतें देश की एकता और अखंडता भंग करने की कोशिश करते हैं लेकिन, इससे भी बड़ी चुनौती है आबादी में बदलाव से आ रही समस्याएं. ये ज्यादा खतरनाक हैं क्योंकि ये सामाजिक बराबरी को कमजोर कर रहे हैं. 

राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देश की विविधता की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि 'विविधता में एकता' भारत की आत्मा है. हालांकि उन्होंने अगले ही पल खबरदार किया कि अगर जाति, भाषा, क्षेत्रवाद और अतिवादी सोच से प्रेरित विभाजन का अगर सामना नहीं किया गया तो यह देश या राष्ट्र को कमजोर कर सकता है. 

क्या है सामाजिक बराबरी?

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प्रधानमंत्री मोदी ने सामाजिक बराबरी के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ है वंचितों को प्राथमिकता देकर सामाजिक न्याय की स्थापना करना और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना. उन्होंने आगे कहा कि आज, ऐसे संकट उभर रहे हैं जो हमारी एकता, संस्कृति और सुरक्षा पर सीधा प्रहार करते हैं. अतिवादी सोच, क्षेत्रवाद, जाति-भाषा पर विवाद और बाहरी ताकतों द्वारा भड़काए गए विभाजन. ये सभी अनगिनत चुनौतियाँ हमारे सामने खड़ी हैं." उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा सदैव विविधता में एकता रही है. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सिद्धांत टूट गया तो राष्ट्र की ताकत भी कमजोर हो जाएगी.

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संघ के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी की शिरकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया. उन्होंने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को त्याग, निस्वार्थ सेवा, राष्ट्र निर्माण और अनुशासन की अद्भुत मिसाल बताया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आरएसएस के शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं. 

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'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण संघ की सोच'

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चल रहा है. संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुना. इस रास्ते पर सतत चलने के लिए नित्य और नियमित चलने वाली शाखा के रूप में कार्य पद्धति को चुना.

पीएम मोदी ने किया डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद

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उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जानते थे कि हमारा राष्ट्र तभी सशक्त होगा, जब हर व्यक्ति के भीतर राष्ट्र के प्रति दायित्व का बोध जागृत होगा. हमारा राष्ट्र तभी ऊंचा उठेगा, जब भारत का हर नागरिक राष्ट्र के लिए जीना सीखेगा. इसलिए वे व्यक्ति निर्माण में निरंतर जुड़े रहे. उनका तरीका अलग था. हमने बार-बार सुना है कि डॉ. हेडगेवार जी कहते थे कि जैसा है, वैसा लेना है. जैसा चाहिए, वैसा बनाना है.

उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा, "लोग संग्रह का उनका यह तरीका अगर समझना है तो हम कुम्हार को याद करते हैं. जैसे कुम्हार ईंट पकाता है तो जमीन की सामान्य-सी मिट्टी से शुरू करता है. वह मिट्टी लाता है और उस पर मेहनत करता है. उसे आकार देकर तपाता है. खुद भी तपता है और मिट्टी को भी तपाता है. फिर उन ईंटों को इकट्ठा करके भव्य इमारत बनाता है. ऐसे ही डॉ. हेडगेवार बहुत ही सामान्य लोगों को चुनते थे. फिर उन्हें सिखाते थे, विजन देते थे और उन्हें गढ़ते थे. इस तरह वे देश को समर्पित स्वयंसेवक तैयार करते थे." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य अभूतपूर्व कार्य करते हैं. व्यक्ति निर्माण की यह सुंदर प्रक्रिया आज भी हम संघ की शाखाओं में देखते हैं.

'संघ की शाखा प्रेरणा भूमि'

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पीएम मोदी ने कहा, "संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की 'अहम् और वहम' की यात्रा शुरू होती है. संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी हैं. उन शाखाओं में व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है. स्वयंसेवकों के मन में राष्ट्र सेवा का भाव और साहस दिन प्रतिदिन पनपता रहता है."

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वयंसेवकों के लिए त्याग और समर्पण सहज हो जाता है. श्रेय के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त हो जाती है. उन्हें सामूहिक निर्णय और सामूहिक कार्य का संस्कार मिलता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल व जीवंत कार्य पद्धति यही संघ की 100 वर्ष की यात्रा का आधार बनी हैं.

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