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‘मुसलमान के बच्चे हैं, खून-खराबे से नहीं डरते हैं...’, 7 भैंसा काटकर आए 22 साल के आदिल ने रिपोर्टर से कहा-तुम्हारे जैसे तो 35...VIDEO

अल्लाह का नाम लेकर 22 साल के आदिल ने पत्रकार जैसे 7 भैंसे काटने का दावा कर दिया जिसके बाद हर कोई दंग रह गया, हाल ही में ऐसे ही एक शख़्स ने लाखों गाय काटने का दावा कर दिया था लेकिन आदिल का ये दावा और उसके साथ मौजूद भीड़ में एक युवक कहता है कि 'वो मुसलमान का बच्चा है, खून खराबे से नहीं डरता है.'

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मुसलमानों के पवित्र त्योहारों में से एक बकरीद बीत गया है लेकिन इसके चर्चे अब भी हो रहे हैं. ऐसे समय में जब पर्यावरण, Vegan Culture, Humanity और Animal Cruelty की पूरी दुनिया में बहस चल रही है, वहीं इसी बीच NMF News का एक वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है, जिसे पाकिस्तानी VPN लगाकर खूब देख रहे हैं.

इसे वीडियो को देखने के बाद साफ-साफ समझ आ जाएगा कि दुनिया लाख बकरीद पर होने वाली कुर्बानी की चर्चा करे, मुसलानों को आगे आकर क्यों न ग्रीन बकरीद, प्रतीकात्मक कुर्बानी करने की नसीहतें दे, वो करेंगे तो वही जो उन्हें बताया और पढ़ाया गया है. ये भी सवाल उठ रहे हैं कि दीपावली, होली पर अभियान छेड़ने वाले PETA और NGOs बकरीद पर कहां गायब हो जाते हैं.

बकरीद की कुर्बानी के नाम पर गाय, भैंस, बकरी, ऊंट सहित अन्य जानवरों की बलि देने की जो प्रथा चल रही है उसी को लेकर NMF News की टीम जब दिल्ली के मुस्लिम बाहुल्य वाले इलाके में पहुंची तो रोंगटे खड़े हो गए. जिस गली में घुसते ही रिपोर्टर का मन विचलित हो गया वहां 22 साल का आदिल 'खून से लथपथ' कह रहा है कि मैं तो तुम्हारे जैसे 35 भैंसे काट चुका हूं. रिपोर्टर के तो होश ही उड़ गए, फिर संभलते हुए पूछा कि मेरे बराबर का क्या मतलब? आदिल ठिठका, समझा कि मामला गड़बड़ हो गया तो खुद को संभालते हुए कहता है कि तुम्हारे जैसे का मतलब कि तुम्हारे वजन के बराबर करीब 35 भैंसे काट चुका हूं यानी कि एक भैंसा 5 रिपोर्टर्स के वजन के बराबार होगा.

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शक्ल से मासूम दिखने वाले 22 साल के ‘कसाई’ आदिल को देखकर शायद ही कोई कह सकता है कि इसके जेहन में ये सब भरा होगा.

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‘मुसलमान के बच्चे हैं…खून-खराबे से नहीं डरते हैं’
पत्रकार ने बड़े जानवरों-मसलन ऊंट को काटने के सवाल पर पूछा कि डर नहीं लगता है? संवाददाता सुमित तीवारी ने कहा कि उनका तो मन इस इलाके में आते ही विचलित हो गया. तो पीछे से एक मुसलमान युवक ने कहा कि विचलित क्यों होगा? उसने पास ही खड़े एक बच्चे, जिसकी उम्र महज 7 से 9 साल होगी, की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि ये छोटा बच्चा भी वहां भैंसा गिराते वक्त खड़ा रहेगा. मुसलमान के बच्चे कहते हैं? ‘मुसलमान के बच्चे हैं, इन सब चीजों से नहीं डरते हैं, खून खराबे से नहीं डरते हैं, दिल है दिल, पत्थर थोड़ी है.’ हद तो तब हो गई कि जब उस छोटे से बच्चे ने गर्व से कहा कि ‘मैं भी तो बकरा गिरा कर आया हूं….’, जब बच्चे की सोच और तालीम ये होगी तो बड़ों से क्या उम्मीद की जाए. जब सब गर्व से कुर्बानी पर सीना ठोक रहे हैं तब इनके सामने जानवरों के प्रति दया की बात करनी बेमानी हो जाती है. सवाल ये उठता है कि क्या ये इस जेहन से बाहर निकलेंगे? और हां कब PETA वाले इस पर भी अभियान चलाएंगें? नहीं चलाएंगे..क्योंकि वहां इनकी चलेगी नहीं, अगर धार्मिक मामलों में टांग अड़ाएंगे तो उनकी भी ‘कुर्बानी’ हो जाएगी…! 

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खून से लथपथ…कपड़े पर खून के छींटे—‘खून नहीं बैज ऑफ ऑनर कहिए’

सात भैंस काटकर…नहीं, सात भैंसा गिराकर आया हूं. अल्ला की रजा के लिए काटकर आया हूं. जब पत्रकार ने पूछा कि डर नहीं लगता है तो आदिल कहता है कि डर कैसा, सब अल्ला के लिए करते हैं, त्योहार है अपना बकरीद तो मुकम्मल करना तो पड़ेगा ही.

बड़े जानवरों को कैसे काटता है आदिल?

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उसूलों का दंभ भरने वाला आदिल कहता है कि वो ये सब काम उसूलों के तहत करता है. पत्रकार ने सोचा कि हो सकता है ये उसूल और कायदे कुछ और होंगे. तो आदिल ने बिना किसी लाग लपेट के कहा कि वो पहले गर्दन हलाल करता है फिर अल्ला हूं अकबर कहकर काम कर देता है. सब इज्जत और शिद्दत से काटते हैं. जब तक नस अलग नहीं हो जाता है छोड़ते नहीं है. सब कायदे से करते हैं. सोचिए ये काम करते-करते वो कितना पत्थर हो चुका है कि कहता है मैं एक बच्चे का बाप हूं, सब सुन्नत है.

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क्या आदिल गाय भी काटता है? 
गाय की संजीदगी का ऐहसास भांपते हुए पत्रकार ने पूछा कि क्या गाय भी काटते हो…? ना! हमारे यहां ये नहीं होता है. आदिल के साथ-साथ सबने ये मना कर दिया कि वो गाय नहीं काटते. फिर सवाल ये उठता है कि बकरीद पर होने वाली गायों की तस्करी क्यों होती है? गाय कौन काटता है? 

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