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किसी डिजाइनर ने नहीं, सेना के इन दो जवानों ने बनाया था Operation Sindoor का लोगो

‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की सैन्य कार्रवाई का वह नाम है, जो केवल एक जवाबी हमला नहीं बल्कि शहीदों की विधवाओं के दर्द और देश के आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति बन गया. इस ऑपरेशन का लोगो दो भारतीय सेना के अधिकारियों लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता और हवलदार सुरिंदर सिंह द्वारा डिज़ाइन किया गया, जिसमें सिंदूर की कटोरी को प्रतीक रूप में दिखाया गया है.

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भारत की सेना सिर्फ रणभूमि में नहीं, बल्कि प्रतीकों और भावनाओं में भी अपना संदेश गहराई से उकेरती है. इसका जीता-जागता उदाहरण हाल ही में तब सामने आया जब 'ऑपरेशन सिंदूर' के लोगो ने देश की चेतना में एक अमिट छाप छोड़ी. यह सिर्फ एक लोगो नहीं, बल्कि उन महिलाओं की पीड़ा और राष्ट्र के प्रतिशोध का प्रतीक बन गया जिन्होंने अपने जीवनसाथी को पहलगाम आतंकी हमले में खोया. यह लोगो भारतीय सेना के दो वीर अधिकारियों लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता और हवलदार सुरिंदर सिंह की रचनात्मक सोच और देशभक्ति का परिणाम है, जिसे सेना की मासिक पत्रिका ‘बातचीत’ में आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किया गया.

लोगो में सिंदूर का प्रतीक और महिलाओं की वेदना

इस लोगो की संरचना में सिंदूर से भरे एक छोटे कटोरे को पहला 'O' बनाया गया है, जबकि दूसरा 'O' सिंदूर की हल्की बौछार के रूप में दिखाया गया है. सिंदूर भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के सुहाग का प्रतीक होता है, और इस लोगो के माध्यम से यह दर्शाया गया कि कैसे उन महिलाओं का सुहाग इस हमले में उजड़ गया. लोगो एक तरफ सेना की आक्रामक कार्रवाई को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर इसमें उन मासूमों की याद भी समाहित है जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की सुंदर वादियों में आतंकी हिंसा का शिकार हुए.

कैसे बना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम राष्ट्रीय पहचान

जब भारतीय वायुसेना ने सात मई 2025 को रात 01:05 बजे पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, तो यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक साफ संदेश था कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम देने का सुझाव स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था. यह नाम केवल एक सैन्य कोड नहीं था, बल्कि भारत की अस्मिता और आंतरिक वेदना की पुकार बन गया. राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने सिर्फ 23 मिनट में पाकिस्तान में छिपे आतंक के अड्डों को नष्ट कर दिया. यह कार्रवाई इतनी तीव्र थी कि जितने समय में कोई व्यक्ति अपना नाश्ता करता है, उतने समय में भारत ने दुश्मनों को खत्म कर दिया.

‘बातचीत’ पत्रिका में दर्ज हुई सेना की गौरवगाथा

भारतीय सेना की पत्रिका ‘बातचीत’ के नवीनतम संस्करण की पहली ही पंक्ति में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का लोगो पूरे पृष्ठ पर उकेरा गया है. साथ ही सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की एक तस्वीर भी शामिल की गई है. पत्रिका में आतंकी हमले के बाद के दृश्य, ताबूतों की कतारें और एक शहीद के अंतिम संस्कार का भावनात्मक चित्रण भी किया गया है, जो इस घटना की भयावहता को शब्दों से अधिक प्रभावी तरीके से दर्शाता है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, यह उन भावनाओं की गूंज थी जो पूरे देश ने एक साथ महसूस की. यह लोगो अब सिर्फ एक डिज़ाइन नहीं, बल्कि शौर्य, बलिदान और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प का प्रतीक बन चुका है. लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता और हवलदार सुरिंदर सिंह ने इसे बनाकर यह सिद्ध किया कि भारत के सैनिक केवल हथियार ही नहीं, बल्कि भावनाओं की भाषा भी बखूबी समझते हैं.
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