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देवभूमि में मतगणना के बीच हुआ हंगामा, रात के अंधेरे में हार के बाद पत्थरबाज़ी

ऋषिकेश सीट उत्तराखंड की सबसे हॉट सीट बनी हुई थी. इस सीट पर पूरे राज्य की नजर रही..यहां बीजेपी प्रत्याशी शंभू पासवान, कांग्रेस प्रत्याशी दीपक प्रताप जाटव, निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था…लेकिन यहां शाम होते होते जब प्रशासन की तरफ से नतीजे घोषित नहीं किए गए..तो पत्थर बाज़ी हुई…हंगामा किया जाने लगा…चुनावी प्रकिया को बदनाम करने की कोशिश की गई और धमकियां दी जाने लगी

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हमेशा आपने सुना होगा जो समाज के लिए अच्छा काम करना चाहता है। उसके सामने कई रुकावटें आती हैं।उसे रोकने के लिए।उसे बदनाम करने के लिए कई कोशिशें की जाती हैं।लेकिन अगर उस इंसान का मन पक्का है।और समाज के लिए कुछ कर गुजरने के लिए वो अङिग है।तो उसे कोई नहीं हिला सकता। यही सब देवभूमि में आज कल हो रहा है। देवभूमि में आने वाले सनातन प्रेमियों की सेवा करने से लेकर लैंड जिहादियों, थूक जिहादियों और माफियाओं की कमर तोड़ने वाले पीएम मोदी के सबसे ख़ास शख़्सों में से एक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार को बदनाम करने की भरपूर कोशिशें की जा रही हैं।लेकिन ये सभी कोशिशें नाकाम हैं। इन सबकी पोल भी खुल चुकी है।देवभूमि उत्तराखंड जहां की धामी सरकार की प्राथमिकता में पहाड़ के लोगों को सशक्त करना। आगे बढ़ाना है।वहां उन्हें रोकने के लिए तमाम कोशिश की जा रही हैं।


इस वक़्त प्रदेश में निकाय चुनाव का शोर है। नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव लड़ रहे सभी प्रतियाशियों की किस्मत मतपटियों में 23 जनवरी को कैद हो गईं थी। इंतज़ार 25 तारीफ़ का किया जा रहा था। लेकिन अपनी हार को देख कुछ लोगों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। इस बीच ऋषिकेश सीट उत्तराखंड की सबसे हॉट सीट बनी हुई थी। इस सीट पर पूरे राज्य की नजर रही। यहां बीजेपी प्रत्याशी शंभू पासवान, कांग्रेस प्रत्याशी दीपक प्रताप जाटव, निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था। लेकिन यहां शाम होते होते जब प्रशासन की तरफ से नतीजे घोषित नहीं किए गए। तो पत्थर बाज़ी हुई। हंगामा किया जाने लगा।चुनावी प्रकिया को बदनाम करने की कोशिश की गई और धमकियां दी जाने लगी। निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर के समर्थकों में जमकर हंगामा किया आरोप लगा कि उनके ही समर्थकों ने हार को देखकर पत्थरबाज़ी भी की जिसके बाद पुलिस को क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज तक करना पड़ा।हंगामा करते हुए स्थानीय विधायक और सरकार में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर ही आरोप लगाने लगे की वो अंदर स्ट्रौंग रूम में मौजूद है। अब ये आरोप बेबुनियादी लगे क्योंकि रिपोर्टस के मुताबिक़ मंत्री वहां नहीं थे। क्योंकि किसी को भी वहां रहने की इजाज़त नहीं होती।

इससे ये साफ़ था कि ये सिर्फ़ हार की बौखलाहट थी। क्योंकि जैसे जैसे नतीजा सामने आ रहे थे। वैसे वैसे बौखलाहट बढ़ रही थी।जैसे कि आपको बताया कि यहां भाजपा प्रत्याशी शंभू पासवान, कांग्रेस प्रत्याशी दीपक प्रताप जाटव, निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था।लेकिन मतगणना के एक दो राउंड बाद मुकाबला भाजपा व निर्दलीय प्रत्याशी शंभू पासवान के बीच सिमट गया। कड़े मुकाबले में भाजपा के शंभू पासवान मतो से विजयी रहे। जिसके बाद धांधली का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। अब सरकार और चुनाव प्रणाली को बदनाम करने के लिए ऐसी भरपूर कोशिशें होती रहती हैं लेकिन अब इनकी पोल खुल चुकी है।और वैसे भी ज़्यादा दिन तक झूठ टिक नहीं सकता। इससे पहले भी चुनाव से पहले सरकार को बदनाम करने के लिए एक सर्कुलर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया जिससे बवाल मचा हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे "फर्जी" सर्कुलर में दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने राजस्व के हित में एक वितरक को पान मसाला और सिगरेट खरीदने और बेचने के लिए अधिकृत किया। जबकि ऐसा नहीं था। और ये सर्कुलक बिलकुल फ़र्ज़ी था इस बात का खुलासा ख़ुद सरकार की तरफ़ से किया गया था।

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