Advertisement

Loading Ad...

'संविधान में धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद शब्द की जरूरत नहीं...', वाराणसी में बोले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कहा - यह हमारी संस्कृति का मूल नहीं

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अब उस बहस में शामिल हो चुके हैं, जहां संविधान से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द को हटाए जाने की मांग तूल पकड़ता जा रहा है. वाराणसी में संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 'धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द हमारी संस्कृति का मूल नहीं है. ऐसे में इस पर विचार करना चाहिए.'

Loading Ad...

वाराणसी में पार्टी संगठन द्वारा आयोजित आपातकालीन कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत के संविधान को धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द की जरूरत नहीं है. यह दोनों ही शब्द हटाए जानें चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने यह बात आपातकाल विषय को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है. बता दें कि इन दोनों शब्दों को संविधान से हटाने को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. हालांकि, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था. 

धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद हमारी संस्कृति का मूल नहीं - शिवराज सिंह चौहान 

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अब धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द को संविधान से हटाने वाले बहस में शामिल हो चुके हैं. वाराणसी में एक कार्यक्रम में पहुंचे शिवराज सिंह ने कहा कि 'भारत का मूल भाव सर्वधर्म समभाव है. धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद हमारी संस्कृति का मूल नहीं है. ऐसे में इस पर विचार करना चाहिए कि क्या आपातकाल में धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़ा गया है? ऐसे में इसे हटाया जाना चाहिए. यह भारत है जिसने हजारों साल पहले कहा था कि सत्य एक है, लेकिन विद्वान इसे अलग-अलग तरीके से कहते हैं. यह भारत है, जो कहता है कि अलग-अलग भाव करने वाला उपासना पद्धति कोई भी हो.'

Loading Ad...

कहां से शुरू हुई इन दोनों शब्दों पर बहस?

Loading Ad...

बता दें कि यह बहस तब शुरू हुई, जब भाजपा आपातकाल के 50 साल पूरे होने को लेकर देशभर में संविधान हत्या दिवस मना रही है. इस दौरान राष्ट्रीय स्व्यंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने संविधान की प्रस्तावना में किए गए बदलावों को निरस्त करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी से माफी मांगने की मांग भी की है. उनका कहना है कि 'संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द आपातकाल के दौरान ही जोड़े गए थे. यह मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे, जो भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया हो. दत्तात्रेय का कहना है कि दोनों शब्द रखना है या नहीं इस पर विचार होना चाहिए.'

कोर्ट तक पहुंच चुका है मामला

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

जानकारी के लिए बता दें कि धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द को हटाने का मामला पहले भी उठाया जा चुका है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं, लेकिन कोर्ट की तरफ से इसे खारिज कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और संजय कुमार की बेंच ने कहा था कि 'इन दोनों ही शब्दों को साल 1976 में 42वें संशोधन के जरिए जोड़ा गया था. यह संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा बन चुका है. इसलिए इसे हटाया नहीं जा सकता है.'

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...