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'देश में घुसपैठ का चल रहा बड़ा नेटवर्क... इसे रोकना सरकार का कर्त्तव्य', सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि घुसपैठ का एक पूरा नेटवर्क चल रहा है. देश को सुरक्षित बनाना और नागरिकों का अधिकार घुसपैठियों तक जाने से रोकना सरकार का कर्तव्य है.

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देशभर में बांग्ला भाषा बोलने वालों की धरपकड़ और उन्हें बांग्लादेश भेजने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की सुनवाई 11 सितंबर को होगी. यह याचिका वेस्ट बंगाल माइग्रेंट वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड नाम की संस्था और उसके अध्यक्ष समीरुल इस्लाम ने दाखिल की है. समीरुल इस्लाम तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद भी हैं.

घुसपैठ का एक पूरा नेटवर्क चल रहा है

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए भाषा के आधार पर मुस्लिम लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है और देश से बाहर किया जा रहा है. केंद्र सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील का विरोध किया. उन्होंने कहा कि कुछ एनजीओ और राज्य सरकारें अवैध घुसपैठियों का समर्थन करती हैं. उन्हें नहीं सुना जाना चाहिए.

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मेहता ने दलील दी कि अगर कोई व्यक्ति सरकार की कार्रवाई से प्रभावित है तो वह सुप्रीम कोर्ट आ सकता है. याचिका दाखिल करने वाली संस्था ऐसे लोगों की कोर्ट आने में सहायता करे. वह खुद याचिका दाखिल नहीं कर सकती. मेहता ने कहा कि घुसपैठ का एक पूरा नेटवर्क चल रहा है. देश को सुरक्षित बनाना और नागरिकों का अधिकार घुसपैठियों तक जाने से रोकना सरकार का कर्तव्य है. इसके जवाब में भूषण ने कहा कि सरकार बंगाली मुसलमानों को डराने का काम कर रही है.

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ओवैसी भी लगा चुके हैं बड़ा आरोप 

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन औवैसी ने पुलिस पर देश भर में बंगाली बोलने वाले मुस्लिम नागरिकों को गैरकानूनी तरीके से पकड़ने और उन्हें बांग्लादेशी बताकर देश के बाहर निकालने का आरोप लगाया है. ओवैसी ने कहा कि सरकार देश के सबसे गरीब समुदायों पर निशाना साधकर उनके साथ मजूबती से खड़े होने की एक्टिंग कर रही है. 

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आगे ओवैसी कहते हैं, भारत के कई हिस्सों में पुलिस बंगाली भाषी मुस्लिम नागरिकों को अवैध अप्रवासी होने का आरोप लगाकर हिरासत में ले रही है. जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं उनमें ज्यादातर गरीब लोग हैं. वह झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले, सफाईकर्मी, कूड़ा बीनने वाले लोग हैं. पुलिस इन लोगों को टारगेट कर रही है क्योंकि वे गरीब हैं और पुलिस की ज्यादतियों का विरोध नहीं कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ऐसी खबरें हैं कि भारतीय नागरिकों को बंदूक की नोक पर बांग्लादेश धकेला जा रहा है.

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