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'...तो संसद को बंद कर देना चाहिए', न्यायपालिका और कार्यपालिका की शक्तियों को लेकर BJP सांसद निशिकांत दुबे का बयान
गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दूबे का सुप्रीम कोर्ट को लेकर विवादास्पद बयान सामने आया है. बीजेपी सांसद का ये बयान वक्फ संशोधन कानून और पॉकेट वीटो के मामले को लेकर माना जा रहा है.
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वक्फ संशोधन कानून को लेकर पूरे देश में राजनीति गरम है. देश के कई हिस्सों में इस कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन की खबरें भी निकलकर सामने आ रही है. इस कानून के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में 72 याचिकाएं डाली गई है. इस पर कोर्ट ने कुछ बिंदुओं पर केंद्र सरकार से सात के अंदर जवाब देने को कहा है. इस बीच गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का बयान सामने आया है, जिसे विपक्ष मुद्दा बना सकता है.
दरअसल, बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने शनिवार कोआपने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा "क़ानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिये". निशिकांत दूबे के इस बयान को वक्फ संशोधन कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के संदर्भ में माना जा रहा है. इससे पहलेदेश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों बंटवारे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी .
इसके पहले देश के अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी वक्फ संशोधन कानून के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई से पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को विधायी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए. ऐसे मामलों में विधायिका और न्यायपालिका को एक-दूसरे के फैसले का सम्मान करना चाहिए. ऐसे में निशिकांत दूबे का ताज़ा बयान ने यह सवाल उठाया ही कि क्या देश की सर्वोच्च न्यायालय अपने फैसलों के माध्यम से विधायिका के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार रखता है.
उपराष्ट्रपति ने क्या कहा था ?
देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बीते गुरुवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायपालिका के ख़िलाफ टिप्पणी करते हुए कहा था कि "हम ऐसी परिस्थिति नहीं बना सकते कि देश के राष्ट्रपति को निर्देश दें," उन्होंने आगे कहा "अगर बात संविधान की बात की जाए तो उसेक मुताबिक आपके पास एकमात्र अधिकार है जो अनुच्छेद 145 (3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है. आज अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताक़तों के ख़िलाफ परमाणु मिसाइल बन गया है. उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा दस विधायकों को मंज़ूरी देने में देरी के मामले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते उन्होंने कहा "राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीकके से फ़ैसला लेने के लिए बाध्य किया जाता है, अगर ऐसा नहीं हो तो कानून बन जाता है."
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