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योगी सरकार ने बदला हेल्थ सिस्टम, मिनटों में पहुँच रही है GPS से लैस एम्बुलेंस सेवा, आपातकालीन सेवाओं में यूपी की बड़ी छलाँग

UP Ambulance Facility: उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे उन राज्यों में शामिल हो रहा है जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत एम्बुलेंस नेटवर्क ने न केवल मृत्यु दर कम की है बल्कि पूरे स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती दी है.

Image Source: Social Media
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UP Ambulance GPS Facility: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रही है. इसी दिशा में सरकार ने 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा और 102 मातृ–शिशु एम्बुलेंस सेवा का दायरा काफी बढ़ा दिया है. पहले ये सेवाएँ ज़्यादातर शहरों तक सीमित थीं, लेकिन अब इनकी पहुँच गाँवों, दूर-दराज़ के इलाकों, बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे पिछड़े क्षेत्रों तक भी हो चुकी है. सरकार का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को इलाज से सिर्फ इसलिए वंचित नहीं रहना चाहिए क्योंकि वह दूर के क्षेत्र में रहता है या उसके पास तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं है. नई एम्बुलेंसों में आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण लगाए गए हैं और GPS ट्रैकिंग सिस्टम से इन्हें तेज़ और भरोसेमंद बनाया गया है. सरकार के अनुसार, अब तक 13 करोड़ से भी ज्यादा मरीज इन सेवाओं का फायदा उठा चुके हैं, जिसे विश्व बैंक ने भी अपनी रिपोर्ट में सराहा है.

सीएम योगी का स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने पर खास ध्यान


योगी सरकार के आने के बाद से ही लक्ष्य स्पष्ट था राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर, आधुनिक और आम जनता तक आसानी से पहुँचा हुआ बनाना. इसी वजह से 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं का बड़ा विस्तार किया गया. पहले जिन दूरस्थ जगहों में अस्पताल या एम्बुलेंस की सुविधा बहुत कम थी, खासकर बुंदेलखंड और पूर्वांचल, वहाँ पर विशेष ध्यान देकर बड़ी संख्या में नई एम्बुलेंसें भेजी गईं.
अब तक लगभग 2249 नई एम्बुलेंसें शुरू की जा चुकी हैं. इसके साथ ही 250 से अधिक ALS (एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट) एम्बुलेंस भी चल रही हैं, जिनमें वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर और कई आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण मौजूद हैं. इन एम्बुलेंसों की खासियत यह है कि गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुँचने से पहले ही जरूरी उपचार मिल जाता है.

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‘टाइम इज़ लाइफ़’ - मिनटों में मिलती है मदद


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आपात स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है. इसी सोच को ध्यान में रखते हुए सभी एम्बुलेंसों में GPS और आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम जोड़े गए हैं। इससे कॉल मिलने के तुरंत बाद नजदीकी एम्बुलेंस को मौके पर भेजना बहुत आसान हो गया है. कॉल सेंटर अब GIS मैपिंग का इस्तेमाल करते हैं जिससे रास्ते, ट्रैफिक और दूरी देखकर सबसे उचित एम्बुलेंस भेजी जाती है. इन तकनीकों के चलते प्रतिक्रिया समय में बड़ा सुधार आया है. पहले 108 सेवा का रिस्पांस टाइम 28 मिनट के आसपास था,
अब यह घटकर सिर्फ 7.25 मिनट रह गया है. इसी तरह 102 सेवा का रिस्पांस टाइम 19 मिनट से घटकर 6.58 मिनट पर आ गया है. तेज़ प्रतिक्रिया समय की वजह से माँ और बच्चे की जान बचाने में काफी मदद मिली है और मातृ तथा शिशु मृत्यु दर में कमी भी दर्ज की गई है.

एम्बुलेंस नेटवर्क से लाखों लोगों को मिली समय पर सहायता

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साल 2017 से अब तक 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं ने मिलकर लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जान बचाई है.
108 एम्बुलेंस ने अब तक 3.57 करोड़ से अधिक आपातकालीन मरीजों को इलाज पहुँचाया. 102 एम्बुलेंस ने 9.62 करोड़ गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सुविधा दी.
ALS एम्बुलेंसों ने लगभग 7.14 लाख गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्नत उपचार दिया.
कई मामलों में जहां कुछ मिनटों की देरी भी जान के लिए खतरा बन सकती थी, वहां इन एम्बुलेंसों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

भविष्य की योजना - ड्रोन एम्बुलेंस और AI तकनीक का इस्तेमाल


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सरकार अब इन सेवाओं को और आधुनिक बनाने पर काम कर रही है. भविष्य में ड्रोन एम्बुलेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक और तेज संचार प्रणाली से इन सेवाओं को और बेहतर बनाने की तैयारी चल रही है. इन सभी प्रयासों के कारण उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे उन राज्यों में शामिल हो रहा है जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत एम्बुलेंस नेटवर्क ने न केवल मृत्यु दर कम की है बल्कि पूरे स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती दी है.

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