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बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए चेहरे का इंतजार फिर से बढ़ा! पार्टी सूत्रों ने बताया अभी नहीं होगा चुनाव, देरी की वजह सामने आई

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर चल रहा सस्पेंस अभी आगे भी जारी रह सकता है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन से पहले देश के इन 5 बड़े राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के चयन पर विचार किया जा रहा है. इन पांचों राज्यों के चयन के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चेहरे पर मुहर लग सकती है.

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पिछले कई महीनों से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है. कहीं खबर चल रही है कि चेहरे का चयन हो गया है, लेकिन घोषणा करना बाकी है, तो कहीं महिला चेहरे के चयन को लेकर लगातार खबरें उठ रही हैं. इस बीच बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर अभी और विलंब होने की पूरी संभावना है. इसके पीछे की वजह अगले 2 साल के अंदर देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बताया जा रहा है. हालांकि, ऑफिशियल तौर पर यह खबर सामने नहीं आई है, दूसरी तरफ राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन से पहले बीजेपी 5 बड़े राज्यों के अध्यक्ष के चयन को लेकर चेहरे तय करना चाह रही है. 

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन का समय और बढ़ा

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में इस बात की चर्चा सबसे ज्यादा तेज है कि पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और हरियाणा जैसे करीब 5 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चयन कर लिया जाए. बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष से पहले इन राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चयन पर ज्यादा फोकस कर रही है. इन राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के नाम तय होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान होगा.

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अब तक 27 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का ऐलान हुआ

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बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले करीब 50 फीसदी यानी 37 सांगठनिक प्रदेशों में से 27 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों और संगठन के चुनाव का काम पूरा कर लिया है. बाकी दिल्ली, यूपी, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा में अध्यक्षों का चयन होना बाकी है. अगर 27 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों के चयन पर नजर डाली जाए, तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में संगठन की कमान नए चेहरों को सौंप दी गई है, वहीं 9 दिन बाद संसद के मानसून सत्र की भी शुरुआत हो रही है और देखने वाली बात है कि क्या इस सत्र से पहले बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलेगा या नहीं? 

राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन में बीजेपी और आरएसएस की बराबर भूमिका

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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव में जितना योगदान पार्टी का है उतना ही योगदान आरएसएस का रहेगा. पार्टी के अध्यक्ष के लिए कोई भी चेहरा चुना जाए, लेकिन दोनों ही पार्टियों को वह पसंद आना चाहिए. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अध्यक्ष का चुनाव महज बीजेपी का अंदरूनी मामला भर नहीं है, बल्कि इस फैसले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति भी उतनी ही जरूरी होती है. जब तक संघ के साथ किसी नाम पर पूरी तरह सहमति नहीं बन जाती, तब तक चुनाव संभव नहीं है. फिलहाल दोनों की तरफ से इसकी तैयारी काफी तेज चल रही है. 

आखिर कहां फंस रही बात? 

खबरों के मुताबिक, बीजेपी अध्यक्ष की चयन की प्रक्रिया में हमेशा से संघ बड़ी भूमिका निभाता है. वह ऐसे चेहरे को चुनना चाहता है, जो पार्टी और संघ के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हो. प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को अपने एक हफ्ते के कार्यक्रम में 5 देशों के दौरे पर गए थे, ऐसे में अब उनकी वापसी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर हलचल बढ़ा दी है. 

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अगले एक हफ्ते के अंदर तस्वीर साफ हो जाएगी? 

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बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही है कि अगले हफ्ते भर के अंदर संगठन की चुनावी प्रक्रिया की तस्वीर लगभग-लगभग साफ हो जाएगी, लेकिन कुछ भी हो यह बिना संघ के सहमति के नहीं हो सकता है. हालांकि, उम्मीद है कि मानसून सत्र से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है. 

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