Advertisement
धान बेचने की टेंशन खत्म! योगी सरकार शुरू कर रही है फसल खरीद अभियान, मिलेगा बढ़ा हुआ MSP
सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलता है और उन्हें भुगतान में देरी नहीं होती. वहीं, अगर वे मंडी या आढ़तियों के पास फसल बेचते हैं, तो उन्हें अक्सर कम दाम और भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता है
Advertisement
Crop Procurement Campaign: उत्तर प्रदेश सरकार ने अब पश्चिमी यूपी के बाद पूर्वी यूपी में भी सरकारी धान खरीद केंद्र शुरू कर दिए हैं. इसका मतलब है कि अब किसानों को अपनी फसल मंडी या आढ़तियों को कम दामों में बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. किसान सीधे सरकारी केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे और उन्हें सही दाम मिलेगा. सरकार ने कहा है कि 1 नवंबर से धान खरीद शुरू होकर 28 फरवरी तक यानी पूरे चार महीने चलेगी. इस बार सरकार का दावा है कि किसानों को भुगतान भी 48 घंटे के भीतर यानी दो दिनों में ही कर दिया जाएगा.
किन जिलों में शुरू हुई खरीद
धान खरीद का यह दूसरा चरण है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंडलों में शुरू हुआ है. इसमें चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज मंडल शामिल हैं.
इसके अलावा, उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ जिलों में भी अब खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई है. वहीं, हरदोई, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जैसे जिलों में धान खरीद पहले ही 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी थी.
Advertisement
कितना मिलेगा धान का दाम
Advertisement
इस साल किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा, क्योंकि सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा दिया है,
सामान्य धान का एमएसपी - ₹2,369 प्रति क्विंटल
ग्रेड ए धान का एमएसपी - ₹2,389 प्रति क्विंटल
इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा. अब वे सरकारी दरों पर अपनी फसल बेच सकेंगे, जिससे उन्हें मंडियों के मुकाबले ज्यादा फायदा होगा.
किसानों का उत्साह, 2 लाख से ज्यादा ने कराया पंजीकरण
Advertisement
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार किसानों में काफी उत्साह है. अब तक 2.17 लाख से अधिक किसानों ने धान बेचने के लिए अपना पंजीकरण करा लिया है. 31 अक्टूबर तक 2,17,625 किसान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर चुके थे.
पश्चिमी यूपी में पहले ही बिक चुका है 1 लाख टन धान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान खरीद पहले ही शुरू हो चुकी थी. अब तक वहां 17,000 से ज्यादा किसान अपनी फसल बेच चुके हैं और 1.06 लाख टन धान की बिक्री हो चुकी है. सरकार का कहना है कि इस साल वह पिछले साल से ज्यादा मात्रा में धान खरीदने का लक्ष्य रख रही है.
Advertisement
किसानों को मिलेगा फायदा
यह भी पढ़ें
सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलता है और उन्हें भुगतान में देरी नहीं होती. वहीं, अगर वे मंडी या आढ़तियों के पास फसल बेचते हैं, तो उन्हें अक्सर कम दाम और भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता है. सरकार का कहना है कि इस पहल से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और वे अपनी उपज को लेकर निश्चिंत रह सकेंगे.