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मुस्लिम पक्ष को लगा झटका... सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
बता दें कि शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष ने एक नया दावा करते हुए हाईकोर्ट की तरफ रुख किया था। हिंदू पक्ष का कहना था कि यह विवादित ढांचा ASI के तहत एक संरक्षित स्मारक है. इस पर पूजा स्थल संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होगा.
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शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश, जिसमें हिंदू पक्ष को अपनी याचिका में संशोधन करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को मामले में बतौर पक्षकार जोड़े जाने की अनुमति दी गई थी. वह पूरी तरीके से उचित है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के CJI संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश पर मुस्लिम पक्ष के द्वारा दायर की गई अपील पर दी है. दो जजों की पीठ ने यह बात स्पष्ट रूप से कही कि हिंदू पक्षों की तरफ से मूल याचिका में संशोधन की अनुमति दी जानी चाहिए.
हिंदू पक्ष ने हाई कोर्ट का रुख किया था
बता दें कि शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष ने एक नया दावा करते हुए हाईकोर्ट की तरफ रुख किया था. हिंदू पक्ष का कहना था कि यह विवादित ढांचा ASI के तहत एक संरक्षित स्मारक है. इस पर पूजा स्थल संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होगा. जिसकी वजह से इसका उपयोग मस्जिद के रूप में नहीं किया जा सकता. इसलिए हिंदू पक्ष ने इस मामले में ASI को एक पक्ष के रूप में जोड़ने की अपील की थी. जिसको लेकर इसी साल मार्च में हाई कोर्ट ने अनुमति दे दी थी.
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी अपील
हिंदू पक्ष द्वारा हाई कोर्ट में की गई अपील पर मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इसके बाद 4 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील पर हिंदू पक्ष को नोटिस जारी किया था. लेकिन जब मामला सुनवाई तक पहुंचा. तो कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को गलत ठहराया. कोर्ट ने कहा कि आपकी दलील गलत लगती है. हाई कोर्ट के मुकदमे में पक्षकारों को जोड़ने के लिए संशोधन की अनुमति देनी चाहिए थी. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष को अपना लिखित बयान दाखिल करने के लिए समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी. दरअसल, हिंदू पक्ष ने शुरुआत से ही ASI को अपना पक्षकार बनाने के लिए आवेदन के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद को 1920 की अधिसूचना द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया जाए. बता दें कि यह अधिसूचना प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी की गई थी.
मुस्लिम पक्षियों ने क्या दावा किया था ?
वर्तमान में शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि मामले में पूजा स्थल वाली जगह में अधिनियम 1991 लागू नहीं होगा. इसके अलावा इसे मस्जिद उपयोग के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. बता दें कि पूजा स्थल सभी धार्मिक संरचनाओं की स्थिति की रक्षा करना चाहता है. लेकिन मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्षों द्वारा संशोधन याचिका का विरोध किया था. उन्होंने यह भी दावा किया था कि यह पूजा स्थल अधिनियम के आधार पर मुस्लिम पक्ष द्वारा किए गए बचाव को नकारने का एकमात्र प्रयास था.
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