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पंजाब सरकार ने बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए प्ले-वे स्कूलों का पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किया

मंत्री ने बताया कि छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए एक समान पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिसे आंगनवाड़ी केंद्रों, प्ले-वे स्कूलों और प्राथमिक स्कूलों में लागू किया जाएगा.

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पंजाब सरकार ने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और समग्र विकास की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्ले-वे स्कूलों के लिए एक पंजीकरण पोर्टल शुरू किया है. सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर ने बुधवार को यह जानकारी दी.

पंजाब सरकार ने प्ले-वे स्कूलों के लिए पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किया

उन्होंने कहा कि पंजाब भर में संचालित सभी प्ले-वे स्कूलों के साथ-साथ छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने वाले प्राइवेट स्कूलों के लिए इस पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा.

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मंत्री ने बताया कि छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए एक समान पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिसे आंगनवाड़ी केंद्रों, प्ले-वे स्कूलों और प्राथमिक स्कूलों में लागू किया जाएगा.

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उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण फरवरी के मध्य तक पूरा हो जाएगा. बच्चों पर किताबों का बोझ डालने के बजाय, उन्हें खेल-आधारित और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा दी जाएगी.

बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास शून्य से छह वर्ष की उम्र के बीच होता है.

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शिशु अवस्था की देखभाल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री कौर ने कहा कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास शून्य से छह वर्ष की उम्र के बीच होता है. इसलिए इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित पोषण प्रदान करना पंजाब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

उन्होंने आगे कहा कि मिशन आरंभ के तहत अभिभावकों को उनके बच्चों की दैनिक शिक्षण प्रक्रिया से सक्रिय रूप से जोड़ा गया है.

"अभिभावकों को उनके फोन पर दैनिक गतिविधियां भी भेजी जा रही हैं"

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उन्होंने कहा कि डिजिटल सामग्री साझा करके, बच्चों को घर पर भी अपने अभिभावकों के साथ सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. अभिभावकों को उनके फोन पर दैनिक गतिविधियां भी भेजी जा रही हैं ताकि वे घर पर अपने बच्चों की शिक्षण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सकें.

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मंत्री ने कहा कि 1,000 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण के लक्ष्य के तहत 100 करोड़ रुपए की लागत से 1,000 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक केंद्र पर लगभग 10 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं. इनमें से 700 केंद्र पहले ही हवादार कमरों, उचित रसोई और शौचालयों के साथ पूरे हो चुके हैं. शेष 300 केंद्र भी जल्द ही पूरे हो जाएंगे.

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