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खूनी पिता ने बताई टेनिस प्लेयर राधिका की हत्या करने वजह, बोला- लोग देते थे बेटी की कमाई खाने का ताना, इसलिए दिया वारदात को अंजाम

गुरुग्राम के सेक्टर-57 में राष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या ने सभी को चौंका दिया है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस सनसनीखेज वारदात को खुद उसके पिता दीपक यादव ने अंजाम दिया. बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले जमकर बहस हुई और फिर गुस्से में आकर दीपक ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से पांच फायर किए, जिनमें तीन गोलियां राधिका को लगीं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई.

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दिल्ली के गुरुग्राम के सेक्टर-57 में एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया है. राष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उनके ही पिता दीपक यादव ने कर दी. यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि उस मानसिकता की भी तस्वीर पेश करती है, जहां परिवारिक कलह और सामाजिक दबाव इंसान को अपनी ही संतान की जान लेने पर मजबूर कर देते हैं. 23 वर्षीय राधिका, जो देश की होनहार टेनिस खिलाड़ियों में शुमार थीं, अब हमारे बीच नहीं हैं.

एकेडमी खोलने से नाराज थे पिता
पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में यह सामने आया कि राधिका के पिता दीपक यादव अपनी बेटी के टेनिस एकेडमी खोलने के फैसले से खुश नहीं थे. दीपक का कहना था कि उन्होंने कई बार बेटी को समझाने की कोशिश की कि एकेडमी बंद कर दे, लेकिन वह नहीं मानी. उनके मुताबिक, पड़ोसी और जान-पहचान के लोग उन्हें ताना देते थे कि वो बेटी की कमाई खा रहे हैं. यही मानसिक दबाव इस दुखद फैसले की वजह बना.

घर में हुई कहासुनी के बाद चली पांच गोलियां
घटना की सुबह करीब 10:30 बजे राधिका अपने घर के पहले मंज़िल पर स्थित किचन में थीं, तभी उनके पिता दीपक यादव ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर निकाली और एक के बाद एक पांच फायर किए. तीन गोलियां राधिका को लगीं जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. गोली चलने की आवाज सुनकर दीपक का भाई और भतीजा ऊपर पहुंचे तो उन्होंने राधिका को खून से लथपथ पाया. रिवॉल्वर पास की मेज़ पर रखी थी, जिसमें केवल एक जिंदा कारतूस बचा था.

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मां थी कमरे में लेकिन बचा नहीं सकीं बेटी की जान
राधिका की मां मंजू यादव भी उसी वक्त घर में मौजूद थीं. उन्होंने पुलिस को बताया कि गोली चलने की आवाजें सुनकर वह बाहर निकलीं लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. उन्होंने बताया कि उन्हें बुखार था और वो आराम कर रही थीं. मां के बयान से स्पष्ट है कि यह वारदात इतनी तेजी से हुई कि कोई कुछ समझ भी नहीं पाया.

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प्रतिभाशाली टेनिस खिलाड़ी का अचानक अंत
राधिका यादव ने टेनिस में देश का नाम रोशन किया था. उनका जन्म 23 मार्च 2000 को हुआ था और उन्होंने इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) में डबल्स रैंकिंग में 113वां स्थान हासिल किया था. आईटीएफ डब्ल्स में वह टॉप 200 खिलाड़ियों में गिनी जाती थीं. चोट लगने के बाद जब वह मैदान से दूर हो गईं तो उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखने के लिए टेनिस एकेडमी शुरू की. उनके इस कदम ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना.

पिता ने स्वीकार किया अपराध कि बात 
घटना के बाद दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके खिलाफ हत्या का केस दर्ज हो चुका है. उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है. लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि एक पिता अपनी ही बेटी को किस हालात में गोली मार सकता है? क्या समाज का ताना इतना भारी हो गया कि एक बाप अपनी संतान की जिंदगी ही छीन ले? या फिर इसके पीछे कुछ और गहरी वजहें छिपी हैं?

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बताते चलें कि राधिका यादव की हत्या ने समाज, परिवार और खेल तीनों ही क्षेत्रों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. एक ओर जहां युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर जब वे अपनी मेहनत और आत्मनिर्भरता से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, तब खुद उनके अपने ही उन्हें पीछे खींच लेते हैं. यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि उस सोच का आईना है, जहां बेटियों की तरक्की भी कई बार बोझ बन जाती है.

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