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अब भारत में ही बनेगी राफेल फाइटर जेट की मेन बॉडी, टाटा और दसॉल्ट एविएशन के बीच बड़ी डील

राफेल फाइटर जेट की ‘मेन बॉडी’ यानी फ्यूजलेज का निर्माण भारत में किया जाएगा. इस संबंध में भारत की प्रमुख रक्षा कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और फ्रांस की विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है.

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर निर्णायक प्रभाव डालने वाले राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण को लेकर भारत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है. अब इन अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की ‘मेन बॉडी’ यानी फ्यूजलेज का निर्माण भारत में किया जाएगा. इस संबंध में भारत की प्रमुख रक्षा कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और फ्रांस की विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है. यह समझौता विशेष रूप से राफेल विमानों के फ्यूजलेज के निर्माण के लिए किया गया है.
 
दरअसल, यह समझौता राफेल फाइटर जेट्स के फ्यूजलेज के निर्माण को लेकर हुआ है. दसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने भारत में राफेल लड़ाकू विमान के बॉडी पार्ट के निर्माण के लिए 4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर साइन किए है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह पहली बार होगा जब राफेल का फ्यूजलेज फ्रांस से बाहर किसी देश में तैयार किया जाएगा. यानी अब भारत इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगा. यह कदम सिर्फ तकनीकी ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को मज़बूती देने वाला है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे भारत की डिफेंस इंडस्ट्री को ग्लोबल पहचान मिलेगी और देश की आत्मनिर्भरता को नई उड़ान. दसॉल्ट एविएशन और टाटा ग्रुप की यह साझेदारी आने वाले समय में भारत को रक्षा उत्पादन के हब के तौर पर स्थापित कर सकती है. साथ ही, इससे भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों में भी नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है.
 
बड़े निवेश को मिलेगा बढ़ावा 
इस मेगा डील से न केवल भारत की रक्षा ताकत को बल मिलेगा, बल्कि देश के एयरोस्पेस सेक्टर के बुनियादी ढांचे में भी बड़े निवेश को बढ़ावा मिलेगा. राफेल फाइटर जेट के जिन हिस्सों का निर्माण भारत में किया जाएगा, उनमें विमान का फ्यूजलेज, सेंट्रल फ्यूजलेज, रियर सेक्शन और फ्रंट सेक्शन शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस डील के बाद स्थापित किए जा रहे प्रोडक्शन प्लांट से साल 2028 तक पहला राफेल फ्यूजलेज असेंबली लाइन से बाहर आ जाएगा. जैसे ही इस अत्याधुनिक फैक्टरी का निर्माण पूरा होगा, हर महीने दो फ्यूजलेज का उत्पादन संभव हो पाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को न सिर्फ सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उसे एक वैश्विक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब की दिशा में भी अग्रसर करेगा.
 
फ्यूजलेज क्या होता है?
फ्यूजलेज किसी भी विमान का मुख्य ढांचा या 'बॉडी' होता है, जो विमान के सामने से लेकर पीछे तक फैला होता है. यही वह हिस्सा है जिसमें पायलट का कॉकपिट, हथियार और मिसाइलें लगाई जाती हैं, इसके अलावा फ्यूल टैंक, रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम समेत कई बार सैनिक या जरूरी साजो-सामान भी रखे जाते हैं (मल्टी-रोल जेट्स में),इस बॉडी से ही विमान के दोनों पंख (Wings), टेल (पूंछ वाला हिस्सा), और लैंडिंग गियर जुड़े होते हैं. दसॉल्ट एविएशन के अनुसार, राफेल फाइटर जेट का फ्यूजलेज हल्के और मजबूत फाइबर से बना होता है, जो विमान के वज़न को कम करता है और टेक-ऑफ वज़न को खाली वज़न के अनुपात में 40% तक बढ़ाता है. इसकी तेज़ गति को इसका डिज़ाइन संभव बनाता है.
 
बताते चलें कि इस डील को लेकर दसॉल्ट एविएशन के चेयरमैन और CEO एरिक ट्रैपियर ने कहा,
“यह भारत में हमारी सप्लाई चेन को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. टाटा सहित हमारे स्थानीय भागीदारों के विस्तार के कारण, यह सप्लाई चेन राफेल को सफल बनाने में मदद करेगी. भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के प्रमुख खिलाड़ियों में से एक, TASL (Tata Advanced Systems Limited) सहित हमारे सभी सहयोगियों को धन्यवाद. हमारे समर्थन के साथ, यह हमारी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा की आवश्यकताओं को पूरा करेगी.”
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