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कानपुर से शुरू हुआ ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद, देशभर में बवाल… साधु-संतों ने छेड़ा ‘आई लव महादेव’ अभियान

देश के कोने-कोने से निकल रहे आई लव मोहम्मद जुलूस के जवाब में अब हिंदुओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है और महादेव की काशी में साधु-संतों ने आई लव मुहम्मद के जवाब में आई लव महादेव अभियान छेड़ दिया है !

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उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर से उठे आई लव मोहम्मद विवाद का असर पूरे देश में देखा जा रहा है.  उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बरेली जैसे शहरों के साथ-साथ नागपुर. और हैदराबाद में भी सड़कों पर उतर कर मुसलमान आई लव मोहम्मद के नाम पर जुलूस निकाल रहे हैं. तो वहीं देवभूमि उत्तराखंड के काशीपुर में तो आई लव मोहम्मद जुलूस के दौरान कुछ कट्टरपंथियों ने विरोध प्रदर्शन की सीमा लांघ दी. और पुलिस वालों को ही दौड़ा-दौड़ा कर पीटने लगे.

आई लव मोहम्मद जुलूस में उत्तराखंड में बवाल 

आई लव मोहम्मद जुलूस के दौरान मुस्लिमों ने उत्तराखंड में बवाल काटा तो धामी सरकार की पुलिस ने भी बवालियों की अकड़ तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. एक तरफ जहां बवाल मचाने वाले पुलिस की लाठी खाने के बाद लंगड़ाते हुए नजर आए तो वहीं दूसरी तरफ आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर बुल्डोजर ने भी चढ़ाई कर दी.

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कट्टरपंथियों को पुलिस ने सिखाया सबक 

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उत्तराखंड में जिस तरह से आई लव मोहम्मद के नाम पर जुलूस निकालने वालों ने पुलिस वालों को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया. ऐसे कट्टरपंथियों का इलाज तो उत्तराखंड पुलिस ने कर दिया.  तो वहीं दूसरी तरफ देश के कोने-कोने से निकल रहे आई लव मोहम्मद जुलूस के जवाब में अब हिंदुओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है. और महादेव की काशी में साधु-संतों ने आई लव मुहम्मद के जवाब में आई लव महादेव अभियान छेड़ दिया है.

आई लव मोहम्मद vs आई लव महादेव

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आई लव मोहम्मद अभियान के विरोध में आई लव महादेव अभियान छेड़ने वाले काशी के सुमेरु पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा 'आई लव मोहम्मद के नाम पर जुलूस निकाल कर समाज में भय पैदा करने वालों से सौ करोड़ सनातनी झुके वाले नहीं हैं. कोई अगर नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका का सपना देखेगा तो उन्हें रोका जाएगा. टोका जाएगा. नहीं समझेंगे तो ठोक दिया जाएगा'।

कानपुर से शुरू हुआ विवाद 

कानपुर से उठा आई लव मोहम्मद विवाद अगर कानपुर में ही थम जाता तो बात इतनी आगे नहीं बढ़ती कि काशी के साधु-संतों को आई लव महादेव अभियान छेड़ना पड़ता. लेकिन कानपुर की घटना को मुस्लिम समाज ने धार्मिक रंग देने की कोशिश की. और इसी के बहाने देश के कोने-कोने में सड़कों पर उतर कर आई लव मोहम्मद पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. जिन्हें अब हिंदुओं ने भी जवाब देना शुरू कर दिया है.  काशी में जहां आई लव महादेव का पोस्टर लेकर साधु संत मैदान में उतर गये तो वहीं उज्जैन में हिंदुओं ने I Love Mahakal के पोस्टर लगा कर जवाब दिया.

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कैसे शुरू हुआ आई लव मोहम्मद विवाद ?

आई लव मोहम्मद का यह पूरा मामला दरअसल यूपी के कानपुर जिले से शुरू हुआ, जब सितंबर की शुरुआत में बारावफात के जुलूस के दौरान मुस्लिम युवाओं ने आई लव मोहम्मद लिखे पोस्टर और बैनर लगाए, इसके बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे नई परंपरा बताते हुए आपत्ति जताई और माहौल इतना गरम हो गया कि पुलिस ने हस्तक्षेप कर बैनर हटवा दिए और 9 लोगों को नामजद करने के साथ ही 15 लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर दी, जिसमें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने जैसी धाराएं लगाई गई

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पुलिस का कहना है कि मामला सिर्फ बैनर का नहीं है.  बल्कि तय जगह से अलग टेंट लगाने और जुलूस के दौरान दूसरे समुदाय के धार्मिक पोस्टर फाड़े जाने के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.  तो वहीं मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि आई लव मोहम्मद नारे को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है, उनका कहना है कि यह तो सिर्फ मोहम्मद पैगंबर के प्रति प्यार और सम्मान जताने का तरीका है. इसमें सांप्रदायिक तनाव भड़काने जैसी कोई बात नहीं है.  अब मामला जो भी हो.  लेकिन कानपुर से शुरू हुआ बवाल धीरे-धीरे देश भर में फैलने लगा है. और अब बात यहां तक पहुंच गई है कि एक तरफ जहां मुस्लिम समाज आई लव मोहम्मद का पोस्ट लेकर सड़कों पर जुलूस निकाल रहा है.  तो वहीं दूसरी तरफ हिंदुओं ने भी जवाबी तौर पर I Love Mahadev और I Love Mahakal जैसे पोस्टर लेकर मैदान में उतर गये हैं.

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