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अवैध बांग्लादेशियों को बख़्शने के मूड में नहीं सरकार, दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर डिपोर्ट किया

दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे चार और बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है. दक्षिण पश्चिम जिले के ऑपरेशन सेल की टीम ने यह कार्रवाई की. गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक अपने वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहे थे. दिल्ली पुलिस ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में अवैध रूप से रहने के लिए होटलों का इस्तेमाल किया. फिलहाल उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ), दिल्ली के माध्यम से बांग्लादेश भेज दिया गया है.

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देश के कई राज्यों में इन दिनों अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई चल रही है. उनकी धरपकड़ की जा रही है. गुजरात, महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक, चुन-चुनकर बांग्लादेशियों को पकड़ा जा रहा है और उन पर कार्रवाई की जा रही है. इसी बीच राजधानी दिल्ली में भी अवैध रूप से रह रहे चार और बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है.

वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रहने की कोशिश में थे बांग्लादेशी

दक्षिण पश्चिम जिले के ऑपरेशन सेल की टीम ने यह कार्रवाई की. गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक अपने वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहे थे. दिल्ली पुलिस ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में अवैध रूप से रहने के लिए होटलों का इस्तेमाल किया. फिलहाल उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ), दिल्ली के माध्यम से बांग्लादेश भेज दिया गया है.

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दिल्ली पुलिस राजधानी में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर लगातार अभियान चला रही है. हालिया दिनों में पुलिस ने वैध भारतीय दस्तावेजों के बिना दिल्ली में रहने वाले व्यक्तियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और उन्हें वापस भेजने के प्रयास तेज किए हैं. इसी क्रम में दक्षिण पश्चिम जिला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा.

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दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सभी चार बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई. इनमें दो नागरिक ढाका में अलग-अलग जगह के रहने वाले थे, जबकि एक नागरिक बांग्लादेश के मीरगंज और दूसरा व्यक्ति खर्रा का रहने वाला था. ये लोग मेडिकल वीजा और अन्य कारणों से भारत आए थे. हालांकि उनका भारत वीजा भी समाप्त हो चुका था, लेकिन ये लोग वापस नहीं लौटे.

दिल्ली पुलिस ने बताया कि वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी कुछ अवैध प्रवासियों के महिपालपुर इलाके में घूमने की सूचना मिली. इस पर कार्रवाई करते हुए टीम ने चार व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिनकी पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में की गई. पूछताछ करने पर बताया कि उन्होंने अपने इलाज के लिए भारत का वीजा लिया था और पुर्तगाल का वीजा प्राप्त किया था. दिल्ली में रहने के दौरान वो कई होटलों में रुके. गहन जांच और पूछताछ के बाद जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई, जिसके बाद एफआरआरओ के जरिए उन्हें वापस भेज दिया गया.

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सूरत पुलिस ने 119 बांग्लादेशियों को पकड़ा, सभी डिपोर्ट किए जाएंगे

इससे दो दिन पहले 19 जून को सूरत पुलिस ने शहर में अवैध रूप से रह रहे 119 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने भेस्तान, उन, पांडेसरा, चौक बाजार और रांदेर जैसे इलाकों में छापेमारी कर इन अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को पकड़ा था. ये सभी किराए के मकानों में रहकर मजदूरी या लारी-गल्ला का काम करते थे. सूरत के संयुक्त पुलिस आयुक्त राघवेंद्र वत्स ने बताया था कि पूछताछ में इनके बांग्लादेशी होने के पुख्ता सबूत मिले हैं. अब इनका बायोमेट्रिक डेटा लिया जाएगा, ताकि भविष्य में ये भारत में दोबारा प्रवेश कर सकें. पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में क्राइम ब्रांच, ऑपरेशन ग्रुप और विभिन्न थानों की टीमें शामिल थीं. गिरफ्तार किए गए लोगों में 26 पुरुष और 37 महिलाएं शामिल थे. पूछताछ और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से इनकी पहचान की पुष्टि की गई. राघवेंद्र वत्स ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, "इस कार्रवाई के तहत अब तक 119 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया. इससे पहले भी सूरत पुलिस 200 से अधिक अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट कर चुकी है."

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उन्होंने बताया था कि इन लोगों के पास से कोई ऐसा दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उनकी नागरिकता साबित हो. हालांकि, पूछताछ और केंद्रीय एजेंसियों की जांच से इनके बांग्लादेशी होने की पुष्टि हुई. इनमें से किसी का आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस पूरी सावधानी बरत रही है. डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें केंद्रीय एजेंसियां भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, "डिपोर्टेशन की प्रक्रिया तय नियमों के तहत होगी. इनके बायोमेट्रिक डेटा को केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा ताकि ये लोग दोबारा भारत में प्रवेश कर सकें." उनका कहना है कि बायोमेट्रिक डेटा यह सुनिश्चित करेगा कि इन लोगों के नाम पर कोई फर्जी दस्तावेज बन सके. उनके मुताबिक, सूरत पुलिस की यह कार्रवाई अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है. शहर में पहले भी ऐसी छापेमारी हो चुकी है, जिसमें सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया.

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