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दो साल से कम उम्र के बच्चों को ना पिलाएं कफ सिरप, सरकार ने जारी की एडवाइजरी, जानें कारण

केंद्र की मोदी सरकार ने कहा है कि 'दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए. सरकार के दिशा निर्देशों के मुताबिक, आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इनकी अनुशंसा नहीं की जाती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर
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राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की प्रतिबंधित दवा कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने एडवाइजरी जारी की है. सरकार ने बताया है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ और सर्दी की दवा नहीं दी जा सकती है. इसको लेकर DGHS (स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय) ने बाल रोगियों में कफ सिरप के इस्तेमाल करने के तरीके पर एडवाइजरी जारी की है. 

क्या कहा सरकार ने? 

केंद्र की मोदी सरकार ने कहा है कि 'दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए. सरकार के नियमों के मुताबिक, आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इनकी अनुशंसा नहीं की जाती है. किसी भी दवा के उपयोग के लिए सावधानीपूर्वक नैदानिक मूल्यांकन, कड़ी निगरानी और उचित खुराक, न्यूनतम प्रभावी अवधि और कई दवाओं के संयोजन से बचने का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए. वहीं सरकार ने कहा है कि डॉक्टरों द्वारा निर्धारित दवाओं के पालन के बारे में जनता को भी जागरूक किया जा सकता है.'

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मध्य प्रदेश-राजस्थान में 11 बच्चों की हुई मौत

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बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में कथित रूप से प्रतिबंधित कफ सिरप पीने की वजह से कुल 11 बच्चों की मौत हो गई. इसमें से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है. वहीं इस मामले की शुरुआती जांच में सिरप के सैंपल में डीईजी या ईजी का अंश नहीं मिला है, जो किडनी पर असर डालता है. इस मामले में एसोसिएट प्रोफेसर और बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पवन नंदुरकर ने बताया कि 'हाल ही में रिपोर्टों से पता चला था कि हमारे 7 बच्चों की मौत हो गई थी, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि यह संख्या बढ़कर 9 हो गई है.'

मौतें और किडनी की चोट का मामला सामने आया 

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बता दें कि मौतें और किडनी की चोट का मामला कोल्ड्रिफ नामक कफ सिरप से जुड़ा है, जिसे हर कोई दोषी ठहरा रहा है. हालांकि, जांच अभी भी जारी है और यह संभव है कि किडनी की चोट किसी और कारण से हुई हो. फिलहाल कोल्ड्रिफ और नेस्टो डीएस कफ सिरप की बिक्री पर तब तक रोक लगा दी है, जब तक उनकी जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती है. 

क्या बताया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने? 

इस बीच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कम से कम 9 बच्चों की मौत के बाद एकत्र किए गए कफ सिरप के नमूनों में औषधि नियंत्रण अधिकारियों को किसी भी प्रकार के गलत यहां तक कि डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) या एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) का कोई अंश नहीं मिला है, जो किडनी को नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. 

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कफ सिरप मामले में मंत्रालय ने दिया स्पष्टीकरण 

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कफ सिरप मामले में मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन एक बहु-विषयक विशेषज्ञ दल मौतों के अन्य सभी संभावित कारणों की भी जांच कर रहा है, जिसमें पानी, कीट वाहक और श्वसन नमूनों की भी जांच की जा रही है. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और अन्य के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और राज्य के अधिकारियों के साथ समन्वय में विभिन्न नमूने एकत्र किए.

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