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राजस्थान के सवाई माधोपुर का वो परिवार, जिसे कहते हैं IAS बनाने की फैक्ट्री
संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) जिसकी परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है. अगर इस परीक्षा में आपके परिवार से किसी एक सदस्य का भी चयन हो जाता है तो उस परिवार के साथ-साथ उसके पूरे गली-मोहल्ले यहां तक की जिले का नाम रौशन होता है. लेकिन जरा सोचिए एक ही परिवार से 6 सदस्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में हो फिर?
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UPSC जिसमें हर साल अनगिनत लोग इस कठिन परीक्षा को पास करने का प्रयास करते हैं. फिर भी कुछ ही लोग इसमें सफल हो पाते हैं. कुछ समय पहले राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले का एक परिवार सुर्खियों में रहा है. बामनवास के नाहरसिंहपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाले अर्नब प्रताप सिंह का परिवार वास्तव में उल्लेखनीय है.
एक परिवार ने देश को दिए 6 IAS
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले का बामनवास के नाहरसिंहपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाले अर्नब प्रताप सिंह के परिवार के छह सदस्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में हैं. इस परिवार को आईएएस बनाने की फैक्ट्री कहा जाता है.
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अर्नब प्रताप सिंह ने यूपीएससी 2022 परीक्षा में 430वीं रैंक हासिल की थी. जो उनकी अटूट लगन और प्रतिबद्धता का प्रमाण है. अर्नब का सफर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के साथ शुरू हुआ. उनकी शिक्षा की नींव लखनऊ के प्रसिद्ध सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) और दिल्ली के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में पड़ी. अर्नब प्रताप सिंह के पिता बाबूलाल मीणा 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश में सेवारत हैं. परिवार की मुखिया वीना मीणा भी 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. वीणा मीणा भी उत्तर प्रदेश कैडर में सेवारत हैं.
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परिवार के नए सदस्यों नेपरंपरा को बढ़ाया आगे
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इस विरासत में अर्नब के ताऊजी (पिता के बड़े भाई) डॉ. बत्तीलाल मीणा (सेवानिवृत्त) ने परिवार की उल्लेखनीय आईएएस परंपरा में योगदान दिया. यह विरासत और भी आगे बढ़ती है क्योंकि अर्नब के ताऊजी की बेटी और उनके एक अन्य चाचा की बेटी शेफाली ने 2016 में यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनीं. ये प्रतिभाशाली बहनें अब गुजरात कैडर में कार्यरत हैं. यह परिवार कई पीढ़ियों से सिविल सेवाओं में योगदान दे रहा है और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है. सवाई माधोपुर का ये परिवार देश के लिए एक मिसाल है.