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दिलचस्प हुआ कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सचिव पद पर मुकाबला, बीजेपी के दो दिग्गज राजीव प्रताप रूडी और संजीव बालियान के बीच सीधी टक्कर

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया (CCI) के चुनाव 2025 में इस बार सचिव (प्रशासन) पद के लिए दो वरिष्ठ भाजपा नेताओं -राजीव प्रताप रूडी और डॉ. संजीव बालियान के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है. यह मुकाबला न केवल दिलचस्प है, बल्कि क्लब की लोकतांत्रिक परिपक्वता और राजनीतिक विविधता का भी प्रतीक है.

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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया (CCI) के चुनाव 2025 में इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है. CCI के सचिव (प्रशासन) पद के लिए बीजेपी के दो दिग्गद नेताओं राजीव प्रताप रूडी और डॉ. संजीव बालियान के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है. यह मुकाबला न केवल दिलचस्प है, बल्कि क्लब की लोकतांत्रिक परिपक्वता और राजनीतिक विविधता का भी प्रतीक है.

12 अगस्त को होगा मतदान, उसी दिन होगी मतगणना

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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सचिव (प्रशासन) और 11 कार्यकारी सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान 12 अगस्त को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक स्पीकर हॉल, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में होगा. वहीं मतगणना इसी दिन शाम 5 बजे से प्रारंभ की जाएगी.

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राजीव प्रताप रूडी ने कैसे किया CCI कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का कायाकल्प

पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी की वर्तमाण में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सचिव हैं, वो फिर से इस पद के लिए चुनावी मुकाबले में हैं, जहां उनका अपनी ही पार्टी के पूर्व सांसद संजीव बालियान से मुकाबला होना है. रूडी की अगुवाई में क्लब ने एक जर्जर ढांचे से निकलकर आधुनिक बहुउपयोगी संसदीय क्लब का स्वरूप प्राप्त किया है. क्लब में आज रेस्टोरेंट, जिम, स्विमिंग पूल, स्पा, बैडमिंटन कोर्ट और क्रिकेट नेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. यह मंच अब न केवल राजनीतिक बैठकों, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों का भी केंद्र बन चुका है.

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तीन पदों पर निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार

सचिव (संस्कृति) के पद पर डीएमके के तिरुचि शिवा, सचिव (खेल) के लिए कांग्रेस के राजीव शुक्ला और कोषाध्यक्ष पद पर BRS के ए.पी. जितेन्द्र रेड्डी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं. नाम वापसी के बाद ये तीनों वरिष्ठ नेता निर्विरोध रूप से चुने गए, जो क्लब के भीतर आपसी विश्वास और सौहार्द का संकेत है.

CCI के 1200 से अधिक सदस्य, MP-Ex MPs ही बन सकते हैं सदस्य

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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की सदस्यता केवल वर्तमान और पूर्व सांसदों के लिए आरक्षित है. फिलहाल क्लब में 1200 से अधिक सदस्य हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, एल.के. आडवाणी जैसे शीर्ष नेता शामिल हैं.

कार्यकारी सदस्यों के लिए 14 नामांकन, मल्टी पार्टी भागीदारी

11 कार्यकारी सदस्य पदों के लिए कुल 14 नामांकन दाखिल हुए हैं, जिनमें भाजपा, कांग्रेस, टीएमसी, शिवसेना, टीडीपी और समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न दलों के सांसद शामिल हैं. यह बहु-दलीय सहभागिता क्लब के लोकतांत्रिक स्वरूप को दर्शाती है.

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राजनीतिक संवाद का मंच CCI

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब की स्थापना 1947 में संविधान सभा के संवाद मंच के रूप में हुई थी. इसे 1965 में राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा औपचारिक रूप से संसद सदस्यों के क्लब के रूप में उद्घाटित किया गया. 2002 में इसे सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत किया गया और 2008 में चुनावी उपनियम स्वीकृत हुए.

इसके पश्चात तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष स्व. सोमनाथ चटर्जी के निर्णयानुसार क्लब में चुनाव आधारित गवर्निंग व्यवस्था की शुरुआत हुई. 2 अगस्त 2008 को चुनावी उपनियम स्वीकृत हुए और 18 फरवरी 2009 को पहली बार चुनाव आयोजित किए गए. क्लब की चुनावी परंपरा कोई नया या असाधारण घटनाक्रम नहीं है. इससे पूर्व 2009, 2014 और 2019 में भी गवर्निंग बॉडी के चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित हुए हैं. इसके पहले भी भाजपा के ही विजय गोयल और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद क्लब का चुनाव लड़ चुके हैं. इसकी औपचारिक संरचना 1965 में राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा उद्घाटन के साथ स्थापित हुई. वर्ष 1998-99 में लोकसभा अध्यक्ष स्व. जीएमसी बालयोगी ने एक विज़न कमेटी गठित की, जिसमें श्री राजीव प्रताप रूडी, श्री हन्नान मौला जैसे सदस्य शामिल थे. 

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लोकसभा अध्यक्ष पदेन अध्यक्ष, चुनाव प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी

क्लब के पदेन अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होते हैं और वर्तमान में ओम बिरला इस पद पर आसीन हैं. क्लब की गवर्निंग बॉडी में तीन सचिव (प्रशासन, खेल, संस्कृति), एक कोषाध्यक्ष और 11 कार्यकारी सदस्य होते हैं. केवल सदस्य सांसद और पूर्व सांसद ही मतदान कर सकते हैं.

लोकतांत्रिक संस्कृति का जीवंत उदाहरण

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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का यह चुनाव महज एक आंतरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक उत्सव है, जहाँ मतदाता स्वयं देश के जनप्रतिनिधि होते हैं. यह चुनाव पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी नेतृत्व के सिद्धांतों को और मजबूती प्रदान करता है.

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