Advertisement
बिजली बिल का बोझ खत्म! महाराष्ट्र सरकार का बड़ा पॉवर बूस्टर तैयार, जानें कैसे मिलेगा फायदा
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार इस साल महावितरण के लिए अब तक लगभग 26,000 करोड़ रुपये की गारंटी दे चुकी है और आने वाले दो सालों में भी ऐसी गारंटी की जरूरत पड़ सकती है.
Advertisement
Maharashtra Electricity Bill: महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार (19 नवंबर 2025) को महावितरण यानी MSEDCL को एक बड़ी राहत दी है. कैबिनेट ने फैसला लिया है कि बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन कंपनियों के पुराने बकाये चुकाने के लिए सरकार 5,252.28 करोड़ रुपये के लोन पर स्टेट गारंटी देगी. यह पैसा हुडको और यूको बैंक से लिया जाएगा. इस कदम से महावितरण को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और राज्य में बिजली सप्लाई पर कोई खतरा नहीं आएगा.
कितनी रकम, कहां से जुटेगी और किस ब्याज पर?
सरकार ने दो अलग-अलग संस्थानों से यह लोन लेने की मंजूरी दी है. हुडको से: ₹2,785.37 करोड़, ब्याज दर 8.95% सालाना यूको बैंक से: ₹2,466.90 करोड़, ब्याज दर 8.45% सालाना कुल लोन: ₹5,252.28 करोड़ इसमें मूलधन ₹3,653.25 करोड़ ब्याज ₹1,899.02 करोड़ शामिल है. यह पूरी राशि वित्त वर्ष 2025-26 की मासिक किश्तें चुकाने के लिए इस्तेमाल होगी ताकि बिजली कंपनियों को समय पर भुगतान मिल सके और बिजली सप्लाई न रुके.
Advertisement
कैसे बढ़ता गया बकाया?
Advertisement
महावितरण पर बिजली उत्पन्न करने वाली और बिजली ट्रांसमिट करने वाली कंपनियों का कुल मिलाकर लगभग ₹17,252 करोड़ बकाया है. जब इसमें लेट पेमेंट का ब्याज जोड़ दिया गया, तो यह राशि बढ़कर ₹29,230 करोड़ पहुंच गई. सरकार ने तय किया है कि इस बकाये को 2022-23 से 2026-27 तक यानी पांच साल में पूरी तरह चुकाया जाएगा.
अब तक कितनी गारंटी दी गई?
Advertisement
महाराष्ट्र सरकार पिछले कुछ सालों से महावितरण को राहत देती आ रही है अब तक:
पहला चरण: ₹13,552.12 करोड़
दूसरा चरण: ₹7,619.69 करोड़
तीसरा चरण (इस बार): ₹5,252.28 करोड़
इस तरह कुल गारंटी अब बढ़कर लगभग ₹26,424 करोड़ हो गई है.
सरकार ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं
Advertisement
सिर्फ लोन देने भर की बात नहीं है, सरकार ने महावितरण पर कई शर्तें भी लगाई हैं:
- यह गारंटी सिर्फ ₹5,252.28 करोड़ की सीमा तक ही रहेगी.
- यदि पेमेंट में देरी हुई और कोई अतिरिक्त पेनल्टी लगी, तो उसे सरकार नहीं भरेगी.
- महावितरण को लोन देने वाले बैंक या संस्थान को पूरी सिक्योरिटी (कोलेटरल) देनी होगी.
- हर 6 महीने में वित्तीय रिपोर्ट ऊर्जा विभाग को देनी होगी.
- अगर सिक्योरिटी नहीं दी गई या लोन का गलत उपयोग हुआ, तो गारंटी तुरंत खत्म हो जाएगी.
- इस बार सरकार ने गारंटी फीस भी माफ कर दी है
क्यों जरूरत पड़ी इस गारंटी की?
यह भी पढ़ें
केंद्र सरकार के लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) नियमों के मुताबिक, अगर डिस्कॉम यानी बिजली वितरण कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती, तो उसकी बिजली सप्लाई तक बंद हो सकती है. महावितरण पहले से ही भारी कर्ज में है.ऐसे में सरकार की गारंटी से उसे कम ब्याज दर पर लोन मिल जाएगा और बिजली कंपनियों का भरोसा भी बना रहेगा.ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह कदम “वित्तीय अनुशासन और बिजली क्षेत्र की स्थिरता दोनों के लिए बहुत जरूरी था.” महाराष्ट्र सरकार इस साल महावितरण के लिए अब तक लगभग 26,000 करोड़ रुपये की गारंटी दे चुकी है और आने वाले दो सालों में भी ऐसी गारंटी की जरूरत पड़ सकती है.