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साल का सबसे बड़ा मुकाबला! खत्म होगी BMC में 'ठाकरे परिवार' की 40 साल पुरानी सत्ता या फिर होगी फडणवीस युग की शुरुआत?
BMC Exit Poll 2026: मुख्य मुकाबला शिवसेना (यूबीटी) और भाजपा के बीच है. उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी और परिवार की विरासत बचाने के लिए चुनाव में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुआई वाली भाजपा इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पूरी रणनीति बना रही है.
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BMC Exit Poll 2026: मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों सहित महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मतदान गुरुवार को हुआ. चुनाव को लेकर कड़ी सुरक्षा बरती गई और माहौल तनावपूर्ण था. इन चुनावों को राज्य की राजनीति की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.मुख्य मुकाबला शिवसेना (यूबीटी) और भाजपा के बीच है. उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी और परिवार की विरासत बचाने के लिए चुनाव में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुआई वाली भाजपा इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पूरी रणनीति बना रही है. खासकर मुंबई (बीएमसी) में जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
मुंबई नगर निगम: भाजपा के लिए बड़ी चुनौती
मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी चुनाव भाजपा के लिए सबसे अहम है. 2017 में भाजपा शिवसेना को सत्ता से हटाने के बहुत करीब थी, लेकिन उस समय उन्होंने राज्य सरकार की स्थिरता को प्राथमिकता दी. अब स्थिति बदल चुकी है. 2022 में शिवसेना में बड़ा बंटवारा हुआ और उद्धव ठाकरे को अपनी पार्टी का नाम और चिन्ह खोना पड़ा. ऐसे में बीएमसी ही उनका आखिरी बड़ा गढ़ बचा है.
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भाजपा मुंबई में जीत हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. यहां जीत से भारत की वित्तीय राजधानी पर भाजपा का प्रभाव और बढ़ जाएगा. इसके साथ ही, यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में आगामी सालों का रुख तय करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
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उद्धव ठाकरे और शिवसेना की रणनीति
उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई है. अपनी पार्टी की विरासत और सत्ता बचाने के लिए उन्होंने अपने भाई राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाया है. इस गठबंधन का मकसद बीएमसी पर लंबे समय से चली आ रही शिवसेना की पकड़ को मजबूत करना है.
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शिवसेना 1985 से मुंबई में शासन कर रही है. 2017 में मुकाबला बहुत करीबी था: शिवसेना ने 84 सीटें, भाजपा 82, कांग्रेस 31, एनसीपी 9 और एमएनएस 7 सीटें जीती थीं. उस समय स्पष्ट बहुमत न होने की वजह से भाजपा ने राज्य सरकार की स्थिरता बनाए रखने के लिए शिवसेना को महापौर का पद दिया. अब चुनावी माहौल पूरी तरह बदल चुका है और मुकाबला और भी कठिन है.
BMC का महत्व
बीएमसी केवल एक नगर निगम नहीं है. यह भारत का सबसे धनी निगम है. इसका सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपए से ज्यादा है, जो कई छोटे राज्यों से भी अधिक है. इस निगम के पास बड़ी आर्थिक शक्ति है, जो इसे किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण बनाती है.
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BMC के राजस्व के मुख्य स्रोत हैं:
प्रॉपर्टी टैक्स (रिहायशी और व्यावसायिक)
पानी, सीवरेज और पार्किंग टैक्स
विकास शुल्क और भवन निर्माण अनुमति से मिलने वाली राशि
इतनी बड़ी आर्थिक ताकत होने के कारण बीएमसी किसी भी पार्टी के लिए सिर्फ सत्ता का केंद्र नहीं बल्कि विकास और फैसलों पर नियंत्रण का साधन भी है।
मतदाता और उम्मीदवार
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मुंबई में 227 सीटों के लिए कुल 1,729 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. शहर में कुल 1.03 करोड़ से ज्यादा योग्य मतदाता हैं, जिनमें 55.16 लाख पुरुष और 48.26 लाख महिलाएं शामिल हैं. इस चुनाव का नतीजा न केवल शहर की राजनीति बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा.