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भारत मंडपम में हंगामा पड़ा भारी! यूथ कांग्रेस के 4 कार्यकर्ता पहुंच जेल, 5 दिन की पुलिस रिमांड

भारत मंडपम में विरोध प्रदर्शन और हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार यूथ कांग्रेस के 4 सदस्यों को कोर्ट ने 5 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को चार युवा कांग्रेस सदस्यों- कृष्ण हरि, कुंदन, अजय कुमार सिंह और नरसिम्हा को पुलिस हिरासत में भेज दिया. कोर्ट ने कहा कि उन्हें भारत मंडपम में एआई शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान बिना शर्ट के विरोध प्रदर्शन करने के संबंध में पांच दिनों की हिरासत में रखा जाए.

अंतर्राष्ट्रीय आयोजन मं रुकावट बर्दाश्त नहीं- कोर्ट

अदालत ने आगे कहा कि विरोध करने का अधिकार लोकतंत्र की एक बुनियादी विशेषता है, लेकिन इसका इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकता जिससे पब्लिक ऑर्डर में रुकावट आए या दूसरों के अधिकारों को नुकसान पहुंचे, खासकर किसी इंटरनेशनल इवेंट में जिसमें विदेशी डेलीगेट्स शामिल हों. वहीं, तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के विभिन्न प्रावधानों के तहत, धारा 61 (2), 121 (1), 132, 195 (1), 221, 223 (ए), 190, 196, 197 और 3 (5) सहित, एफआईआर दर्ज की गई. 

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‘भारत मंडपम के हाई-सिक्योरिटी एरिया में पहले से सोची-समझी घुसपैठ’

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि समिट "एक इंटरनेशनल इवेंट था जिसमें देश और विदेश के डेलीगेट्स शामिल हुए थे और आरोपियों ने कथित तौर पर ग्लोबल डेलीगेट्स और बड़े लोगों की मेजबानी वाले इस बड़े इंटरनेशनल कॉन्क्लेव के दौरान भारत मंडपम के हाई-सिक्योरिटी एरिया में पहले से सोची-समझी घुसपैठ की थी. 

‘अधिकार के साथ मर्यादा भी अनिवार्य’

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संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) और 19 (1) (ख) के तहत इस कृत्य को संरक्षित असहमति मानने के तर्क को खारिज करते हुए, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने कहा, "विरोध और असहमति व्यक्त करने का अधिकार लोकतंत्र का मूलभूत सिद्धांत है, जो संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) और (ख) में निहित है। हालांकि, यह निरपेक्ष नहीं है और संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और शालीनता के लिए अनुच्छेद 19 (2) और (3) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है”.

अनुमति के साथ भी विरोध प्रदर्शन निर्धारित स्थानों पर ही होने चाहिए- कोर्ट

शाहीन बाग विरोध प्रदर्शनों से संबंधित अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा: "विरोध करने का अधिकार अनुच्छेद 19(1) (क) और (ख) के तहत मौलिक स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन यह यात्रियों को गंभीर असुविधा पहुंचाने तक विस्तारित नहीं हो सकता. सार्वजनिक मार्गों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता. प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को अनुच्छेद 21 के तहत दूसरों के अधिकारों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए. अनुमति के साथ भी विरोध प्रदर्शन निर्धारित स्थानों पर ही होने चाहिए”.

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‘विदेशी हितधारकों के समक्ष छवि को नुकसान’

इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाइयां "न केवल आयोजन की पवित्रता को खतरे में डालती हैं बल्कि विदेशी हितधारकों के समक्ष गणतंत्र की राजनयिक छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे यह संवैधानिक सुरक्षा उपायों द्वारा पूरी तरह से असुरक्षित हो जाता है”. पुलिस हिरासत के प्रश्न पर, अदालत ने टिप्पणी की कि यद्यपि "जमानत नियम है, कारावास अपवाद है", फिर भी जहां जांच की अनिवार्यताएं प्रदर्शित होती हैं, वहां विवेक का प्रयोग किया जा सकता है. 

बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय कार्यक्रम को बाधित करने का आरोप लगाया

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भाजपा नेताओं ने विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया और कांग्रेस पर भारत की तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करने वाले एक राष्ट्रीय कार्यक्रम को पटरी से उतारने का प्रयास करने का आरोप लगाया. विपक्षी कांग्रेस के युवा विंग ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शन इस चिंता को उजागर करने के लिए था कि "राष्ट्रीय हितों के ऊपर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है और आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति कमजोर हो गई है. समूह ने विरोध प्रदर्शन को बढ़ती कीमतों और बेरोजगारी जैसे आर्थिक मुद्दों से भी जोड़ा और दावा किया कि युवा लोग तेजी से हताश हो रहे हैं. 

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