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संसद में बोलने को लेकर राहुल गांधी ने लगाए जो आरोप उसे मिल रहा विपक्षी दलों का समर्थन

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जैसे ही यह आरोप लगाया कि '‘मैं जब भी सदन में खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता’ इस बयान पर अब विपक्ष के अन्य दलों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है।

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संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के चलते प्रतिदिन कहसुनी देखने को मिल रही है। इस बीच जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल  गांधी ने जैसे ही यह आरोप लगाया कि '‘मैं जब भी सदन में खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता’ इस बयान पर अब विपक्ष के अन्य दलों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा राहुल गांधी ने आरोप नहीं बल्कि जो सत्य है वो बताया है। 

राइट टू रिप्लाई का नहीं हो रहा पालन 

शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राहुल गांधी का बयान आरोप नहीं बल्कि हकीकत है। मैं मानती हूं कि बार-बार आरोप लगाने की बात बोलना हमें सत्यता से दूर करता है। सवाल यह है कि स्पीकर आते हैं, एक स्टेटमेंट पढ़ते हैं और फिर सदन की कार्यवाही स्थगित कर देते हैं। राइट टू रिप्लाई भी कुछ होता है, प्रधानमंत्री तो सदन में अपनी बात रखते हैं, मगर नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता है। बार-बार ये सब किया जाता है और स्पीकर आरोप लगा रहे हैं, वह संवैधानिक पद पर बैठकर भाजपा का नैरेटिव सेट कर रहे हैं। सही मायनों में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने जो कहा है, वो कोई आरोप नहीं है बल्कि सच्चाई है।"

राज्यसभा में भी ऐसा ही होता है 

प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा, "राज्यसभा में भी कुछ ऐसा ही होता है। मल्लिकार्जुन खड़गे जब कुछ बोलने के लिए उठते हैं तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है। मैं पूछना चाहती हूं कि देश में किस तरह का प्रजातंत्र चल रहा है। देश को ये पता होना चाहिए कि यहां क्या चल रहा है।" वही कुणाल कामरा विवाद पर भी प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "देश में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा कुणाल कामरा और एक जोक हो गया है। जोक को लेकर हम इतना इंटोलरेंस हो गए हैं कि एक शख्स ने नाम नहीं लिया, लेकिन महाराष्ट्र में सबको इस मुद्दे पर लगा दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार में बैठे हुए कुछ गुंडों ने ऑफिस में जाकर गुंडागर्दी की। इसके बाद बीएमसी को कार्रवाई के लिए भेजा गया। महाराष्ट्र का बच्चा-बच्चा जानता है कि एकनाथ शिंदे क्या हैं। महाराष्ट्र का बच्चा भी वही शब्द का इस्तेमाल करेगा, जो कुणाल कामरा ने किया है। मुझे लगता है कि न वो गाली थी और न ही कोई आपत्तिजनक शब्द था। ये सच्चाई है और इसे लेकर एकनाथ शिंदे तिलमिला गए हैं। इसलिए उन्हें (कुणाल कामरा) नोटिस जारी किया जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "देश में बहुत सारे मुद्दे हैं। देश में बेरोजगारी है, गरीबी है और महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है। देश की इतनी सारी दिक्कतें हैं, लेकिन रोज का एजेंडा कुणाल कामरा पर बनाया जा रहा है।"
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