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ममता बनर्जी और डॉक्टरों के बीच तनातनी, प्रयासों के बावजूद नहीं टूटी गतिरोध की दीवार

आरजी कर मेडिकल कॉलेज विवाद को सुलझाने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों को मंगलवार 10 सितंबर को राज्य सचिवालय में बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन डॉक्टरों ने मंगलवार को घोषणा की कि वे पूरी तरह हड़ताल पर रहेंगे और स्वास्थ्य भवन के सामने से नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजा गया ईमेल उनके लिए अपमानजनक है और इसने बातचीत की संभावनाओं को और कम कर दिया है।

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10 सितंबर को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डॉक्टरों के आंदोलन को सुलझाने के लिए एक बार फिर प्रयास किया। उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों को राज्य सचिवालय नबान्न में बैठक के लिए आमंत्रित किया। इस बैठक का उद्देश्य डॉक्टरों की मांगों और समस्याओं को सुनना और इस गतिरोध को समाप्त करना था।
डॉक्टरों की हड़ताल की शुरुआत मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा की कमी को लेकर हुई थी। जूनियर डॉक्टर  9 अगस्त से 31 वर्षीय डॉक्टर के बलात्कार-हत्या के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, कथित कवर-अप में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और कोलकाता पुलिस आयुक्त और स्वास्थ्य सचिव सहित शीर्ष अधिकारियों का इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
डॉक्टरों ने सरकार की अपील ठुकराई
नबान्न से पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टरों को एक ईमेल भेजकर तत्काल बैठक बुलाने के लिए कहा गया था। सरकार ने डॉक्टरों से अपील की थी कि वे नबान्न आएं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलें, जो खुद इस मामले को सुलझाने के लिए प्रयासरत थीं। लेकिन डॉक्टरों ने सरकार की ओर से भेजे गए ईमेल को अपमानजनक और आपत्तिजनक करार दिया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे संवाद न होना, बल्कि एक स्वास्थ्य सचिव द्वारा ईमेल भेजना, डॉक्टरों के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार के इस रवैये ने उनकी मांगों की गंभीरता को कम करके देखा है। उनका कहना है कि वे हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जिस तरह से उन्हें संपर्क किया गया, वह उनके लिए अस्वीकार्य है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उन्हें स्वास्थ्य सचिव का ईमेल प्राप्त हुआ था, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई आधिकारिक संवाद नहीं हुआ।
हालांकि बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक के लिए अपनी ओर से पूरी तैयारी की थी। कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि डॉक्टरों के आंदोलन पर कोई भी बयानबाजी नहीं की जाएगी और सिर्फ वह स्वयं ही इस मुद्दे पर बात करेंगी। लेकिन मुख्यमंत्री के सभी प्रयास विफल साबित हुए जब डॉक्टरों का कोई प्रतिनिधि नबान्न नहीं पहुंचा।
पश्चिम बंगाल की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉक्टरों को शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था, लेकिन डॉक्टरों ने इस आदेश को नजरअंदाज किया। सीएम ममता बनर्जी ने शाम 7:30 बजे तक डॉक्टरों का इंतजार किया, लेकिन कोई भी प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचा, जिससे मजबूरन उन्हें बैठक रद्द करनी पड़ी।
इस पूरे मामले को लेकर आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे संवाद के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन उन्हें उचित तरीके से संपर्क किया जाना चाहिए। डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक और सम्मानजनक प्रस्ताव आता है, तो वे बैठक में शामिल होने पर विचार करेंगे। डॉक्टरों का मानना है कि यह मामला केवल उनके अधिकारों का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की गरिमा और सुरक्षा का भी है। डॉक्टरों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे अपनी सेवा पर लौटने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले सरकार को उनके साथ सम्मानजनक तरीके से संवाद करना होगा।
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