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तेज प्रताप का मांझी समाज पर विवादित बयान! बिहार की राजनीति में छिड़ी जंग

शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा विवादित बयान दिया। उन्होंने अपने बयान में मांझी समाज को टारगेट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि 'मेरे पड़ोस में मांझी जी रहते हैं जिनके यहां बहुत सारा चूहा रहता है, मांझी जी चूहा पकड़वाते नहीं है और उनका चूहा फिर हमारे यहां वो पेड़ पौधा को नुकसान पहुंचाता है'।

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विपक्ष भले ही दलितों और पिछड़ों की बात करती है और उनके सरोकार करने के लिए बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन उनकी मानसिकता क्या है, यह तो आपको पता ही है। झूठ का मुखौटा विपक्ष कब तक पहनेगी, कभी न कभी सच्चाई का चेहरा सामने तो आएगा। अब ऐसा कुछ हुआ है जिसे देखकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि जो विपक्ष दिन-रात जातिगत जनगणना कराने की बात करती है और कहती है कि इससे दलितों और पिछड़ों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, उन्हीं के एक नेता, राहुल गांधी के खासमखास, और देश के दिग्गज नेताओं में शुमार लालू यादव के बड़े लाल तेज प्रताप यादव ने एक ऐसी बात कही है, जिससे आप सुनकर दंग रह जाएंगे।

दरअसल, देश के जाने-माने एंकर्स में शुमार शुभांकर मिश्रा आजकल अपना पॉडकास्ट चला रहे हैं, जिसमें वे देश की जानी-मानी हस्तियों और नेताओं को आमंत्रित करते हैं। इसी बीच उनके पॉडकास्ट में पहुंचे बिहार के पूर्व मंत्री लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव। कई मुद्दों पर उनकी बातचीत हुई, लेकिन एक बयान ने दिखा दिया कि दलितों के लिए इनकी सोच कितनी तुच्छ है।

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बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने कहा, "मेरे पड़ोस में मांझी जी रहते हैं, जिनके यहां बहुत सारा चूहा रहता है। मांझी जी चूहा पकड़वाते नहीं हैं और उनका चूहा फिर हमारे यहां पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाता है।" जैसे ही यह बयान शुभांकर मिश्रा ने अपने X हैंडल पर डाला, वह वायरल हो गया और इंटरनेट पर इसकी आलोचना शुरू हो गई। इस पर गुस्साए जीतन राम मांझी ने तेज प्रताप को लपेटे में लिया और उन्हें ही चूहा बता दिया। उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा, "हम मुसहर परिवार के लोग हैं, और गर्व से कहते हैं कि हम चूहा पकड़ते भी हैं और उसे खाते भी हैं। इसलिए हमारे झोपड़ियों और घरों में तो छोड़ ही दीजिए, हमारे आस-पास भी चूहा नहीं भटकता।"

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वैसे अब लालू जी ने तो चूहा खाना छोड़ दिया है। यदि उनके यहां कोई “चूहा” ज़्यादा उछल रहा है, तो हमारे यहां भेज दें, हम "दो मिनट" में उसे देख लेंगे।इधर सोशल मीडिया पर तेज प्रताप यादव को उनकी मानसिकता के लिए लोग कोसने लगे।

  • शुभांकर जी, आपको रोकना चाहिए था तेज प्रताप को इस विषय पर। आप भी समझ गए, आपने उसे इम्फेसाइज़ भी किया और आपने क्लिप भी पोस्ट किया। आपके वीडियो को व्यूज की कमी नहीं है, पर आप मुसहर समाज की दृष्टि से देखिए। इसका एक ही सकारात्मक पक्ष है कि यादवों के नेता, जो सामाजिक न्याय के मसीहा के नाम से राजनीति में जाने जाते हैं, उनके परिवार के छोटे नेता, महादलित मुसहर समाज के नेताओं को चूहा खाने वाला ही मानते हैं।"
  • RJD के नेताओं के मन में दलितों के खिलाफ जो मानसिकता है, इस वीडियो से आपको पता चल जाएगी। क्योंकि मांझी जी मुसहर महादलित समुदाय से आते हैं, इसलिए आरजेडी वाले बार-बार उन्हें 'चूहा-चूहा' कहकर चिढ़ाते हैं।"
  • इनकी योग्यता भी जरूर बताएं, अन्यथा सभी लोग इनके बारे में जानते नहीं हैं, और इनकी एक मात्र योग्यता लालू जी के पुत्र होने का ही मानते हैं।"
  • बहुत बड़ा खुलासा हुआ यह तो।"
  • "गलत है यह, ऐसे किसी समाज के बारे में नहीं बोलना चाहिए।"

इधर इस मामले पर शुभांकर मिश्रा को भी खूब खरी-खोटी सुनाई जा रही है। शुभांकर के ट्वीट पर रिट्वीट करते हुए हरि मांझी ने लिखा, "लालू जी के संस्कार का प्रदर्शन कर रहे हैं उनके पुत्र तेज प्रताप। हां! मुसहर हैं और गर्व है। जिस तरीके से शुभांकर मिश्रा जी आप भी ट्विस्ट कर रहे हैं, आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। बहुत सारे मित्र बोल रहे हैं कि SC-ST एक्ट के तहत केस कीजिए, केस करने से मानसिकता थोड़ी बदल जाएगी। ईश्वर सद्बुद्धि दें। शुभांकर जी, आज से आप भी उसी कतार में हैं जो पिछड़े-गरीब का उपहास उड़ाते हैं। अफसोस।"

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इस पर शुभांकर ने भी जवाब दिया और लिखा, "कुछ भी हरि मांझी जी? मांझी जी और लालू जी एक-दूसरे पर जातिगत टिप्पणी कई दिनों से कर रहे हैं। आप अपनी सियासत का हिस्सा मुझे बेवजह मत बनाइए। जब मुझे एहसास हुआ कि इशारों में क्या कहा जा रहा है, तब मैंने उन्हें टोका और फिर जीतन राम मांझी जी द्वारा ‘लालू यादव नहीं है’ वाला सवाल भी पूछा।"

इस पर भी हरि मांझी ने जवाब देते हुए लिखा, "शुभांकर जी, नेताओं के लिए बोलना बड़ा आसान होता है, लेकिन जिस तरीके से आपने पॉडकास्ट में ट्विस्ट किया है, वैसी आपसे उम्मीद नहीं है। आपने तो मुझे ही गुनाहगार बता रहे हैं। आप भी लाइक-सब्सक्राइब के लिए कर रहे हैं, ऐसा तो मैं नहीं कह रहा। आपकी जानकारी के लिए बता दें, मुसहर समाज सबसे अति पिछड़ी जाति है। उत्थान में समय लगेगा। हमारे बाबा दशरथ मांझी बोलते थे न, 'जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं।'

खैर, यह वाद-विवाद तो चलता रहेगा।

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