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टेक महिंद्रा के कंट्री हेड कतर में कैद, सरकार से लगाई गुहार

कतर में कैद है टेक महेंद्र के कंट्री हेड। परिवार ने पीएम से मांगी मदद। सरकार ने हर संभव मदद का दिया भरोसा।

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आप अपने देश से हज़ारों मील दूर किसी दूसरे देश में हैं. एक शाम आप किसी से मुलाक़ात करने रेस्टोरेंट जाते हैं. तभी पुलिस आए और आपको गिरफ्तार कर ले.आपको जेल में डाल दे और ये भी न बताए कि आख़िर आपकी गलती क्या है? आपको किसी से संपर्क करने ना दिया जाए.ये सब सोच कर ही आपकी रूह कांप गई होगी. अब ज़रा सोचिए जो पिछले क़रीब 4 महीने से विदेशी जेल में बंद है, उस पर क्या गुजर रही होगी. गुजरात के रहने वाले अमित गुप्ता क़तर में टेक महिंद्रा के कंट्री हेड हैं. अमित 4 महीने से क़तर की जेल में बंद हैं. उनका परिवार टेक महिंद्रा और सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है. इस मामले में क्या अपडेट है, सरकार का क्या रुख है, इस वीडियो में जानेंगे.

अब क़तर में हुई अमित गुप्ता की गिरफ्तारी ने भारत और क़तर के बीच टेंशन बढ़ा दी है. 2025 के जनवरी में क़तर से भारतीय कंपनी टेक महिंद्रा के कंट्री हेड अमित गुप्ता को डेटा चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अमित गुप्ता की गिरफ्तारी उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि सरकार और टेक महिंद्रा के लिए भी चिंता बन गई है.

क्या है पूरा मामला?

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अब तक की मिली जानकारी के अनुसार, अमित गुप्ता को डेटा चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, अमित के परिवार का कहना है कि अमित निर्दोष हैं. उन्हें फंसाया जा रहा है. पूरा परिवार उनकी रिहाई के लिए लगातार कोशिश कर रहा है. हर हफ्ते केवल पांच मिनट के लिए अमित का कॉल आता है. उससे बात करने का यही इकलौता जरिया है. ये कहना है अमित की मां पुष्पा गुप्ता का. पुष्पा गुप्ता का ये भी कहना है कि 4 महीने पहले जब अमित को गिरफ्तार किया गया था तब 48 घंटों के लिए उसे ना खाना दिया गया था, ना पानी दिया. उसके बाद उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया, जहां पर अमित आज भी बंद हैं. इस पूरी घटना के बारे में अमित के परिवार को उन्हीं की कंपनी के दोस्तों ने जानकारी दी थी. घर वालों का ये भी मानना है कि कंपनी में किसी और ने कुछ गलत किया होगा और कंट्री हेड होने की वजह से अमित को गिरफ्तार किया गया. अमित के पैरेंट्स का ये भी कहना है कि अमित की गिरफ्तारी के लिए कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई.

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कौन है अमित?

अमित गुप्ता टेक महिंद्रा में क़तर और कुवैत के कंट्री हेड के रूप में काम कर रहे थे. वे पिछले तीन साल से ये पद संभाल रहे थे और इसी कंपनी में कुल 12 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं. उन्होंने करियर की शुरुआत 2002 में की थी. अमित न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियों में काम कर चुके हैं. उन्होंने मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक और इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट दिल्ली से एमबीए की डिग्री ली है. अमित की शादी 2013 में हुई थी. उनकी पत्नी का नाम आकांक्षा गुप्ता है और उन्होंने शादी के बाद अगस्त में क़तर में बसने का फैसला लिया था. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक अप्रैल 2022 में उन्हें टेक महिंद्रा का रीजनल हेड बनाया गया था. तब से लेकर अब तक अमित इसी कंपनी से जुड़े हैं.

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टेक महिंद्रा का क्या है रुख?

टेक महिंद्रा की तरफ से कहा गया है कि कंपनी लगातार परिवार को सपोर्ट कर रही है. उनकी हर ज़रूरी मदद की जा रही है. सीनियर स्टाफ क़तर में मौजूद भारतीय दूतावास के साथ मिलकर केस का फॉलोअप ले रहे हैं. कंपनी के कर्मचारी का हित उनके लिए सबसे ज़रूरी है.

परिवार का क्या है कहना?

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अमित के घरवालों का कहना है कि हफ्ते में केवल 1 बार वो अमित से 5 मिनट के लिए बात कर सकते हैं. दूतावास के हस्तक्षेप के बाद इसे हफ्ते में दो बार कर दिया गया है. अमित हर कॉल पर अपने आपको निर्दोष बताता है और उसे बचाने की गुहार लगाता है. अमित के पिता ने क़तर में उनसे मुलाकात भी की… जहां अमित बार-बार ये कहता रहा कि उसने कुछ गलत नहीं किया है. पत्नी का कहना है कि अमित डिप्रेशन में हैं. अगर उन्हें कुछ हुआ तो पूरा परिवार बिखर जाएगा. फिलहाल वडोदरा के भाजपा सांसद हेमंग जोशी ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और मदद की बात कही है.

फिलहाल अमित के परिजनों ने वडोदरा के भाजपा सांसद हेमंग जोशी से मुलाकात की. सांसद ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और मदद की बात कही है.

 क्या कहता है क़तर का कानून?

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डेटा चोरी के मामले में अगर अमित दोषी ठहराए जाते हैं तो उन्हें क़तर के कानून के हिसाब से जेल और जुर्माना का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन यह कितना होगा, यह जांच के बाद पता चलेगा. चिंता का विषय इसीलिए भी है क्योंकि क़तर के कानून में शरिया सिद्धांतों का पालन किया जाता है, जो काफी ज्यादा सख्त हैं. इस कानून के तहत हाल ही में भारत की बेटी शहजादी को मौत की सजा सुनाई गई थी.

सरकार का रुख

अमित गुप्ता के मामले में भारतीय दूतावास करीब से नज़र बनाए हुए है. दूतावास अमित गुप्ता के परिवार, उनके वकील और क़तर के अधिकारियों के संपर्क में है. इस मामले में दूतावास सभी संभव मदद दे रहा है.

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 जब भारत पहले भी हुआ था कुछ ऐसा

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2022 में क़तर ने भारतीय नेवी के आठ अधिकारियों को कथित जासूसी के मामले में गिरफ्तार किया था. 2023 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी. लेकिन भारत के प्रयासों के बाद सभी को रिहा कर दिया गया था. बहरहाल, अमित गुप्ता की गिरफ्तारी भारतीय सरकार के लिए एक नई डिप्लोमैटिक चुनौती बन चुकी है. भारत और क़तर के बीच अच्छे राजनयिक रिश्ते रहे हैं, लेकिन इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कड़ी बातचीत की ज़रूरत होगी. भारतीय सरकार और टेक महिंद्रा दोनों ही इस मामले में गुप्ता की सहायता कर रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द सरकार इस पर कोई कदम उठाएगी.

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