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UP में घर-घर जाएंगी बिजली कंपनियों की टीमें, उपभोक्ता बताएंगे स्मार्ट मीटर की खामियां

Electricity Bill: मीटरों से बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है, मीटर बहुत तेज चल रहे हैं और कई बार बैलेंस भी सही तरीके से दिखाई नहीं देता. इन्हीं शिकायतों और जगह-जगह हो रहे विरोध को देखते हुए भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने अब एक अहम फैसला लिया है, ताकि उपभोक्ताओं की बात सीधे सुनी जा सके और भ्रम दूर किया जा सके.

Image Source: Social Media
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Smart Meters: उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आम बिजली उपभोक्ताओं में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है. लोगों का कहना है कि इन मीटरों से बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है, मीटर बहुत तेज चल रहे हैं और कई बार बैलेंस भी सही तरीके से दिखाई नहीं देता. इन्हीं शिकायतों और जगह-जगह हो रहे विरोध को देखते हुए भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने अब एक अहम फैसला लिया है, ताकि उपभोक्ताओं की बात सीधे सुनी जा सके और भ्रम दूर किया जा सके.

9 से 23 फरवरी तक ‘स्मार्ट मीटर पखवाड़ा’

ऊर्जा मंत्रालय ने देश की सभी बिजली वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि 9 फरवरी से 23 फरवरी तक “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाए. इस दौरान बिजली विभाग की टीमें उन सभी घरों में जाएंगी, जहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं. इसका मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं की समस्याएं समझना और उन्हें दर्ज करना भी है.

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घर-घर जाकर होगा स्मार्ट मीटर का प्रदर्शन

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सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, इस पखवाड़े के दौरान बिजली कंपनियों को यह जरूरी होगा कि वे हर उपभोक्ता के घर जाकर स्मार्ट मीटर का डेमोंस्ट्रेशन करें.  यानी मीटर कैसे काम करता है, बैलेंस कैसे देखा जाए, रिचार्ज कैसे होता है और बिजली की खपत कैसे समझी जाए, यह सब मौके पर ही समझाया जाएगा. उपभोक्ताओं से फीडबैक लेना भी अनिवार्य किया गया है.

उपभोक्ता खुलकर रख सकेंगे अपनी समस्याएं

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इस कार्यक्रम का सबसे अहम हिस्सा यह है कि उपभोक्ता अपनी सारी परेशानियां खुलकर बता सकेंगे. चाहे समस्या ज्यादा बिल आने की हो, मीटर के तेज चलने की हो, बैलेंस न दिखने की हो या किसी तकनीकी गड़बड़ी की हर शिकायत को लिखित रूप में दर्ज करना जरूरी होगा. कार्यक्रम खत्म होने के बाद सभी राज्यों को 15 दिनों के भीतर अपनी समेकित रिपोर्ट भारत सरकार को भेजनी होगी.

उपभोक्ताओं से विशेष अपील

अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि जब उनके घर स्मार्ट मीटर का प्रदर्शन सत्र हो, तो वे अपनी कोई भी समस्या छिपाएं नहीं. हर परेशानी को लिखित रूप में दर्ज कराएं, ताकि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खामियों को लेकर उपभोक्ताओं की एक मजबूत और सामूहिक आवाज केंद्र सरकार तक पहुंच सके. इससे बिजली कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

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उत्तर प्रदेश में मीटर लगे, लेकिन रिपोर्ट नहीं भेजी गई

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 61 लाख 64 हजार से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें से लगभग 47 लाख मीटर प्रीपेड मोड में चल रहे हैं. इसके अलावा करीब 3 लाख 92 हजार चेक मीटर भी लगाए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन चेक मीटरों की मिलान रिपोर्ट आज तक भारत सरकार को नहीं भेजी गई. इस मुद्दे को लेकर उपभोक्ता परिषद लगातार भारत सरकार और आरईसी (REC) से शिकायत करता आ रहा है.

ज्यादा बिल और तकनीकी खामियां बड़ी समस्या

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उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ही 8 लाख से ज्यादा उपभोक्ता ऐसे हैं जो अपने स्मार्ट मीटर का बैलेंस तक नहीं देख पा रहे हैं. इसके अलावा ज्यादा बिल आने, मीटर के तेज चलने और अन्य तकनीकी खामियों के कई गंभीर मामले सामने आए हैं. कुछ जरूरी तकनीकी मानकों की अनदेखी करने पर एक नामी मीटर निर्माता कंपनी को नोटिस भी जारी किया जा चुका है.

देशभर में हो रहा है स्मार्ट मीटर का विरोध

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यह समस्या सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र (मुंबई), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात सहित देश के कई राज्यों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं का विरोध चल रहा है. लोग चाहते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान हो, पारदर्शिता आए और बिजली कंपनियां मनमानी न कर सकें.

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