Advertisement

Loading Ad...

बंगाल SIR में ड्यूटी से इनकार कर रहे टीचर्स, बगावत बर्दाश्त नहीं करेगा चुनाव आयोग, सख्त एक्शन की तैयारी

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में उन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जिन्होंने उन्हें आवंटित बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) का कार्यभार स्वीकार करने से इनकार किया है. अक्टूबर में होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और अगले साल के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए, शिक्षकों को बीएलओ नियुक्त किया गया है.

Gyanesh Kumar (File Photo)
Loading Ad...

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में उन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला करेगा, जो उन्हें आवंटित बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के कर्तव्यों को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं.

बीएलओ सौंपा जा रहा काम 

अक्टूबर में त्योहारी सीजन के अंत में राज्य में होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, शिक्षकों को बीएलओ के रूप में कार्यभार सौंपा जा रहा है. कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय बीएलओ कार्यभार ग्रहण करने से इनकार करने वाले शिक्षकों के बारे में चुनाव आयोग को विस्तृत रिपोर्ट भेजने वाला है.

Loading Ad...

आयोग की संभावित कार्रवाई

Loading Ad...

सीईओ कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर, घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगा, जिस पर सीईओ कार्यालय कार्रवाई करेगा. सीईओ कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि 'पिछले महीने कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने फैसला सुनाया था कि आयोग द्वारा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बीएलओ नियुक्त करने के फैसले में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। इसके बावजूद कई शिक्षकों ने बीएलओ कार्यभार ग्रहण करने से इनकार कर दिया है.' न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने कहा था कि देश के कानूनी प्रावधान शिक्षकों को चुनाव संबंधी कार्यभार सौंपने की अनुमति देते हैं. हालांकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी कई शिक्षकों ने बीएलओ ड्यूटी लेने में अनिच्छा दिखाई है। अब आयोग उन पर सख्त कार्रवाई करना चाहता है.

छुट्टियों में होगी ड्यूटी

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

4 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सिन्हा ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो, तो शिक्षकों को राष्ट्रहित में रविवार और छुट्टियों के दिन भी काम करना चाहिए. सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि शिक्षकों के एक बड़े वर्ग द्वारा काम करने में अनिच्छा के कारण, सीईओ कार्यालय को केवल राज्य सरकार के वेतनभोगी स्थायी कर्मचारियों को ही बीएलओ की ड्यूटी आवंटित करने में समस्या आ रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दल राज्य सरकार के संविदा कर्मचारियों को बीएलओ के रूप में नियुक्त करने के खिलाफ मुखर हैं. शिक्षकों द्वारा बीएलओ की ड्यूटी लेने में अनिच्छा के कारण यह मामला आयोग के संज्ञान में लाया जाएगा और उसके बाद सीईओ कार्यालय, चुनाव आयोग के निर्देशानुसार कार्य करेगा.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...