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‘हिंदी के लिए कोई जगह नहीं’ CM स्टालिन ने फिर भड़काया भाषा विवाद, अब दी नई चेतावनी

CM स्टालिन ने कहा, भाषा युद्ध में अब और कोई जान नहीं जाएगी. स्टालिन ने अपने बयान से एक बार फिर भाषा विवाद को और भड़का दिया है.

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Language Row: भाषाई लड़ाई ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मोटी लकीर खींच दी. जिन राज्यों में BJP शासन नहीं है. वहां हिंदी के खिलाफ एक तरह का हठ छिड़ गया. खासकर दक्षिणी राज्यों में, जहां सरकारें किसी भी कीमत पर हिंदी को जगह नहीं देना चाहती. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम के स्टालिन ने तमिल भाषा शहीद दिवस पर कहा कि यहां हिंदी के लिए कभी भी कोई जगह नहीं होगी. 

एम के स्टालिन ने तमिल भाषा शहीद दिवस पर भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि दी. भाषा शहीद यानी वे लोग जिन्होंने तमिल के लिए अपनी जान दी. CM स्टालिन ने कहा, भाषा युद्ध में अब और कोई जान नहीं जाएगी. ये दिवस उन लोगों के नाम दर्ज है जिन्होंने 1964-65 के दौरान तमिलनाडु में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन में आत्मदाह के जरिए अपने प्राणों की आहुति दी थी. 

‘एक ऐसा राज्य जिसने अपनी भाषा से अपनी जान की तरह प्यार किया, उसने एकजुट होकर हिंदी थोपने के खिलाफ संघर्ष किया. हर बार जब भी इसे थोपा गया, उसी तेजी से विरोध किया.’

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‘हिंदी का हमेशा विरोध करेंगे’

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एम के स्टालिन ने हिंदी के खिलाफ विरोध को तेज करते हुए कहा, हम इसे थोपने का हमेशा विरोध करेंगे. तमिल भाषा के लिए हमारा प्यार कभी नहीं मरेगा. उन्होंने कहा, जब-जब हिंदी को हम पर थोपा गया, इसका उसी तेजी से विरोध भी किया गया. 

भाषा शहीदों के वीडियो शेयर कर दी श्रद्धांजलि

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CM स्टालिन ने सोशल मीडिया पर भाषा आंदोलन के इतिहास से संबंधित वीडियो भी शेयर किया. जिसमें 1965 के दौरान हुए हिंदी विरोधी आंदोलन और शहीद और करुणानिधि समेत DMK के अन्य नेताओं के योगदान के बारे में बताया गया. स्टालिन ने कहा, मैं उन शहीदों को कृतज्ञतापूर्वक सम्मान देता हूं जिन्होंने तमिल के लिए अपनी कीमती जान दे दी. उन्होंने आश्ववस्त किया कि भाषा युद्ध में अब और कोई जान नहीं जाएगी. स्टालिन ने जोर दिया कि तमिलनाडु ने हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करके उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई राष्ट्रीय जातियों के अधिकार और पहचान की रक्षा की. 

तमिलनाडु में दो भाषा नीति लागू 
 
तमिलनाडु में हिंदी का हमेशा से ही व्यापक विरोध होता रहा. हाल ही में राज्य में केंद्र की थ्री लैंग्वेज नीति (Three Language Policy) का व्यापक विरोध हुआ. ये राज्य तमिल और अंग्रेजी दो-भाषा नीति का पालन करता है. स्टालिन सरकार ने इस नीति में हिंदी को शामिल किए जाने का पुरजोर विरोध किया था. स्टालिन ने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से हिंदी थोपे जाने का आरोप लगाती रही है. 

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हालांकि तमिलनाडु में भाषाई विवाद सांस्कृतिक ही नहीं राजनीतिक भी रहा है. द्रविड़ आंदोलन से निकली DMK का राजनीतिक वजूद भाषा पर टिका हुआ है. पार्टी के इतिहास को खंगाले तो DMK के हिंदी विरोधी आंदोलनों में कई कार्यकर्ताओं ने जान गंवाई. DMK सरकार का हिंदी भाषा विरोध ऐतिहासिक, वैचारिक और राजनीतिक आधार पर टिका हुआ है. जिसमें हिंदी DMK के राजनीतिक वजूद के लिए खतरा है. 

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