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भारत से बातचीत, शांति के रास्ते पर चीन…शिवभक्तों को दिया बड़ा तोहफा

भारत-चीन के बीच रिश्तों में सुधार की बड़ी उम्मीद जगी है. दोनों देशों के बीच फिर से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर सहमति बन गई. भगवान शिव के दिव्य स्थान कैलाश पर्वत पर एख बार फिर भक्तों का तांता लगेगा

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भारत चीन के बीच फिर एक बार सबकुछ सामान्य होने की आस जगी है और दोनों देशों के बीच रिश्तों के सुधार की कड़ी बना है भगवान शिव का दिव्य स्थल कैलाश मानसरोवर। विदेश मंत्रालय ने शिव भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सुनाई है लाखों लोगों की आस्था का केंद्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है।


तिब्बत की पर्वतमालाओं के बीच बसा कैलाश मानसरोवर ना केवल हिंदू बल्कि जैन धर्मावलंबियों के लिए भी खास महत्व रखता है शिव का घर माने जाने वाले कैलाश पर्वत तक जाने के लिए भक्तों ने पांच साल तक इंतजार किया है लेकिन इंतजार की ये घड़ियां समाप्त हुईं। एक बार फिर शिवभक्त कैलाश यात्रा करेंगे. विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि इस साल गर्मी की शुरूआत के साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी शुरू हो जाएगी।विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि, "विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने भारत और चीन के बीच विदेश सचिव और उप विदेश मंत्री के साथ बैठक के लिए बीजींग का दो दिन का दौरा किया था। इस दौरान दोनों पक्षों ने 2025 की गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने का फैसला किया "

विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमति बन गई। इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाई सर्विस भी फिर से बहाल होगी। क्योंकि साल 2020 में कोविड लहर के बाद चीन के लिए फ्लाइट सर्विस को बंद कर दिया गया था।

 क्यों बंद हुई थी कैलाश मानसरोवर यात्रा ? 


साल 2019 में कोविड की पहली लहर में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर ब्रेक लग गया था।  इसके बाद 2020 में डोकलाम विवाद, सीमा पर चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच झड़प के बाद यात्रा पर रोक लग गई। लेकिन एक बार फिर दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधार की ओर बढ़ रहे हैं। 

PM मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात से जगी आस।


माना जा रहा है कैलाश मानसरोवर यात्रा पर चीन और भारत के बीच समझौते की नींव रूस के कजान में रखी गई। साल 2024 अक्टूबर में BRICS समिट के दौरान PM मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान आपसी संबंधों को बेहतर बनाने और आपसी भरोसे पर जोर देने पर चर्चा हुई। दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन एक बार फिर मिलकर काम करें इसके लिए सीमा पर सुरक्षा, शांति और भरोसा बेहद जरूरी है। मोदी- शी जिनपिंग की इस मुलाकात का असर उस वक्त भी दिखा जब भारत-चीन सीमा के विवादित इलाीके डेमचोक और देपसांग में दोनों देशों की सेना पीछे हटने लगीं।और अब कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर शुरू होने की घोषणा देशवासियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं।

 चीन के कब्जे में ज्यादातर इलाका ।


कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से संचालन के लिए चीन से बात इसलिए भी जरूरी थी क्योंकि यह तिब्बत के इलाके में आता है और तिब्बत पर चीन अपना अधिकार जताता है।

कैलाश पर्वत की मान्यता ।

कहा जाता है कैलाश पर्वत भगवान शिव का घर है। हिंदू पुराणों के अनुसार, शिव यहां पत्नी पार्वती के साथ रहते थे। हिंदुओं के साथ साथ जैन धर्म से जुड़े तीर्थकर ऋषभनाथ ने इसी स्थान से मोक्ष प्राप्त किया था इसलिए जैन धर्म के लिए भी कैलाश मानसरोवर का खास महत्व है। हिंदू धर्म के 4 वेदों में भी कैलाश मानसरोवर का जिक्र है।

जब चीन ने तोड़ा समझौता ।

2020 में भारत चीन सैनिकों के बीच तनाव के बाद चीन ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर रोक लगा दी थी। उस वक्त भारत की ओर से चीन पर 2013 और 2014 में हुए समझौतों को तोड़ने का आरोप लगाया गया था।


क्या हैं चीन के साथ हुए समझौते ? 

पहला समझौता साल 2013 में हुआ था। भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रा मार्ग से होकर कैलाश मानसरोवर जाने पर समझौता ।तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और चीन के विदेश मंत्री के बीच हुआ समझौता।
दूसरा समझौता साल 2014 में हुआ। सिक्किम के नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने पर समझौता। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन के विदेश मंत्री से की थी बात ।
GFX OUT 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने की खबर के साथ ही शिव भक्तों में खुशी का माहौल है। ये यात्रा आस्था के साथ रोमांच और रहस्यों से भी भरी रहती है। वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरूआत के साथ ही दोनों देशों के बीच रिश्तों के सुधार की उम्मीद भी बढ़ गई है। माना जा रहा है भारत चीन के बीच आगे भी रिश्तों को ऐसे ही गति मिलेगी।

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