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तालिबान का अफगान महिलाओं के लिए सख्त निर्देश ! क्या कहता है ये नैतिकता कानून (Morality Law)?
तालिबान ने अफगानिस्तान में अब नैतिकता कानून (Morality Law) लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस कानून के आधार पर महिलाओं के अधिकारों को काफी हद तक सीमित कर दिया गया है. महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों को कुचलने वाले प्रतिबंध तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा द्वारा मंज़ूर किए गए हैं।
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अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। तालिबान सरकार ने महिलाओं की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों के कारण अफगान महिलाएँ अपने अधिकारों से वंचित हो गई हैं और उन्हें घरों में कैद होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
तालिबान ने अफगानिस्तान में अब नैतिकता कानून (Morality Law) लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस कानून के आधार पर महिलाओं के अधिकारों को काफी हद तक सीमित कर दिया गया है. महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों को कुचलने वाले प्रतिबंध तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा द्वारा मंज़ूर किए गए हैं।
क्या कहता है तालिबान का ये नैतिकता कानून (Morality Law)?
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तालिबान अधिकारियों द्वारा लागू किए गए इस कानून में 35 अनुच्छेद हैं जैसे महिलाओं को घर से बाहर निकलने के लिए मुँह और शरीर पूरी तरह से ढकना होगा। सार्वजनिक जगहों पर उन्हें आवाज़ भी धीमे रखने की ज़रूरत है। इस कानून के मुताबिक़ महिलाएँ बहुत ज़रूरी होने पर ही घर से बाहर निकल सकती हैं। महिलाओं के अलावा पुरुषों को भी कुछ चीज़ों का ध्यान रखना अनिवार्य है जैसे घुटने के ऊपर शॉर्ट्स नहीं पहन सकते या दाढ़ी को छोटा या ट्रिम करने पर भी रोक है।
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इसके अलावा इस कानून में नमाज़ पढ़ना अनिवार्य है। किसी जीवित की तस्वीर रखना, समलैंगिकता, एनिमल फाइटिंग, पब्लिक प्लेस में म्यूजिक बजाना और गैर-मुस्लिम छुट्टियां celebrate करना भी इस कानून के तहत मना है।
इतने कड़े प्रतिबंध लगाने के बावजूद UN ने तालिबान को राहत देते हुए कहा की वो तालिबान से संपर्क में रहेगा। New York में UN के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) और इसकी प्रमुख रोजा ओटुनबायेवा का बचाव करते हुए कहा कि नये कानून अफगानिस्तान के भविष्य के लिए एक ‘दुखद दृष्टिकोण’ पेश करते हैं। दुजारिक ने एक press conference के दौरान कहा, ‘अफगानिस्तान में महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी को लगभग खत्म करने के फैसले के खिलाफ हम बहुत मुखर रहे हैं। मेरा मतलब है कि हम अफगानिस्तान में तालिबान सहित सभी हितधारकों के साथ संपर्क बनाये रखेंगे।’
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तालिबान ने सभी देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से आह्वान किया है की मुसलमानों के धार्मिक मूल्यों का सम्मान करें। साथ ही उसने घोषणा की कि वह UNAMA के साथ अब सहयोग नहीं करेगा क्योंकि इसने इन कानूनों की आलोचना की।