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लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बिहार, RN रवि बंगाल....मोदी सरकार ने बदल डाले कई राज्यों के गवर्नर-LG, जानें कौन-कहां भेजा गया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार करने के साथ-साथ कई राज्यों के राज्यपालों, LG को बदलने, नई नियुक्तियों की मंजूरी दे दी है. सरकार ने दिल्ली, बिहार, बंगाल, लद्दाख, तमिलनाडु सहित कई राज्यों के गवर्नर बदल डाले हैं.

RN Ravi And Ata Hasnain (File Photo)
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केंद्र की मोदी सरकार ने बीती रात कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल और उपराज्यपाल बदल डाले और नई नियुक्तियां कीं. सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली, लद्दाख, बिहार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में नए उपराज्यपाल (LG) और राज्यपालों की नियुक्ति की. आपको बताया जाए कि पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को राजधानी दिल्ली का LG बनाया गया है.

वहीं लंबे समय तक दिल्ली के उपराज्यपाल की कमान संभालने वाले विनय सक्सेना की लद्दाख के LG के तौर पर तैनाती की गई है. वहीं बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही राज्यपाल भी बदल गए हैं. लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है. वो आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेंगे.

आपको बताया जाए कि ये बदलाव विभिन्न राज्यों में राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए हैं. राष्ट्रपति भवन से जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नियुक्तियां प्रभावी होंगी जब संबंधित अधिकारी अपने पद का कार्यभार संभालेंगे.

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किसे कहां भेजा गया?

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नई नियुक्तियों की सूची के अनुसार हिमाचल प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है. वहीं, नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है.

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है. तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी मिली. केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अतिरिक्त प्रभार में तमिलनाडु के राज्यपाल का कार्यभार सौंपा गया है.

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इसके अलावा, लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है. दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. वहीं, तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है.

ये नियुक्तियां केंद्र सरकार की ओर से राज्यों में शासन व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं. विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में डॉ. सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आरएन रवि की नियुक्ति महत्वपूर्ण है. रवि पहले तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सरकार के साथ कई मुद्दों पर टकराव के लिए चर्चित रहे हैं. उनकी नई जिम्मेदारी में राज्यपाल भवन और तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच संबंधों पर सबकी नजरें टिकी हैं.

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड): राज्यपाल, बिहार

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बिहार में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन की नियुक्ति को भी खास माना जा रहा है. वे अपनी सैन्य पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं. भारतीय सेना के दिग्गज अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन अपने नियमित लेख, विचार, भाषण, लेक्चर्स के जरिए देश और सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं.

जनरल हसनैन को रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है और उनके पास कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का व्यापक अनुभव है. उनकी उपयोगिता बांग्लादेश-नेपाल से सटे राज्य बिहार में काफी होगी.

तरनजीत सिंह संधू: उपराज्यपाल, दिल्ली

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वहीं, दिल्ली में तरनजीत सिंह संधू, जो पूर्व राजनयिक और अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं, उपराज्यपाल के रूप में दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच समन्वय की भूमिका निभाएंगे. राजधानी दिल्ली में बीजेपी की नई सरकार और बदले रक्षा-सुरक्षा ढांचे में उनका योगदान काफी अहम होगा.

विनय कुमार सक्सेना: उपराज्यपाल, लद्दाख

लंबे समय तक दिल्ली के उपराज्यपाल रहे विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है. वो कविंदर गुप्ता की जगह लेंगे. सक्सेना को दिल्ली में राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय के साथ काम करने का अनुभव है. वहीं उनके पास दूसरों के मुकाबले दिल्ली यानी केंद्र की मोदी सरकार की सोच और विजन को लेकर भी स्पष्टता है, जिसका फायदा लद्दाख जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र और केंद्र शासित प्रदेश में मिलेगा.

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आर एन रवि: राज्यपाल, पश्चिम बंगाल

तमिलनाडु के राज्यपाल रहे आर एन रवि को अब पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है. पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि ने उग्रवाद विरोधी अभियानों और पूर्वोत्तर भारत में शांति वार्ताओं (विशेषकर नगा शांति वार्ता) का नेतृत्व किया है. उन्हें आंतरिक सुरक्षा और घुसपैठ विरोधी अभियान का एक्सपर्ट माना जाता है.

तमिलनाडु में राष्ट्रगान जैसे नीतिगत और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर स्टालिन सरकार के साथ उनका टकराव रहा. पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के बीच उनकी नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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नंद किशोर यादव, राज्यपाल, नागालैंड

बिहार में बीजेपी के पहली पीढ़ी के नेताओं में से एक नंद किशोर यादव का विधायक, मंत्री से लेकर राज्य के स्पीकर तक के तौर पर कार्य करने का अनुभव है. हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने चुनावी राजनीति से हटने का फैसला किया था. सरकार ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए नागालैंड जैसे संवेदनशील लेकिन अहम राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया है. आपको बता दें कि यादव बिहार विधानसभा में कई बार विधायक रहे हैं और उन्होंने सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है.

जिष्णु देव वर्मा: राज्यपाल, महाराष्ट्र

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तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है. वर्मा त्रिपुरा के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और राज्य के शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उन्हें पूर्वोत्तर में भाजपा को जमीनी आधार देने और पार्टी को खड़ा करने वाले नेताओं में शुमार किया जाता है.

शिव प्रताप शुक्ला: राज्यपाल, तेलंगाना

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना भेजा गया है. शुक्ला केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है.

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राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर: राज्यपाल, तमिलनाडु

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अब तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. आर्लेकर गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और बिहार के राज्यपाल रह चुके हैं. उन्होंने केरल में आरिफ मोहम्मद खान की जगह ली थी.

कविंदर गुप्ता: राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश

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लद्दाख के उपराज्यपाल रहे कविंदर गुप्ता को अब पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. वो शिव प्रताप शुक्ला का स्थान लेंगे, जिन्हें तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है. गुप्ता जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और बीजेपी की अहम शख्सियतों में से एक माने जाते हैं. उनके पास लंबा राजनीतिक व प्रशासनिक अनुभव है. राज्य में सरकार बनाने के लिए संघर्ष करने वाली बीजेपी ने जब गठबंधन की सरकार बनाई थी तो कविंदर गुप्ता को बीजेपी की ओर से पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था.

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