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DDO की सैलरी पर लटकी तलवार, योगी सरकार लेने वाली है एक कड़क एक्शन!

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। अपनी चल अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले कर्मचारियों को बचाने वाले डीडीओ का भी वेतन रोकने की तैयारी की जा रही है। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी विभागों को निर्देश जारी कर दिया है।

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उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath अपने ही सरकारी कर्मचारियों के ऊपर एक ऐसा तगड़ा एक्शन लेने की तैयारी कर रहें है। जिससे सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है। अपने जिम्मेदारी को सही तरीके से नहीं निभाने वाले कर्मचारियों के लिए योगी का ये एक्शन एक बड़े झटके की तरह साबित होगा। इस झटके के बाद जो सरकारी कर्मचारी अपने काम में लापरवाही बरतते है। उन्हें एक सबक भी मिल जाएगी। 

दरअसल यूपी की योगी सरकार चल अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले कर्मियों को बचाने वाले DDO यानी की आहरण विरतण अधिकारी का वेतन रोकने की तैयारी कर रही है। इस पूरे मामले पर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी विभागों को निर्देश दे दिया है। इस निर्देश के तहत मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति की घोषणा कर सकते है। लेकिन इसके लिए डेडलाईन 30 सितंबर तक की रखी गई है। मुख्य सचिव ने कहा है कि 'जिन कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है। सिर्फ उन्हें और उनके DDO को सितंबर महीने की सैलरी दी जाएगी। ठीक इसी तरह जिन कर्मचारियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा ऑनलाईन पोर्टल पर नहीं डाला है। उनको और उनके DDO को सितंबर की सैलरी नहीं मिलेगी, उनकी सैलरी रोक दी जाएगी।' 

मुख्य सचिव की तरफ से जो आदेश जारी किया गया है उसमें 90 परसेंट कर्मचारी अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड कर चुके है। 12 सिंतंबर तक यूपी के कुल 8 लाख 44 हजार 374 में से 7 लाख 19 हजार 807 कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी संपत्ति की डिटेल पोर्टल पो अपलोड कर दी है। आने वाले समय में ये आंकड़े बढ़ सकते है। क्योंकि इसपर सरकार ने बड़ा एक्शन लेने का ऐलान कर दिया है। इधर आदेश में ये भी कहा गया है कि ये जिम्मेदारी सभी विभागों के अध्योक्षों का है। वो सभी कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा दर्ज कराएं। अगर इसमें कोई समस्या आ रही है तो नोडल अधिकारी से बातचीत कर इस समस्या का समाधान करें। 

कुल मिलाकर देखे तो योगी के शासन में हर उस व्यक्ति पर कार्रवाई होगी जो अपने काम में लापरवाही बरतेगा। भले ही वो अधिकारी उसी शासन में क्यों न हो। योगी सराकर ने जिस तरह से अपने ही कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ तगड़ा एक्शन लिया है।

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