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अफजाल अंसारी के 'गांजा ज्ञान' पर भड़के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, कहा-राजनीति कीजिए, संतो के बारे में बोलेंगे तो दिक्कत हो जाएगी

उत्तर प्रदेश की गाजीपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद व मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने गांजे को लेकर एक विवादित बयान दिया है। अफजाल अंसारी के इस बयान के बाद साधु-संतों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

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समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी ने हाल ही एक बयान दिया है जिसने साधु-संतों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अंसारी ने गांजे को कानूनी वैधता देने की मांग की है और इसे भगवान शिव का प्रसाद बताया है। अफजाल अंसारी के इस बयान के बाद साधु-संतों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। केंद्रीय संत समिति ने अंसारी को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें साधु-संतों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका तक सीमित रहना चाहिए।

अफजाल अंसारी ने क्या कहा ?

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, अफजाल अंसारी ने कहा, "अगर शराब और भांग को कानूनी मान्यता प्राप्त है, तो गांजे को भी वैध कर दिया जाए। लोग इसे खुलेआम पी रहे हैं और इसे भगवान शिव का प्रसाद मानते हैं, तो फिर इसे अवैध क्यों माना जा रहा है?" अंसारी का यह बयान साधु-संतों के बीच आग की तरह फैल गया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों और कुंभ जैसे बड़े मेलों में लोग गांजे का सेवन करते हैं, तो इसे कानून का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता? उनके इस बयान के बाद से साधु-संतों में गहरी नाराजगी है।

अंसारी के बयान के बाद, केंद्रीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने खुलकर इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, "अफजाल अंसारी को संतों के धार्मिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। संतों की अपनी एक परंपरा और आस्था होती है, जिसे समझना और उसमें दखल देना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।" स्वामी जितेंद्रानंद ने आगे कहा कि अंसारी को अपनी राजनीति तक सीमित रहना चाहिए और साधु-संतों के धार्मिक मामलों में कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। संतों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि "साधु-संतों की थाली में क्या आ रहा है, इसे देखने का अधिकार किसी को नहीं है।"

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केंद्रीय संत समिति की चेतावनी

केंद्रीय संत समिति ने अंसारी को कड़ी चेतावनी दी है कि वह अपने बयानों में सावधानी बरतें। स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि अंसारी के इस बयान से साधु-संतों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि संतों की अपनी धार्मिक परंपराएं हैं, जिनमें बाहरी लोगों को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।  अफजाल अंसारी का दावा है कि साधु-संत गांजे का सेवन करते हैं और इसे भगवान शिव का प्रसाद मानते हैं। हालांकि, संत समाज का कहना है कि उनकी परंपराएं और उनके धार्मिक आचरण अंसारी की सोच से बहुत अलग हैं। स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि,"अफजाल अंसारी खुद को हलाला और अपने धार्मिक मामलों तक सीमित रखें। साधु-संतों की परंपराएं हजारों साल पुरानी हैं, और इन्हें राजनीतिक उद्देश्यों के लिए गलत तरीके से पेश करना बिल्कुल गलत है।"

उन्होंने आगे कहा कि संत समाज के रीति-रिवाज और धर्म से जुड़ी चीजें किसी बाहरी व्यक्ति के हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं हो सकतीं। उनका मानना है कि अंसारी का बयान साधु-संतों की छवि को धूमिल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

अफजाल अंसारी राजनीति पर ध्यान दें

केंद्रीय संत समिति ने साफ शब्दों में कहा है कि अफजाल अंसारी अपनी राजनीति पर ध्यान दें, धार्मिक मामलों में दखल देना बंद करना चाहिए। संतों का मानना है कि अंसारी के बयान से उनकी धार्मिक आस्थाएं और परंपराएं प्रभावित हो रही हैं, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

यह मुद्दा सिर्फ धार्मिक संतों और अफजाल अंसारी के बीच का नहीं रह गया है, बल्कि अब यह राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। कई राजनीतिक दलों ने अंसारी के बयान की आलोचना की है और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया है। वहीं, अंसारी के समर्थकों का कहना है कि वह सिर्फ समाज में प्रचलित दोहरे मापदंडों को उजागर कर रहे हैं।

वाराणसी से शिवम गुप्ता की रिपोर्ट
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