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क्या वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट आज देगा अंतरिम आदेश? इन 3 पॉइंट पर फंसा है पूरा केस

वक्फ संशोधन कानून को लेकर देश की सर्वोच्च न्यायालय में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई होनी है. कयास लगाए जा रहे है कि इस मामले में आज न्यायालय द्वारा अंतरिम आदेश भी दिया जा सकता है.

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वक्फ संशोधन कानून को लेकर देश की सर्वोच्च न्यायालय में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई होनी है. कयास लगाए जा रहे है कि इस मामले में आज न्यायालय द्वारा अंतरिम आदेश भी दिया जा सकता है. इससे पहले बुधवार को दो घंटे की सुनवाई के दौरान वक्फ कानून के विरोध में याचिकाओं पर न्यायलाय के समक्ष मुस्लिम पक्ष और केंद्र सरकार ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थीं. इसके बाद केंद्र ने इस कानून के विरोध में दायर याचिकाओं पर दो हफ़्ते के अंदर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है. आइए अब आपको बताते है कि वक्फ एक्ट से जुड़े वो कौन से तीन संशोधन कौन से है, जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश दे सकता है.  


इन तीन बिंदुओ पर कोर्ट देगा अंतरिम आदेश 

दरअसल, बुधवार को वक्फ एक्ट के विरोध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस कानून पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था. साथ ही देशभर में इस कानून को लेकर हो रही हिंसा और विरोध प्रदर्शन पर अपनी चिंता ज़ाहिर की थी. आज कोर्ट की सुनवाई में दौरान वक्फ घोषित संपत्तियों को डिनोटिफाइ न करने, वक्फ बोर्ड में कलेक्टर की शक्तियों और वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों को शामिल करने पर कोर्ट द्वारा अंतरिम आदेश दिया जा सकता है. 


पहले दिन कोर्ट ने क्या कहा?

वक्फ एक्ट के विरोध में दायर याचिकाओं पर पहले दिन बुधवार को सुनवाई के दौरान वक्फ बाय यूजर' संपत्तियों का दर्जा का मुद्दा उठा, जिसमें जिसमें 'वक्फ बाय यूजर' संपत्तियां जिन्हें पहले कोर्ट के आदेशों के तहत वक्फ घोषित की गया था. वक्फ के नए कानून के तहत इसे अमान्य करने की बात कही गई है. याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सीजीआई ने कहा इन सम्पत्तियों को डिनोटिफाई करने से बड़ी समस्या पैदा हो सकती है. क्योंकि कई संपत्तियां सदियों पुरानी है. ऐसी सम्पत्तियों के कागजात हो यह भी जरूरी नहीं है. कोर्ट ने वक्फ के रूप में पहले से मान्य संपत्तियों का दर्जा बदला नहीं जाना चाहिए. वही नए कानून के तहथ वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान पर कोर्ट ने कहा ये  धार्मिक स्वायत्तता के खिलाफ है. केंद्र बताए कि क्या आप हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुस्लिम सदस्यों को जगह दे पाएंगे. अदालत ने कहा कि मुस्लिमों को ही वक्फ बोर्ड और काउंसिल का स्थायी सदस्य होना चाहिए. इन दो विषयों के अलावा एक मुख्य विषय नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड में जिलाधिकारियों की शक्तियों का मुख्य मुद्दा था. इसमें अगर ज़िलाधिकारी किसी संपत्ति  की पहचान सरकारी संपत्ति के रूप में करता है तो वो वक्फ नहीं मानी जाएगी, कोर्ट ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताई और कहा कलेक्टर की जांच के दौरान संपत्ति का वक्फ दर्जा खत्म नहीं होना चाहिए। वो जांच कर सकता है लेकिन अंतिम फैसला नहीं दे सकता. 


बताते चले कि कोर्ट में आज पक्ष और विपक्ष दोनों दलीलों पेश होंगी, जो तय करेगा कि कोर्ट इस कानून पर क्या रास्ता निकालता. इसके अलावा सवाल यह भी है कि अगर सर्वोच्च न्यायालय अंतरिम आदेश देता है तो उसके क्या मायने होंगे. इससे पहले वक्फ संशोधन एक्ट 2025 की संवैधानिकता के खिलाफ 72 याचिकाओं से जुड़ी सुनवाई सीजीआई संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने की
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