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क्या एंटी हिंदू कहलाने की चिंता नहीं…? पूर्व CJI ने दिया जवाब, राजनीति में एंट्री पर किया बड़ा इशारा

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI बी आर गवई ने जूता फेंकने की घटना, राज्यसभा और खुद को हिंदू विरोधी कहे जाने के सवालों पर जवाब दिया.

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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई रिटायरमेंट के बाद क्या राजनीति में आएंगे? क्या वे राज्यसभा जाएंगे? या फिर किसी राज्य का गर्वनर बनना पसंद करेंगे? इन तमाम सवालों का जवाब खुद पूर्व CJI ने दिया है. इसके अलावा उन्होंने पहली बार जूता फेंकने की घटना का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया. 

दरअसल, पूर्व CJI बी आर गवई ने हाल ही में इंडिया टूडे को इंटरव्यू दिया. जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. साथ ही साथ रिटायरमेंट प्लान के बारे में भी बताया. जब बातचीत में जस्टिस गवई से पूछा गया- जब बात जूता फेंके जाने की आई, तो क्या आप सोशल मीडिया सेना से नहीं भिड़ना चाहते थे? ये सोशल मीडिया आर्मी आपकी कुछ बातों की वजह से काफी आलोचना कर रही थी. 

जूता फेंकने की घटना पर क्या बोले पूर्व CJI? 

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इस सवाल का जवाब देते हुए बी आर गवई ने कहा, 'मैंने हमेशा माना है कि कानून की शान किसी को सजा देने में नहीं, बल्कि माफ करने में है' उन्होंने सोशल मीडिया को लेकर कहा, उस घटना के बाद जब भी मुझे कुछ कहना होता था, तो मैं खुद को रोक लेता था, क्योंकि कुछ वास्तविक और सिर्फ हल्की फुल्की बातों को गलत तरीके से लिया जाता है. 

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क्या हिंदू विरोधी कहलाने की चिंता नहीं? 

पूर्व CJI पर हिंदू विरोधी जैसे आरोपों पर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया, 'क्या आपको इस बात की चिंता होती है कि सोशल मीडिया पर लोग आपकी किसी बात को लेकर दावा करेंगे कि जस्टिस गवई हिंदू विरोधी हैं? क्या न्यायाधीशों को इस बात की चिंता होती है कि सोशल मीडिया क्या कह रहा है? 

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इसका जवाब देते हुए बी आर गवई ने कहा- उसका मुझपर कोई असर नहीं पड़ा है. मेरी अंतरात्मा साफ थी और मैंने हमेशा कहा है कि मैं सभी धर्मों का बहुत सम्मान करता हूं. मेरे पिता बहुत सेक्युलर व्यक्ति थे, सेक्युलर नेता थे. पूर्व CJI ने कहा, मैंने हमेशा उनकी खूबियों को अपनाने की कोशिश की है और इन्हें ध्यान में रखकर ही फैसले लिए हैं. मुझे एंटी हिंदू कहा जाना बिल्कुल गलत है. मुझे नहीं पता कि जूता फेंके जाने की घटना का उससे कोई लेना देना था. 

ये भी पढ़ें- CJI Surykant Oath: आर्टिकल 370 से लेकर पेगासस जासूसी विवाद तक… देश के नए चीफ जस्टिस के वो बड़े फैसले जो चर्चा में रहे

दरअसल, अक्टूबर में राकेश किशोर नाम के वकील ने तत्कालीन CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. उस समय बी आर गवई केस की सुनवाई कर रहे थे. तभी 71 साल के राकेश किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की. हालांकि, जस्टिस गवई ने वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था. उस समय बी आर गवई ने कहा था, यह अब भूला हुआ अध्याय है. 

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जूता फेंकने वाले वकील ने क्या कहा था? 

राकेश किशोर ने CJI गवई को लेकर कहा था, 'बात यह है कि मैं बहुत ज्यादा आहत हुआ कि 16 सितंबर को चीफ जस्टिस की कोर्ट में किसी व्यक्ति ने जनहित याचिका डाली थी, तो गवई साहब ने पहले तो उसका पूरी तरह से मजाक उड़ाया. मजाक यानी यह कहा कि आप मूर्ति से प्रार्थना करो जाकर, मूर्ति से कहो जाकर कि अपना सिर खुद दोबारा बना लें. मूर्ति के सामने जाकर ध्यान लगाएं. वकील ने कहा, यह अन्याय है शख्स की याचिका खारिज करने पर मैं आहत था. 

क्या राज्यसभा जाएंगे बी आर गवई? 

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इंटरव्यू के दौरान बी आर गवई से राज्यसभा या किसी अन्य सरकारी पद लेने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया. पूर्व CJI ने कहा, वह रिटायरमेंट के बाद राज्यपाल या राज्यसभा से जुड़ा कोई पद नहीं स्वीकार करेंगे. हालांकि राजनीति में जाने की संभावना से पूरी तरह इंकार भी नहीं किया. उन्होंने कहा है कि फिलहाल वह कोई पद लेने पर विचार नहीं कर रहे हैं. 

बुलडोजर एक्शन पर क्या बोले पूर्व CJI? 

इंटरव्यू में उनसे बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया- 'ये स्पष्ट है कि बुलडोजर के शासन पर कानून का शासन हावी होना चाहिए, लेकिन इसे लागू करना जरूरी है.'
उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल पर कहा, ये संसद का दायित्व है कि वह भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच और सजा की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाए.

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