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'ऐसा समर्पण और सेवा कहीं नहीं', संघ के 100 साल पूरे होने पर दलाई लामा ने जताया RSS का आभार

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 साल पूरे होने पर शुभकामनाएँ दी हैं. उन्होंने कहा है कि आरएसएस (RSS) शुरू से ही भारत में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों के लिए काम किया है. साथ ही निस्वार्थ भाव से भारत की परंपराओं को बचाने में अहम भूमिका निभाई है.

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तिब्बती समस्या का जिक्र करते हुए 90 साल के दलाई लामा ने कहा कि तिब्बती शरणार्थियों और उनकी समस्याओं के समाधान में खास तौर पर आरएसएस का योगदान है. इसके लिए संपूर्ण तिब्बती समुदाय उनका हार्दिक आभारी है.

अनेक धर्मों, दर्शन एवं विद्याओं की भूमि आर्यावर्त

दलाई लामा ने अपने संदेश में कहा, आर्यावर्त प्राचीन काल से ही अनेक धर्मों, दर्शन एवं विद्याओं की भूमि रहा है, जिसके कारण भारत विश्वगुरु के रूप में माना जाता रहा, दसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों से अनेक बाहरी व्यवधानों के कारण प्राचीन भारतीय धर्मों, दर्शन एवं विद्याओं की क्षति हुई है. फिर भी असंख्य निस्वार्थ महापुरुषों के अथक प्रयास ने भारत की परम्पराओं को विलुप्त होने से बचाए रखा.

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देश-समाज सेवा में 50 साल से लगा है RSS 

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संघ की सेवा का उल्लेख करते हुए दलाई लामा ने कहा कि वह आरएसएस के कार्य को पिछले 50 सालों से देख रहे हैं. ये निस्वार्थ भाव से देश और समाज की भलाई में लगा रहा है. संघ की स्थापना ही निस्वार्थ भाव से कर्तव्य करने के लिए हुई है. इससे जुड़ते ही व्यक्ति को मन और साधन को शुद्ध रखने की शिक्षा दी जाती है। संघ ने सौ वर्षों की यात्रा में समर्पण और सेवा जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वैसा किसी और ने नहीं किया है.

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