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'किसी भी ऑफर से रहें दूर...', भारत ने अपने नागरिकों को रूसी सेना में शामिल न होने की दी सलाह, रूस से भी की ये खास अपील

विदेश मंत्रालय ने रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती के संबंध में हालिया खबरों पर भारतीय नागरिकों से आग्रह करते हुए कहा कि वे रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी ऑफर से दूर रहें क्योंकि यह खतरे से भरा रास्ता है.

Randhir Jaiswal
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विदेश मंत्रालय ने रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती के संबंध में हालिया खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक साल में कई बार इस तरह की भर्तियों से जुड़े जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया है और भारतीय नागरिकों को इसके प्रति सावधान रहने की सलाह दी है. 

उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रालय प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों के संपर्क में है. प्रवक्ता ने भारतीय नागरिकों से रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव से दूर रहने की जोरदार अपील की और इसे 'खतरों से भरा कदम' करार दिया.

दरअसल भारत सरकार ने भारत के नागरिकों से आग्रह किया है कि वो यूक्रेन जंग के बीच रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी ऑफर को स्वीकार नहीं करें क्योंकि यह खतरे से भरा रास्ता है. रूसी सेना में भर्ती भारतीयों पर मीडिया के सवालों के जवाब में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक बयान जारी करके सरकार का पक्ष रखा है.

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विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान 

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बयान में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है: "हमने हाल ही में रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती के बारे में रिपोर्टें देखी हैं. सरकार ने पिछले एक साल में कई मौकों पर इससे जुड़े जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया है और उसके अनुसार भारतीय नागरिकों को आगाह किया है. हमने दिल्ली और मॉस्को, दोनों में रूसी अधिकारियों के साथ भी मामला उठाया है, और अनुरोध किया है कि इस प्रैक्टिस को समाप्त किया जाए और हमारे नागरिकों को रिलीज किया जाए. हम प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों के साथ भी संपर्क में हैं. हम एक बार फिर सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी ऑफर से दूर रहें क्योंकि यह खतरे से भरा रास्ता है.''

शवों की वापसी की भी सुविधा प्रदान की है- विदेश राज्य मंत्री

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इसके अलावा विदेश राज्य मंत्री ने इस साल की शुरुआत में एक सवाल का जवाब देते हुए संसद में कहा था, "सरकार ने संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले सात भारतीय नागरिकों के शवों की वापसी की भी सुविधा प्रदान की है; ऐसे दो अन्य मामलों में, शवों का अंतिम संस्कार रूस में किया गया था. सरकार विदेश में सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और सहायता के लिए कोई भी अनुरोध प्राप्त होने पर उचित कार्रवाई करती है."

भारतीय नागरिकों को धोखे से रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेजा गया- रिपोर्ट

यह बयान हाल की उन खबरों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया कि कुछ भारतीय नागरिकों को धोखे से रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेजा गया. एक प्रमुख अखबार में दावा किया गया कि पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में मौजूद दो भारतीय पुरुषों को निर्माण कार्य के बहाने रूस लाया गया, लेकिन उन्हें युद्ध के मोर्चे पर तैनात कर दिया गया. नवंबर 2024 में रूस की ओर से कब्जाए गए सेलिडोव शहर से फोन पर बात करते हुए, उन्होंने दावा किया कि कम से कम 13 अन्य भारतीय भी ऐसी ही परिस्थितियों में फंसे हैं.

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रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों भारतीय पिछले 6महीनों में स्टूडेंट या विजिटर वीजा पर रूस गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि एक एजेंट ने उन्हें निर्माण क्षेत्र में रोजगार का वादा किया था, लेकिन धोखे से उन्हें युद्धक्षेत्र में भेज दिया गया.

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