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स्पीकर ओम बिरला ने अखिलेश यादव को दी नसीहत, कहा- जिसमें निर्णय लेने की क्षमता हो, उन्हें ही कमेटी की बैठक में भेजें…

SIR पर चर्चा की मांग को लेकर पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाता नजर आया. हंगामे के कारण लोकसभा स्पीकर नाराज हो गए और कह दिया कि जिसमें निर्णय लेने की क्षमता हो, उन्हें ही बिजनेस एडवाइजरी की बैठक में भेजा करें

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संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा की शुरुआत हुई. लेकिन विपक्ष ने यहां जमकर हंगामा कर दिया, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही को 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा. दरअसल जैसे ही चर्चा की शुरूआत हुई, वैसे ही विपक्ष बिहार में मतदाता सूची के SIR पर चर्चा की मांग करने लगा. जिसपर स्पीकर ओम बिरला ने आपत्ती जताई. लोकसभा स्पीकर विपक्ष के रवैये से नाजर नजर आए.

ओम बिरला ने सपा नेता अखिलेश यादव से कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में नेताओं को सोच समझकर भेजा करें. वहां बात कुछ और करते हैं और सदन में रवैया कुछ और रहता है. ऐसे नेता को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भेजें जिसमें निर्णय लेने की क्षमता हो. बिजनेस एडवाइजरी की बैठक में आपने क्यों नहीं कहा कि हम SIR पर पहले चर्चा चाहते हैं, क्यों कहा ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा चाहते हैं. 

सरकार SIR पर नहीं चाहती चर्चा- कांग्रेस
वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए तैयार हैं. हमने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए खुद अपील की थी और ऑपरेशन सिंदूर पर एक विशेष सत्र बुलाने के लिए कहा था, लेकिन सरकार उस पर सहमत नहीं हुई. हम नियमित सत्र के दौरान भी चर्चा के लिए सहमत हैं, लेकिन समस्या ये है कि इस देश के लोकतंत्र के लिए ‘SIR’ सबसे अहम मुद्दा है. हर भारतीय नागरिक अब इस बात को लेकर चिंतित है कि कब उनका नाम मतदाता सूची से कट जाएगा.

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उन्होंने कहा, ‘हमने सरकार से कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के बाद ‘SIR’ पर भी चर्चा होनी चाहिए. इसके लिए हमें उस मुद्दे को उठाने के लिए 30 सेकंड की अनुमति चाहिए. सरकार सहमत हो या नहीं, वो हमें अपनी राय बता सकती है… लेकिन लगता है सरकार इस (SIR के मुद्दे पर) चर्चा करने में दिलचस्पी नहीं ले रही है. विपक्षी दल के नेता स्पीकर के पास भी गए और हमने स्पीकर से अनुरोध किया है कि हमें अनुमति दें.’

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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘सुबह से जो हम देख रहे हैं, उससे लग रहा है कि सरकार पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा नहीं चाहती. हम चाहते हैं कि विपक्ष का माइक चालू रहे ताकि देश को पता चले कि हमें बोलने नहीं दिया जाता और हम पर आरोप लगाए जाते हैं. हम ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम पर चर्चा चाहते हैं, आपने देखा कि जिन दो मुद्दों पर सदन स्थगित हुआ, उन पर न तो विपक्षी सांसद वेल में गए, न प्लेकार्ड उठाए, न ही नारे लगाए और उसके बाद भी सदन स्थगित हुआ. हम चर्चा के लिए तैयार हैं.’

सरकार ने लगाया विपक्ष पर आरोप
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने आज दोपहर 12 बजे लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू करने का फैसला किया था, लेकिन चर्चा शुरू होने से ठीक 10 मिनट पहले वे (विपक्ष) एक नई मांग लेकर आ गए और सरकार से किसी अन्य मुद्दे पर पहले प्रतिबद्धता जताने को कहा. उन्होंने कहा, ‘वे ऑपरेशन सिंदूर पर बहस से भाग रहे हैं.’

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘आज लोकसभा में विपक्ष का जो रवैया रहा वह स्पष्ट इस निष्कर्ष को साबित करता है कि कांग्रेस पार्टी और उनके मित्र विपक्षी दल, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर और हमारे जवानों और सेना बलों ने जो भारत का गौरव बढ़ाया उस पर चर्चा करने से भाग रहे हैं. यह निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है और नकारात्मक मानसिकता का एक प्रमाण है. वे(विपक्ष) देश और देश की जनता की भावनाओं के साथ नहीं खड़े हैं. आज बहुत महत्वपूर्ण बहस थी. अंतिम समय पर राहुल गांधी भी सदन में नहीं आए. उनके लोग तितर-बितर थे. विपक्ष ने सदन को चलाने नहीं दिया. विपक्ष अभी तक देश के सेना बलों की वीरता के ऊपर गर्व नहीं कर पा रहा है. इसके लिए भारत की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी.’

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