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सोनिया और राहुल गाँधी पर लगा 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़पने का आरोप? नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी का बड़ा खुलासा, कहा - 90 करोड़ देकर की बड़ी धोखाधड़ी...

नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी की मुसीबत बढ़ सकती है. बुधवार को विशेष अदालत में ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वी राजू ने 90 करोड़ के शेयर के जरिए सोनिया-राहुल पर 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़पने की साजिश का खुलासा किया है. कोर्ट ने इस मामले में ईडी से 3 जुलाई तक जवाब देने को कहा है.

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नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है. इस बीच दिल्ली की एक विशेष अदालत में इस मामले में एक बड़ी सुनवाई हुई. जहां सोनिया और राहुल के ऊपर लगे धोखाधड़ी के आरोपों की परतें लगातार खुलती गईं. कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों के ऊपर आरोप लगे हैं कि 'यंग इंडिया' नाम की कंपनी बनाकर 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़पने की साजिश रची थी. 

सोनिया-राहुल पर लगे 2,000 करोड़ की संपत्ति हड़पने का आरोप

बुधवार को दिल्ली की एक विशेष अदालत में नेशनल हेराल्ड मामले में सुनवाई के दौरान पेश हुए ईडी के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वी राजू ने कोर्ट के सामने कहा कि 'अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी' बोर्ड से 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़पने की बड़ी साजिश रची जा रही थी. इसके लिए पार्टी ने एक 'यंग इंडिया' नाम की कंपनी बनाई थी. इस कंपनी ने 90 करोड़ नहीं, बल्कि सिर्फ 50 लाख रुपए के कर्ज लिए थे. ऐसे में यह पूरा मामला धोखाधड़ी का शक पैदा करता है. 

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अदालत ने 'यंग इंडिया' कंपनी से जुड़े सवाल पूछे 

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वी राजू के दावे के जवाब में अदालत ने 'यंग इंडिया' कंपनी को लेकर सवाल किया कि AJL के पास जब कर्ज चुकाने लायक संपत्ति नहीं है, तो क्या वह इतनी बेवकूफ है कि बिना फायदे का कर्ज लेगी. यह कंपनी तो काफी पुरानी है. आजादी से पहले चलती आ रही है और इसका नाता गांधी परिवार से भी काफी पुराना है, तो ऐसे में 'यंग इंडिया' ने इसे क्यों और कैसे लिया? 

'मामला हिस्ट्री का नहीं पैसों के गलत इस्तेमाल का है'

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ईडी ने अदालत का जवाब देते हुए कहा कि 'यह मामला हिस्ट्री का नहीं बल्कि पूरी तरीके से पैसों के गलत इस्तेमाल का है. फिलहाल उनके पास या एआईसीसी के खिलाफ इतने बड़े सबूत नहीं है कि वह इस मामले में आरोपी बनाएं. एआईसीसी को अभी भी आरोपी नहीं बनाया है. इसका मतलब यह नहीं कि बाद में ना बनाया जाए, यह हमारा हक है कि हम उन्हें भविष्य में आरोपी बना सकें. 

'50 लाख में 2,000 करोड़ की संपत्ति चली जाती है'

ईडी का यह भी कहना है कि आरोपियों ने कंपनी का मोलभाव करने के लिए कोई भी टेंडर नहीं निकाला. उन्होंने मनमानी ढंग से इसे 'यंग इंडिया' को दे दिया, जो उनको 50 लाख रुपए देता है और फिर कंपनी में ले लेता है. यह साजिश का पहला भाग है. इसके बाद 'यंग इंडिया' के पास इसे चुकाने के लिए पैसे ही नहीं बचते हैं. जिसके बाद वह कोलकाता चले जाते हैं. वहां शेल कंपनियां हैं. 'यंग इंडिया' ने वहां जाकर 1 करोड़ रुपए के कर्ज का खेल रचा. वहीं कंपनी की बैलेंस शीट काफी नेगेटिव थी, लेकिन 1 करोड़ रुपए का उसको कर्ज मिल गया. यह सारा पैसा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सामने आने के बाद आता है. सिर्फ 50 लाख रुपए में AJL की 2,000 करोड़ की संपत्ति 'यंग इंडिया' को चली जाती है. इसके बाद यह एक होल्डिंग कंपनी बन जाती है और AJL एक सहायक कंपनी की भूमिका में आ जाती है. 

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'यंग इंडिया' कंपनी पर राहुल और सोनिया गांधी का नियंत्रण' 

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वी राजू ने ईडी चार्जशीट का हिस्सा पढ़ते हुए कोर्ट को बताया कि 'जांच के जरिए पता चलता है कि 'यंग इंडिया' कंपनी राहुल और सोनिया के निमंत्रण में थी. दोनों ने ही मिलकर सोची समझी साजिश के तहत करीब 76% शेयर अपने पास रखे थे और वास्तव में यह कंपनियां उन्हीं के नियंत्रण में थी, जो इसके संचालन के भी जिम्मेदार थे. बता दें कि अगर इस मामले में एआईसीसी को आरोपी बनाया जाता है, तो सोनिया और राहुल दोनों का नाम सेक्शन 70 के तहत आ सकता है. वहीं अदालत ने ईडी से 3 जुलाई तक अपना जवाब पेश करने को कहा है. अदालत ने यह भी सवाल किया है कि साल 2010 से पहले जब 'यंग इंडिया' का निर्माण नहीं हुआ था? तो इस कंपनी में कौन-कौन जिम्मेदार थे? 

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