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SIR Date Extended: चुनाव आयोग ने बढ़ाई SIR प्रक्रिया, जानिए अब कब तक होगा नाम अपडेट?

SIR: चुनाव आयोग द्वारा चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच, सुधार और अपडेट किया जा रहा है. यूपी में एक बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्या सामने आई है. करीब 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स की मैपिंग अभी तक पूरी नहीं हो पाई है

Image Source: Social Media
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SIR Date Extended: उत्तर प्रदेश में इस समय वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद चल रहा है. चुनाव आयोग द्वारा चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच, सुधार और अपडेट किया जा रहा है. इसी प्रक्रिया को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाए हैं कि इसके जरिए खास तौर पर मुस्लिम और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट काटने की साजिश हो रही है. उनका कहना है कि फॉर्म 7, जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए होता है, उसे “हथियार” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत चल रही है.

चुनाव आयोग ने तारीख क्यों बढ़ाई

दरअसल, यूपी में एक बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्या सामने आई है. करीब 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स की मैपिंग अभी तक पूरी नहीं हो पाई है. यानी वोटर तो हैं, लेकिन उनके दस्तावेज़ या विवरण ठीक से सत्यापित नहीं हो पाए हैं. इसी वजह से लगभग सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से SIR की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की थी. इसे स्वीकार करते हुए आयोग ने एक महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है. अब नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े फॉर्म 6 और फॉर्म 7 भरने की आखिरी तारीख 6 मार्च कर दी गई है. वहीं, ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) इन फॉर्म्स पर 27 मार्च तक फैसला लेंगे. इसके बाद 10 अप्रैल को यूपी की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी.

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अब तक क्या-क्या हुआ: आंकड़ों की तस्वीर

यूपी के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर नवदीप रिणवा के मुताबिक, पिछले एक महीने में करीब 38 लाख लोगों ने फॉर्म 6 भरकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए आवेदन किया है. जिन लोगों के नाम पहले से लिस्ट में थे लेकिन उनकी मैपिंग नहीं हो पाई थी, ऐसे 3 करोड़ 26 लाख वोटर्स को नोटिस भेजे जाने थे. अभी तक 2 करोड़ 37 लाख लोगों को ही नोटिस मिल पाए हैं और 30 लाख से ज्यादा लोगों की सुनवाई हो सकी है. यही वजह है कि पूरी प्रक्रिया को समय देने के लिए अवधि बढ़ाई गई.

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फॉर्म 6 और फॉर्म 7 को लेकर सियासी खींचतान

आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 54 लाख से ज्यादा फॉर्म 6 जमा हो चुके हैं. इनमें से ज्यादातर आम नागरिकों ने भरे हैं, जबकि BLAs (बूथ लेवल एजेंट) की ओर से फॉर्म 6 की संख्या बहुत कम है. वहीं, फॉर्म 7 कुल 1.33 लाख से ज्यादा जमा हुए हैं. इनमें BLAs की ओर से नाम हटाने के लिए दिए गए फॉर्म 7 सिर्फ 1,567 हैं, जबकि बाकी आम नागरिकों की ओर से हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि बिना जांच और सुनवाई के किसी का नाम नहीं हटाया जा सकता.

आरोप, बचाव और जमीनी राजनीति

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अखिलेश यादव का आरोप है कि फॉर्म 7 के जरिए खास समुदायों के वोट काटे जा रहे हैं. इसके जवाब में चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि नियमों के बिना कोई वोट नहीं कट सकता. दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी खुद जगह-जगह कैंप लगाकर लोगों से फॉर्म 6 और 7 भरवा रही है, ताकि उनके वोट सुरक्षित रहें. लखनऊ कैंट जैसे इलाकों में सपा नेता लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. वोटर लिस्ट का यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है.

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