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तू डाल-डाल, मैं पात-पात.., कर्नाटक की कुर्सी के लिए आपस में भिड़े सिद्धारमैया-शिवकुमार, अब कांग्रेस हाईकमान की एंट्री

Karnataka: सीएम की कुर्सी के लिए सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रहे विवाद के बीच अब कांग्रेस आलाकमान की एंट्री हो गई है.

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"तू डाल-डाल, मैं पात-पात", ये कहावत तो आपने सुनी होगी, कुछ ऐसा ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में देखने को मिल रहा है. कांग्रेस के दो बड़े नेता आमने-सामने हैं. राज्य के सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी की लड़ाई जारी है. ये सब कुछ कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के ढाई साल बाद हो रहा है. डीके शिवकुमार के समर्थक उन्हें सीएम बनाना चाहते हैं. वहीं, सिद्धारमैया हैं कि कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं है. हालाँकि, जो कुछ भी अभी हो रहा है. इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है. क्योंकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ये तो एक दिन होना ही था. 

सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम शिवकुमार में क्यों ठनी?

कर्नाटक में सीएम बदलने को लेकर तनाव 20 नवंबर 2025 को शुरू हुआ. इसी दिन कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के ढाई साल भी पूरे हुए हैं. कुछ लोग इसे ‘नवंबर क्रांति’ कह रहे हैं. दरअसल, साल 2023 में कांग्रेस की जीत के बाद सिद्धारमैया को सीएम बनाया गया था, लेकिन कथित तौर पर ढाई साल के बाद डीके शिवकुमार को सत्ता सौंपने का अनौपचारिक समझौता हुआ था. अब चुंकि, सीएम सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे हो गए हैं, इसलिए डीके शिवकुमार के समर्थकों ने कथित तौर पर सिद्धारमैया के ख़िलाफ़ बिगुल फूंक दिया है. वहीं, सिद्धारमैया पूरे पाँच साल के कार्यकाल पूरा करने का ऐलान कर चुके हैं. हालाँकि, जानकारी के मुताबिक़ बंद कमरे में जब समझौता हुआ था तब सिद्धारमैया ने कहा था, ‘मैं सिद्धारमैया हूँ, वादा निभाऊंगा. ढाई साल पूरे होने से एक हफ़्ते पहले इस्तीफ़ा दे दूंगा’

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खड़गे से मुलाक़ात के बाद नरम पड़े सिद्धारमैया

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जानकारी के मुताबिक़ सिद्धारमैया कार्यकाल पूरा करने के अपने फ़ैसले पर अड़े हुए थे, लेकिन पार्टी में बढ़ते अंदरूनी कलह को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोर्चा संभाला. 22 नवंबर को मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात के बाद अब सिद्धारमैया का सुर नरम पड़ा है और उन्होंने निर्णय हाईकमान पर छोड़ दिया. 

पहले भी पलटी मार चुके हैं सिद्धारमैया

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पार्टी  के लोगों का कहना है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब सिद्धारमैया अपने बयान से पीछे हट रहे हैं. साल 2013 के चुनाव को सिद्धारमैया ने आख़िरी चुनाव कहा था, लेकिन 2018 में भी चुनाव लड़े. चामुंडेश्वरी सीट से हारे लेकिन बादामी सीट से जीत हासिल की. साल 2023 में फिर से चुनाव लड़े और सीएम के तौर पर सिर्फ़ ढाई साल माँगा. लेकिन अब ये कहा जा रहा है कि फिर से अपने वादे से पीछे हट रहे हैं.

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