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शशि थरूर के बयान से कांग्रेस में हलचल, 'ऑपरेशन सिंदूर' पर समर्थन बना विवाद

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' की खुलकर प्रशंसा करते हुए इसे 'सुनियोजित' और 'राष्ट्रीय हित' में उठाया गया कदम बताया है। लेकिन उनके इस बयान ने कांग्रेस पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है। पार्टी नेतृत्व ने भले ही अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की हो, लेकिन आंतरिक सूत्रों के अनुसार थरूर के इस बयान को अनुशासनहीनता माना जा रहा है।

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भारत-पाकिस्तान सीमा पर भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर जहां देशभर में सरकार की सराहना हो रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर की प्रतिक्रिया ने पार्टी के भीतर तूफान खड़ा कर दिया है. थरूर ने इस सैन्य कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी, जिसे लेकर उन्हें अब पार्टी के भीतर से ही आलोचना झेलनी पड़ रही है. 

व्यक्तिगत बयान या पार्टी लाइन से विचलन?

बुधवार को मीडिया से बातचीत में थरूर ने स्पष्ट किया कि यह उनके निजी विचार हैं और वह किसी भी तरह से कांग्रेस पार्टी या केंद्र सरकार की ओर से बयान नहीं दे रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बयान एक भारतीय नागरिक के रूप में दिया और कोई भी उनसे असहमति रख सकता है.
 
थरूर ने कहा कि 'मैं न तो सरकार का प्रवक्ता हूं और न ही पार्टी का. इस कठिन समय में जब देश की संप्रभुता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तब मैंने एक भारतीय के रूप में अपने विचार रखे. मैं चाहता हूं कि हमारी आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनी जाए, खासकर अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व जैसे देशों में जहां भारत की कूटनीतिक स्थिति को लेकर अक्सर एकतरफा दृष्टिकोण सामने आता है.'

कांग्रेस में मतभेद गहराए

 शशि थरूर का यह बयान उनकी यह स्वतंत्रता कांग्रेस पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को रास नहीं आई. पार्टी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई एक बंद कमरे की बैठक में थरूर के बयान खासकर पाकिस्तान और POK में भारतीय हवाई हमलों को ‘सुनियोजित’ और ‘सही समय पर किया गया निर्णय’ कहने से कांग्रेस नेतृत्व का एक धड़ा नाराज़ नजर आया. सूत्रों का कहना है कि पार्टी इसे "लक्ष्मण रेखा पार करना" मान रही है. जबकि पार्टी की आधिकारिक लाइन यह रही है कि सैन्य कार्रवाई जैसे विषयों पर बेहद सतर्क और संतुलित बयान दिए जाएं.

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने सीमापार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों की लंबी योजना का हिस्सा थी और इसका उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क को निशाना बनाना था. इस ऑपरेशन की वैश्विक स्तर पर सराहना हुई है और भारत की कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूती मिली है. ऐसे में शशि थरूर जैसे अनुभवी नेता की तरफ से समर्थन जताना स्वाभाविक माना जा सकता था. लेकिन कांग्रेस में इस पर मतभेद उभर आए हैं.

यह पहली बार नहीं है जब थरूर अपनी ही पार्टी के स्टैंड से अलग जाकर बयान दे रहे हैं. इससे पहले भी वे कई मुद्दों पर स्वतंत्र विचार रख चुके हैं, जिन्हें लेकर पार्टी में हलचल मची थी. इस बार भी, हालांकि कांग्रेस ने अब तक थरूर के खिलाफ कोई आधिकारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पर चुप्पी साध रखी है. इससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी इस विवाद को ज्यादा तूल नहीं देना चाहती, लेकिन भीतरखाने नाराज़गी साफ तौर पर मौजूद है.

अपने रुख पर डटे रहेंगे थरूर

थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी की ओर से कोई चेतावनी या संदेश नहीं मिला है और वह अपने विचारों पर कायम रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि 'राष्ट्रहित के मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़कर एकजुट होना चाहिए.' उनका मानना है कि आज जब भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मज़बूत करनी है, तब अंदरूनी सियासत को राष्ट्रहित से ऊपर नहीं रखना चाहिए.

इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस पार्टी में विचारधारा और रणनीति के टकराव को उजागर कर दिया है. जहां एक ओर पार्टी नेतृत्व मोदी सरकार की विदेश और रक्षा नीतियों पर आलोचना करने की राह पर है, वहीं दूसरी ओर थरूर जैसे नेता राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार का समर्थन करने से पीछे नहीं हट रहे. यह भविष्य में कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
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