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योगी का इस्तीफ़ा मांग रहे शंकराचार्य को महाकुंभ की जनता ने ‘खदेड़ा’ !

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अखिलेश यादव के साथ हाल ही में मुलाक़ात की थी, लीजिये अब वही शंकराचार्य सीएम योगी का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं। देखिये क्या है पूरी ख़बर।

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महाकुंभ को जितना दिव्य और भव्य बनाने का सपना उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देखा था, उसमें उतना ही सेंध लगाने का काम विधर्मी ताक़तें करती हुई नजर आई हैं। 28 जनवरी की रात को महाकुंभ में जिस तरह से भगदड़ मची उसके बाद एक तरफ़ योगी से लेकर मोदी तो पीड़ित परिवारों की मदद में जुट गये, हालातों का जायज़ा लेने में जुटे रहे लेकिन विरोधी दल के नेता योगी सरकार पर तंज कसने का एक और मौक़ा भुनाते हुए नज़र आने लगे।

अखिलेश यादव ने तो सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर मोर्चा खोल लिया। चिल्ला चिल्लाकर सुझाव देने लगे कि उप्र सरकार को महाकुंभ में फंसे लोगों के राहत के लिए व्यवस्था संबंधित सुझाव : 

  • भोजन-पानी के लिए जगह-जगह दिन-रात ढाबे खोलने और भंडारों के आयोजन की अपील की जाए। 
  • प्रदेश भर से मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ़ को स्वयं सेवी लोगों के दुपहिया वाहनों के माध्यम से दूरस्थ इलाक़ों में फँसे लोगों तक पहुँचाने की व्यवस्था हो। 
  • महाकुंभ के आस-पास और प्रदेश भर में मीलों तक फँसे वाहनों को पेट्रोल-डीज़ल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  • दवाई की दुकानों को दिन-रात खोलने की अनुमति दी जाए।
  • ⁠लोगों को कपड़े और कंबल दिये जाए।

जहां हज़ारों करोड़ रूपये प्रचार पर और दुर्घटना की ख़बरें दबाने के लिए बहाए जा रहे हैं वहाँ पीड़ितों के लिए कुछ करोड़ ख़र्च करने से सरकार पीछे क्यों हट रही है?

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हद तो तब हो गई जब कई मोर्चे पर मोदी सरकार का विरोध करने वाले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भी योगी के इस्तीफे की मांग करने लगे। शंकराचार्य ने साफ कह दिया कि 

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ये मौजूदा सरकार की बहुत बड़ी विफलता है। ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।सरकार को खुद ही हट जाना चाहिए या फिर जिम्मेदार लोगों को इस मामले में दखल देना चाहिए। ये ऐसी दुखद घटना है जिसे सनातनियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। आने वाले दिनों में रोजाना लाखों करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे। अगर इस घटना को लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में इससे बड़ी घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामले में बेहद सख्त कार्रवाई जरूरी है। 

महाकुंभ में मची भगदड़ को भले ही वक़्त रहते कंट्रोल कर लिया गया स्थिति सामान्य कर ली गई लेकिन इतनी तेज़ी में अखिलेश के साथ साथ शंकराचार्य ने योगी को घेरा जैसे बस सीधा टार्गेट योगी ही तो थे, मन मांगी मुराद पूरी हो गई।

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एक तरफ़ योगी के ख़िलाफ़ ये दोनों ही दिग्गज तंज कसते हुए नज़र आये तो वहीं दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया पर अखिलेश और इन्हीं शंकराचार्य की तस्वीर भी देखते ही देखते वायरल होने लगी। इस तस्वीर में शंकराचार्य अपने आसान पर तो वहीं अखिलेश ज़मीन पर बैठकर हाथ जोड़े नज़र आ रेह हैं। इसी तस्वीर को शेयर करते हुए एक यूज़र ने लिखा- महाकुंभ में घटना होने से दो दिन पहले अखिलेश यादव इन पाखंडी शंकराचार्य से मिले थे घटना हो जाने के बाद यही शंकराचार्य योगी जी से इस्तीफा मांग रहे हैं।

इसी तस्वीर पर एक यूज़र ने लिखा- यह बाबा योगी जी से इस्तीफा मांग रहा है और अखिलेश यादव जी से हंस-हंसकर बातें करना कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता यह घटना रची रचाई साजिश थी जिसमें हो सकता है यह बाबा भी सम्मिलित हो अपनी राजनीतिक रोटी सीखने के लिए यह कुछ भी कर सकते हैं बाबा का बयान सिर्फ भाजपा के विरोध में ही होता है…एक यूज़र ने भगदड़ पर योगी का बचाव करते हुए लिख दिया- भाई, योगी जी ने धार्मिक आयोजनों में हमेशा श्रद्धालुओं के लिए बेहतर इंतजाम किए हैं। बावजूद इसके कुम्भ में हृदयविदारक घटना घटित हुई। योगी जी स्वयं रो पड़े। सिर्फ़ यही नहीं महाकुंभ आये श्रद्धालुओं तो आज भी योगी के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं।

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वैसे ये वही शंकराचार्य हैं जिनको अखिलेश सरकार के राज में पुलिस ने खूब घसीटा था लेकिन फिर भी देखिये आज योगी राज में VVIP ट्रीटमेंट मिल रहा है तो रास नहीं आ रहा, इसीलिए देश की जनता में शंकराचार्य के ख़िलाफ़ भी उबाल देखा जा रहा है। बहरहाल कुंभ में भगदड़ से ठीक पहले शंकराचार्य और अखिलेश यादव की मुलाक़ात फिर भगदड़ के बाद शंकराचार्य का योगी से इस्तीफा मांगना निश्चित तौर पर कुछ ना कुछ इशारा तो ज़रूर कर रहा है। 


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